दुनिया भर में युद्ध जैसे हालात बने हुए हैं. ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया की धड़कनें बढ़ा रखी हैं. ऐसे नाजुक वक्त में भारत अपनी तैयारी को लेकर कितना गंभीर है, इसकी बानगी शनिवार को देखने को मिली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल बैठक हुई, जिसमें देश के 15 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने शिरकत की. इस बैठक में महाराष्ट्र की ओर से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य का पक्ष रखा और केंद्र के साथ मिलकर ‘एकजुट प्रतिक्रिया’ देने का भरोसा जताया.
इस महत्वपूर्ण बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ-साथ कई राज्यों के उपराज्यपाल भी मौजूद रहे. इस बैठक का मुख्य एजेंडा था, वैश्विक युद्ध की आहट के बीच भारत की आंतरिक सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता को कैसे बरकरार रखा जाए.
मुख्यमंत्री फडणवीस ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी (PM Modi) ने इस संकट के समय में ‘टीम इंडिया’ की भावना पर विशेष जोर दिया है. पीएम का मानना है कि केंद्र और राज्यों के बीच सटीक तालमेल, सूचनाओं का तुरंत आदान-प्रदान और संकट के समय एक जैसी प्रतिक्रिया ही देश को सुरक्षित रख सकती है. फडणवीस ने पीएम मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि जब दुनिया के कई बड़े देश प्रतिबंधों, आपातकाल और आर्थिक मंदी से जूझ रहे हैं, तब भारत में सामान्य स्थिति बनाए रखना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है.
मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार द्वारा ईंधन (पेट्रोल-डीजल) पर उत्पाद शुल्क (Excise Duty) में की गई कटौती का जिक्र करते हुए कहा कि यह आम जनता के लिए बहुत बड़ी राहत साबित हुई है. उन्होंने कहा कि जहां दूसरे देशों ने नागरिकों पर आर्थिक बोझ डाला, वहीं भारत ने इसे खुद वहन किया है. यह सीधे तौर पर ‘राष्ट्र प्रथम’ की सोच को दर्शाता है.
बैठक में भारत की बढ़ती ताकत पर भी चर्चा हुई. फडणवीस ने बताया कि पिछले 11 सालों में भारत ने ऊर्जा के स्रोतों का बड़ी समझदारी से विकेंद्रीकरण किया है. आज हम सिर्फ 27 नहीं, बल्कि 41 देशों से तेल का आयात कर रहे हैं. सौर ऊर्जा और ई-बसों के विस्तार ने हमें और सक्षम बनाया है. एलपीजी की सप्लाई पूरी तरह सुचारू है और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के नतीजे अब जमीन पर दिखने लगे हैं.
खरीफ सीजन नजदीक है, ऐसे में महाराष्ट्र के किसानों के लिए मुख्यमंत्री ने एक जरूरी जानकारी दी. उन्होंने कहा कि राज्य में खाद (उर्वरक) की कोई कमी नहीं है. सरकार लगातार इसकी समीक्षा कर रही है ताकि बुवाई के समय किसानों को परेशानी न हो. जमाखोरी और कालाबाजारी करने वालों को चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा कि ‘एग्रीस्टैक’ के माध्यम से पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई जा रही है और गड़बड़ी करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी.
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-भारत एक्सप्रेस
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