पंडित जवाहर लाल नेहरू.
देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की चिट्ठियों पर सियासी बवाल मचा हुआ है. ये वो चिट्ठियां हैं, जो एक वक्त नेहरू मेमोरियल में सुरक्षित रखे हुए थे, लेकिन अब वहां नहीं हैं. साल 2008 में इन चिट्ठियों को तत्कालीन UPA अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अपने पास मंगवा लिया था, लेकिन डेढ़ दशक से ज्यादा वक्त बीत जाने के बावजूद उसे लौटाया नहीं. मगर अब प्रधानमंत्री म्यूजियम और लाइब्रेरी यानी PMML ने उन चिट्ठियों को वापस मांगा है.
51 कार्टन चिट्ठियां
इतिहासकार और PMML के सदस्य रिजवान कादरी ने पूर्व पीएम नेहरू की चिट्ठियों को लेकर नेता विपक्ष और कांग्रेस नेता राहुल गांधी को एक खत लिखा है, जिसमें उन चिट्ठियों को वापस लौटाए जाने की मांग की है. अपने खत में रिजवान कादरी ने लिखा है, ‘जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल फंड ने साल 1971 मे कुछ चिट्ठियां प्रधानमंत्री म्यूजियम और लाइब्रेरी को दिए थे, लेकिन साल 2008 में सोनिया गांधी ने वापस मंगवाए थे, जिन्हें आज तक नहीं लौटाया गया.’
बताया जा रहा है कि नेहरू की इन पर्सनल चिट्ठियों को 51 कार्टन में भरकर कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के पास पहुंचाए गए थे. ऐसे में ये सवाल उठने लगे हैं कि देश के पहले प्रधानमंत्री की चिट्ठियों में ऐसा क्या था, जिसे गांधी परिवार देश को नहीं बताना चाहता, इन खतों को लेकर क्यों बवाल मचा है और इन्हें वापस क्यों मांगा जा रहा है?
इतिहासकार और PMML के सदस्य रिजवान कादरी ने नेहरू की उन चिट्ठियों को वापस करने में राहुल गांधी से गुहार लगाई है. कादरी ने अपनी चिट्ठी में लिखा है कि अगर ऑरिजिनल चिट्ठियां नहीं दे सकते हैं, तो कम से कम उसकी फोटो कॉपी या डिजिटल या फोटोकॉपी ही दिलवा दें. कादरी का मानना है कि देश की विरासत से हिस्सा होने के चलते ये दस्तावेज न सिर्फ इतिहास के अहम पहलू हैं, बल्कि स्टडी और डिजिटलीकरण विद्वानों और रिसर्चर्स के लिए भी जरूरी है.
हालांकि इसी साल सितंबर महीने में भी कादरी ने इन चिट्ठियों को वापस करने के लिए सोनिया गांधी को पत्र लिखा था, लेकिन उनकी चिट्ठियों का कोई जवाब नहीं आया. उस वक्त भी कादरी ने सोनिया गांधी के नाम अपनी चिट्ठी में लिखा था कि नेहरू स्मारक एवं पुस्तकालय से साल 2008 में मंगाए गए दस्तावेजों से भरे 51 कार्टन संस्था लौटाया जाए. कादरी ने कहा, ‘चूंकि मेरे उस खत का कोई जवाब नहीं आया, लिहाजा मैंने उनके बेटे राहुल गांधी से उन्हें वापस दिलाने में मदद करने की अपील की है. वो चिट्ठियां देश की धरोहर और ऐतिहासिक महत्व की हैं, लिहाजा उम्मीद है नेता विपक्ष हमारे अनुरोध पर गौर करेंगे.’
