Mumbai Mayor Race: बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कारपोरेशन (BMC) के मेयर चुनाव (Mumbai Mayor Election) में एक बड़ा मोड़ सामने आया है. मेयर कुर्सी के लिए राजनीतिक खींचतान के बीच महाराष्ट्र की फडणवीस सरकार ने बड़ा ऐलान किया है. आगामी मेयर चुनाव को लेकर पीठासीन अधिकारी (Presiding Officer) की नियुक्ति से जुड़े पुराने नियम में बदलाव किया गया है.
इस नियम में बदलवा कर महायुति सरकार ने अपने धुर विरोधी शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) की चिंता बढ़ा दी है. हाली में उद्धव ठाकरे ने अपने बयान में कहा था कि अगर भगवान की इच्छा होगी तो महापौर शिवसेना (UBT) का होगा.
मुंबई में मेयर चुनाव की प्रक्रिया पीठासीन अधिकारी द्वार कराई जाती है. पहले के नियमों के अनुसार पीठासीन अधिकारी की जिम्मेदारी बीएमसी के निवर्तमान मेयर या फिर सदन के सबसे वरिष्ठ नगरसेवक को सौंपी जाती थी.
मुंबई महापालिका का कार्यकाल समाप्त हुए करीब तीन साल हो चुके हैं, ऐसे में तत्कालीन महापौर का विकल्प पहले ही खत्म हो गया था. पुराने नियमों के तहत उद्धव ठाकरे गुट की वरिष्ठ नगरसेविका श्रद्धा जाधव को पीठासीन अधिकारी बनने का मौका मिल सकता था. अगर पीठासीन अधिकारी ठाकरे गुट से होता तो महायुति को अपना मेयर चुने में दिक्क्त आ सकती थी. लेकिन महायुति सरकार ने नियम बदलकर उद्धव ठाकरे के सियासी खेल के लिए सारे दरवाजे बंद कर दिए हैं.
राज्य सरकार द्वारा जारी नई नियमावली के तहत अब महापौर या उपमहापौर के चुनाव के लिए बुलाई जाने वाली विशेष बैठक की अध्यक्षता राज्य सरकार के सचिव स्तर या उससे उच्च अधिकारी करेंगे. वर्तमान नगर आयुक्त भूषण गगराणी प्रधान सचिव स्तर के अधिकारी हैं, इसलिए इस प्रक्रिया में वही पीठासीन अधिकारी की भूमिका निभाएंगे.
नई व्यवस्था के तहत महापौर के अधिकारों में भी कटौती की गई है. अब नव-निर्वाचित महापौर भी उपमहापौर के चुनाव के दौरान पीठासीन अधिकारी के रूप में कार्य नहीं कर सकेंगे.
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मुंबई महानगरपालिका के महापौर पद का चुनाव फिलहाल स्थगित कर दिया गया है. आरक्षण घोषित होने के बाद 31 जनवरी को मतदान कराने की तैयारी थी, लेकिन बीजेपी और शिंदे गुट की शिवसेना के नगरसेवकों के गुट का पंजीकरण अभी पूरा नहीं हो सका है. इसी वजह से चुनाव प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई.
अब संभावना जताई जा रही है कि मुंबई मेयर का चुनाव फरवरी के पहले सप्ताह में कराया जा सकता है. हालांकि, बीजेपी और शिंदे गुट की शिवसेना के संयुक्त गुट को लेकर राजनीतिक स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं है. दोनों दल संयुक्त रूप से गुट का पंजीकरण करेंगे या अलग-अलग, इस पर अभी फैसला नहीं हो पाया है.
-भारत एक्सप्रेस
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