संसद के मॉनसून सत्र के दूसरे दिन नीट (NEET) परीक्षा धांधली और छात्र आंदोलन के नाम पर विपक्ष का सियासी नाटक अपने चरम पर पहुंच गया है. इस कड़ी में आज विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे समेत विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ (INDIA) के नेताओं ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला से मुलाकात की. दरअसल विपक्ष ने मांग रखी है कि संसद की बाकी सभी कार्यवाही को रोककर कल दिल्ली में हुए हंगामे और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर पहले विस्तृत चर्चा कराई जाए.
हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से पहले ही यह साफ कर दिया गया है कि वह युवाओं और विद्यार्थियों से जुड़े हर संवेदनशील मुद्दे पर नियमों के तहत बहस कराने को पूरी तरह तैयार है, लेकिन विपक्ष चर्चा में भाग लेने के बजाय संसद को पंगु बनाने और राजनीति चमकाने में जुटा हुआ है.
लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात के बाद कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने सोशल मीडिया पर सरकार पर निशाना साधते हुए विपक्ष के रुख को आक्रामक रूप से सामने रखा. प्रियंका गांधी ने कहा कि अगर देश की संसद भारत के करोड़ों युवाओं और विद्यार्थियों के भविष्य पर चर्चा नहीं कर सकती, तो उसका कोई मतलब नहीं रह जाता. उन्होंने आरोप लगाया कि सही सवाल पूछने पर छात्रों पर कार्रवाई की गई और विपक्ष इस मुद्दे को दबने नहीं देगा.
वहीं इसको लेकर विपक्ष का दावा है कि वे छात्रों की आवाज को सड़कों से लेकर संसद के भीतर तक मजबूती से उठाएंगे, जबकि सत्ता पक्ष का मानना है कि विपक्ष सिर्फ राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए इस संवेदनशील मुद्दे का इस्तेमाल कर रहा है.
दूसरी ओर, इस पूरे घटनाक्रम को और अधिक तूल देने के लिए राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पुलिसिया कार्रवाई के विरोध में अपना जन्मदिन न मनाने का ऐलान कर दिया. वहीं कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं की आवाज को दबा रही है.
हालांकि, सच्चाई यह है कि जंतर-मंतर पर सोमवार को सीजेपी (CJP) के प्रदर्शन के दौरान कुछ उग्र तत्वों ने बैरिकेड्स तोड़ने और संसद भवन में जबरन घुसने की कोशिश की थी, जिसे रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने केवल सुरक्षा मानकों के तहत हल्का बल प्रयोग किया था. इसके बावजूद विपक्ष पूरी घटना को तूल देकर एकतरफा माहौल बनाने में लगा है.
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संसद में विपक्ष के इस जारी गतिरोध पर सत्ता पक्ष ने कड़ा एतराज जताया है. सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए न केवल सीबीआई (CBI) जांच के आदेश दिए हैं बल्कि ‘सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम 2024’ के तहत दोषियों पर सख्त कानूनी शिकंजा भी कसा है.
वहीं सरकार का साफ कहना है कि जब मामला सुप्रीम कोर्ट और जांच एजेंसियों के विचाराधीन है, तब राहुल गांधी और पूरा विपक्ष केवल संसदीय समय को बर्बाद करने और देश के युवाओं को गुमराह करने का काम कर रहे हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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