LPG Crisis News: ईरान जंग के चलते पूरी दुनिया में ईंधन और तेल की किल्लत ने हिला कर रख दिया है. युद्ध के मैदान में बारूद की गंध और समुद्र में बिछी मिसाइलों के बीच भारत के लिए मंगलवार का सूरज राहत की बड़ी किरण लेकर आया है. दरअसल दुनिया के सबसे खतरनाक समुद्री रास्ते ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ में मची अफरा-तफरी को मात देते हुए भारतीय जहाज नंदा देवी और जग लाडकी सुरक्षित देश की सीमा में प्रवेश कर चुके हैं.
बता दें कि कतर से रवाना हुए ये जहाज पिछले कई दिनों से ईरान की नाकेबंदी और युद्ध के हालातों के बीच ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ में फंसे हुए थे लेकिन भारत की कूटनीति और नौसेना के ‘ऑपरेशन संकल्प’ ने इन्हें मौत के मुहाने से अब बाहर निकाल लिया है.
भारतीय शिपिंग कॉर्पोरेशन का विशालकाय टैंकर ‘नंदा देवी’ आज सुबह गुजरात के कांडला बंदरगाह पर लंगर डाल चुका है. 1 मार्च को कतर से निकला यह जहाज जब होर्मुज की खाड़ी में पहुंचा, तो वहां ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के कारण स्थिति बेहद गंभीर थी. ईरान की सख्त चेतावनी के बावजूद, भारतीय नौसेना ने इन जहाजों को एस्कॉर्ट किया और सुरक्षित खुले समुद्र में पहुंचाया. ‘नंदा देवी’ अपने साथ 46,000 टन एलपीजी लेकर आया है, जो देश में गैस की किल्लत को दूर करने के लिए ‘संजीवनी’ का काम करेगी.
सिर्फ गैस ही नहीं, बल्कि भारत की तेल जरूरतों को पूरा करने के लिए ‘जग लाडकी’ भी मुंद्रा पोर्ट पहुंच रहा है. संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से 81,000 टन कच्चा तेल (Crude Oil) लेकर आ रहा यह जहाज भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है. एक दिन पहले ही ‘शिवालिक’ जहाज भी इतनी ही मात्रा में गैस लेकर भारत पहुंचा था. इन तीन जहाजों के आने से अब देश में तेल और गैस की किल्लत की अफवाहों पर पूरी तरह विराम लग गया है.
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बंदरगाह और जहाजरानी मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने पुष्टि की है कि फारस की खाड़ी में फंसे सभी 611 भारतीय नाविक पूरी तरह सुरक्षित हैं. यह भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत मानी जा रही है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का 20 प्रतिशत तेल और गैस गुजरता है और फिलहाल वहां किसी भी देश के जहाज का गुजरना खतरे से खाली नहीं है. भारत और ईरान के बीच हुई उच्च स्तरीय बातचीत का ही नतीजा है कि भारतीय तिरंगे वाले जहाजों को रास्ता दिया गया, जबकि वहां अमेरिकी नौसेना तक सीधे हस्तक्षेप करने से बच रही है.
‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ को मिलाकर अब तक लगभग 92,700 मीट्रिक टन एलपीजी की नई खेप भारत पहुंच चुकी है. पेट्रोलियम मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, यह स्टॉक देश की तात्कालिक जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है. जो लोग युद्ध के डर से सिलेंडरों की पैनिक बुकिंग कर रहे थे, उनके लिए अब राहत की खबर है. सप्लाई चेन अब पूरी तरह बहाल हो गई है और आने वाले दिनों में फारस की खाड़ी में फंसे अन्य 22 जहाजों को भी इसी तरह सुरक्षित बाहर निकाला जाएगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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