Mani Shankar Aiyar On Congress Rahul Gandhi: पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी और तमिलनाडु में एमके स्टालिन (DMK) की करारी हार के बाद विपक्षी खेमे ‘INDIA गठबंधन’ में उथल-पुथल मच गई है. तमिलनाडु की राजनीति में कांग्रेस द्वारा अपने दशकों पुराने सहयोगी DMK का साथ छोड़कर एक्टर विजय की पार्टी ‘TVK’ को समर्थन देने के फैसले ने सियासी भूचाल ला दिया है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने अपनी ही पार्टी के इस फैसले के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. उन्होंने इसे ‘घटिया राजनीतिक अवसरवाद’ बताते हुए सीधे तौर पर राहुल गांधी की नेतृत्व क्षमता पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
लगातार मिल रही हार और रणनीतिक विफलताओं से नाराज मणिशंकर अय्यर ने कांग्रेस आलाकमान को कटघरे (Mani Shankar Aiyar statement) में खड़ा किया है. अय्यर ने स्पष्ट रूप से कहा कि INDIA गठबंधन की कमान अब राहुल गांधी के बजाय ममता बनर्जी, एमके स्टालिन, अखिलेश यादव या तेजस्वी यादव जैसे मजबूत ‘क्षेत्रीय नेताओं’ को मिलनी चाहिए. उनका मानना है कि वर्तमान नेतृत्व रणनीति और भरोसे के मोर्चे पर विफल साबित हो रहा है.
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तमिलनाडु में कांग्रेस का TVK के साथ जाना पहले से ही विवादों में था. DMK ने इसे सरेआम ‘पीठ में छुरा घोंपना’ करार दिया है. इस मुद्दे पर अय्यर ने अपनी ही पार्टी को आइना दिखाते हुए कहा, “कांग्रेस ने अपने दशकों पुराने सहयोगी DMK को उस वक्त छोड़ा है, जब पार्टी मुश्किल दौर से गुजर रही थी. यह राजनीतिक नैतिकता के खिलाफ है.” उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कांग्रेस के इस ‘घटिया अवसरवाद’ से तमिलनाडु में BJP को फायदा मिलता है, तो यह कांग्रेस के इतिहास का सबसे बड़ा ‘राजनीतिक सेल्फ गोल’ (Political Self-Goal) साबित होगा.
अय्यर ने पार्टी को नसीहत देते हुए महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू की राजनीति का हवाला दिया. उन्होंने कहा कि सत्ता के लिए सिद्धांतों से समझौता करना कभी भी कांग्रेस की परंपरा नहीं रही है. उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि पिछले चुनाव में कांग्रेस की जो पांच सीटें आईं थीं, वे DMK गठबंधन की बदौलत ही संभव हो पाई थीं. ऐसे में अचानक गठबंधन बदलना राजनीतिक जल्दबाजी है.
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तमिलनाडु में कांग्रेस का एक्टर विजय (TVK) को समर्थन देना अब सिर्फ एक राज्य की राजनीति तक सीमित नहीं रह गया है. इस फैसले ने पूरे INDIA गठबंधन के अंदर ‘भरोसे और नेतृत्व’ पर एक नई बहस छेड़ दी है. अय्यर ने चेतावनी दी है कि इस तरह के फैसलों से कांग्रेस की विश्वसनीयता कमजोर होगी और भविष्य में सहयोगी दल उस पर भरोसा करने से कतराएंगे. ऐसे वक्त में जब विपक्ष पहले ही नेतृत्व संकट और रणनीतिक भ्रम से जूझ रहा है, अपनी ही पार्टी के दिग्गज नेता का यह बयान कांग्रेस राहुल गांधी (Rahul Gandhi leadership) के लिए बड़ी मुश्किलें खड़ी कर सकता है.
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