क्या है उन चिट्ठियों में
रिजवान कादरी ने जिन चिट्ठियों को वापस करने के लिए सोनिया और राहुल गांधी को खत लिखा है, उन चिट्ठियों को पंडित नेहरू ने एडविना माउंटबेटन, अलबर्ट आइंस्टाइन, विजय लक्ष्मी पंडित, पद्मजा नायडू, बाबू जगजीवन राम, जयप्रकाश नारायण, गोविंद बल्लभ पंत और आसफ अली को लिखे थे. इनमें सबसे ज्यादा चर्चा एडविना माउंटबेटन के नाम लिखी गईं चिट्ठियों की हो रही है, क्योंकि नेहरू और लेडी माउंटबेटन एडविना के बीच कथित रिश्तों को लेकर विवाद होते रहते हैं. इतिहास के पन्नों में कई ऐसी तस्वीरें छिपी हैं, जिनको देखकर अक्सर ये सवाल उठते हैं कि दोनों सिर्फ दोस्त थे या कुछ और.
नेहरू-एडविना के बीच पत्राचार
अब जब सोनिया गांधी भी नेहरू-एडविना के बीच हुए पत्राचार को नहीं लौटा रही हैं, तो इन सवालों को और बल मिलता है. आखिर उन चिट्ठियों में कुछ न कुछ ऐसा है, जिसे सोनिया गांधी शायद सार्वजनिक नहीं होना देना चाहती हैं. करीब दो वर्ष पहले यानी 2022 में इंग्लैंड से भी ऐसी खबरें सामने आई थीं, जिसमें कहा गया कि ब्रिटिश सरकार गुलाम भारत के आखिरी ब्रिटिश वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन और उनकी पत्नी एडविना से जुड़े दस्तावेजों को गुप्त रखने के लिए लाखों रुपये खर्च कर रही है.
इसके पीछे ब्रिटिश सरकार ने ये दलील दी थी कि इन दस्तावेजों के सार्वजनिक होने से ब्रिटेन और भारत के रिश्ते खराब हो सकते हैं. ब्रिटिश इतिहासकार एंड्रयू लोनी ने इन दस्तावेजों को सार्वजनिक करने के लिए कई सालों तक मुकदमा लड़ते रहे. हालांकि कोर्ट ने ज्यादातर दस्तावेजों को सार्वजनिक करने का आदेश तो दिया, लेकिन एडविना की 1947 और 1948 की डायरी को सार्वजनिक करने पर रोक लगा दी.
रिजवान कादरी की चिट्ठी सामने आते ही सियासी बवाल मच गया. कादरी की चिट्ठी को लेकर सोनिया, राहुल गांधी और कांग्रेस की ओर से भले ही कोई जवाब नहीं आया हो, लेकिन बीजेपी ने अपने तोप का मुंह गांधी परिवार की ओर जरूर खोल दिया है.
बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने तो बकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर गांधी परिवार पर सवालों की झड़ी लगा दी. संबित पात्रा का कहना है कि नेहरू और जेपी के बीच जो संवाद हुआ था, वो देश की संपत्ति है, ऐसे में उन चिट्ठियों को वापस किया जाना चाहिए. संबित पात्रा ने नेहरू-एडविना के बीच हुए पत्राचार को भी गायब करने के आरोप लगाए हैं.
संबित ने कहा, ‘मैं ये जानने के लिए उत्सुक हूं कि आखिर नेहरू जी ने एडविना को क्या लिखा होगा, जिसे सेंसर करने की जरूरत थी. संबित ने कांग्रेस की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या राहुल गांधी इन खतों को लौटाने के लिए अपनी मां सोनिया गांधी से बात करेंगे? आखिर इन पत्रों में ऐसा क्या था, जिसे गांधी परिवार सार्वजनिक करना या देश को नहीं बताना चाहता है?
उन्होंने राहुल गांधी से सवाल पूछते हुए कहा कि जब साल 2010 में दस्तावेजों का डिजिटलीकरण करने का फैसला लिया गया था, तो सोनिया गांधी ने इन चिट्ठियों को नेहरू मेमोरियल क्यों हटवाया? संबित पात्रा ने तो लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला के माध्यम से केंद्र सरकार से अपील की है कि इस पूरे मामले की सत्यता की संस्कृति मंत्रालय जांच करे और पंडित नेहरू से जुड़े इन सभी दस्तावेजों को प्रधानमंत्री संग्रहालय में वापस भेजा जाए. अब इस पूरे मामले में गांधी परिवार का क्या रुख होता है ये देखना दिलचस्प होगा.
-भारत एक्सप्रेस
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