Bharat Express DD Free Dish

हार के बाद ‘वर्चुअल CM’ बनीं ममता बनर्जी, 75 लाख लोगों में कन्फ्यूजन; कब तक चलेगा यह डिजिटल भ्रम?

Mamata Banerjee Social Media Profile: पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 में करारी हार और विधानसभा भंग होने के बाद भी ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया से ‘मुख्यमंत्री’ का टैग नहीं हटाया है. 75 लाख फॉलोअर्स के बीच वह अभी भी ‘वर्चुअल CM’ बनी हुई हैं. पढ़ें पूरी खबर

Mamata Banerjee Refusing Result Social Media Profile

Mamata Banerjee Social Media Profile: सियासत में एक पुरानी कहावत है, ‘रस्सी जल गई, पर बल नहीं गया’. पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों यह कहावत बिल्कुल सटीक बैठ रही है. सत्ता हाथ से फिसल चुकी है, राज्य की विधानसभा आधिकारिक तौर पर भंग की जा चुकी है, लेकिन तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो ममता बनर्जी का ‘मुख्यमंत्री’ पद से मोह छूटने का नाम ही नहीं ले रहा है. जमीनी हकीकत चाहे जो भी हो, लेकिन सोशल मीडिया की आभासी दुनिया में दीदी आज भी ‘चीफ मिनिस्टर’ बनी हुई हैं.

डिजिटल दुनिया में ‘सलामत’ है कुर्सी (Mamata Banerjee Refusing Result)

संवैधानिक हकीकत यह है कि गुरुवार को राज्यपाल आरएन रवि ने संविधान के अनुच्छेद 174 (2)(बी) की शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए पश्चिम बंगाल की 17वीं विधानसभा को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है. 2026 के विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 293 में से 207 सीटें जीतकर प्रचंड जनादेश हासिल किया है, जबकि 2011 से लगातार सत्ता पर काबिज टीएमसी महज 80 सीटों पर सिमट कर रह गई है. यहां तक कि ममता बनर्जी को खुद भवानीपुर जैसी हाई-प्रोफाइल सीट से करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है.

ये भी पढ़ें: सम्राट चौधरी कैबिनेट का पूरा X-Ray: महिला आरक्षण पर ‘कैंची’, सवर्ण-OBC को बराबर हक

इन सब के बाद, नियम और नैतिकता के आधार पर ममता बनर्जी अब राज्य की ‘पूर्व मुख्यमंत्री’ हैं. लेकिन अगर आप उनके आधिकारिक एक्स (X) या फेसबुक हैंडल पर जाएंगे, तो पाएंगे कि उन्होंने अपनी प्रोफाइल नहीं बदली है. वहां आज भी उनके नाम के नीचे ‘माननीय मुख्यमंत्री, पश्चिम बंगाल’ का टैग शान से चिपका हुआ है.

हार से इनकार या जानबूझकर फैलाया जा रहा भ्रम? (Mamata Banerjee Twitter Profile)

चुनाव परिणामों के बाद से ही ममता बनर्जी का रुख हार स्वीकार करने वाला नहीं रहा है. मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से साफ इनकार करते हुए उन्होंने चुनाव आयोग और भाजपा पर ‘100 सीटों की चोरी’ का आरोप मढ़ दिया था. उनका यह ‘इनकार’ अब उनके सोशल मीडिया प्रोफाइल पर भी साफ नजर आ रहा है.

प्रोफाइल से ‘मुख्यमंत्री’ का टैग न हटाकर वे अपने करीब 75 लाख फॉलोअर्स और आम जनता के बीच जानबूझकर एक ‘डिजिटल भ्रम’ पैदा कर रही हैं. यह ऐसा है जैसे कोई खिलाड़ी मैच हारने के बाद भी स्कोरबोर्ड मानने से इनकार कर दे और खुद को ही विजेता घोषित करता रहे.

वर्चुअल सत्ता बनाम असली सत्ता

राजनीति में जनादेश का सम्मान सबसे बड़ी चीज होती है. एक तरफ जहां भाजपा अपनी नई सरकार बनाने और असली मुख्यमंत्री चुनने की कवायद में जोर-शोर से जुटी हुई है, वहीं दूसरी तरफ दीदी अपनी वर्चुअल दुनिया में अभी भी सत्ता का सुख भोग रही हैं.

ये भी पढ़ें: असम से पहले बंगाल में शपथ क्यों? BJP की रणनीति में हैं 9 मई के 4 सीक्रेट; पढ़ें इनसाइड स्टोरी

जनता ने अपना फैसला सुना दिया है और ‘कुर्सी’ अब खाली हो चुकी है. ऐसे में सोशल मीडिया के बायो (Bio) में खुद को ‘मुख्यमंत्री’ बनाए रखना न सिर्फ हास्यास्पद है, बल्कि यह दिखाता है कि सत्ता से दूरी बर्दाश्त करना कितना मुश्किल होता है. अब देखना यह दिलचस्प होगा कि जब असल जिंदगी में नया मुख्यमंत्री शपथ लेगा, तब क्या ममता अपनी यह ‘डिजिटल कुर्सी’ छोड़ेंगी, या उनके प्रोफाइल पर यह भ्रम आगे भी जारी रहेगा?



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read