(PC: IANS)
राजीव तिवारी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी के ऐतिहासिक भारत मंडपम में ‘भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट और एक्सपो-2026’ का औपचारिक शुभारंभ किया. इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में दुनिया भर के 130 से अधिक देशों के राजनयिक प्रतिनिधियों, वैश्विक नीति-निर्माताओं, दिग्गज निवेशकों, ऊर्जा विशेषज्ञों और इनोवेटिव स्टार्टअप्स ने सहभागिता की.
समिट को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कोरोना महामारी से लेकर पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक संकटों तक, वैश्विक अर्थव्यवस्था ने हाल के वर्षों में कई गंभीर झटके झेले हैं. इसके बावजूद 140 करोड़ भारतवासियों के संकल्प से देश की विकास दर दुनिया में सबसे मजबूत बनी रही. उन्होंने रेखांकित किया कि पिछले एक दशक में भारत द्वारा स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में किए गए व्यापक संरचनात्मक सुधारों और रणनीतिक निवेशों ने देश को इन वैश्विक संकटों के दुष्प्रभावों से सुरक्षित रखने में रक्षा कवच की भूमिका निभाई है.
प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuels) पर अत्यधिक निर्भरता किसी भी देश की अर्थव्यवस्था को अस्थिर कर सकती है, इसलिए टिकाऊ आर्थिक संप्रभुता के लिए ऊर्जा सुरक्षा का मार्ग केवल स्वच्छ व नवीकरणीय ऊर्जा से होकर ही गुजरता है.
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों की अद्वितीय गति का उल्लेख करते हुए बताया कि:
प्रधानमंत्री ने सौर ऊर्जा के लोकतंत्रीकरण का उल्लेख करते हुए बताया कि:
पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना: फरवरी 2024 में शुरू हुई इस क्रांतिकारी योजना से अब तक 65 लाख से अधिक परिवार जुड़ चुके हैं. योजना का अंतिम लक्ष्य 1 करोड़ घरों की छतों पर सोलर सिस्टम स्थापित करना है. इससे जुड़े परिवारों के घरेलू बिजली बिलों में 76 प्रतिशत तक की भारी कमी आई है और उपभोक्ता अतिरिक्त बिजली बेचकर नियमित कमाई भी कर रहे हैं.
सरकारी भवन: देश के 44,000 से अधिक सरकारी भवनों को सौर ऊर्जा से आच्छादित किया जा चुका है, जिससे राजकोष में प्रतिवर्ष लगभग ₹700 करोड़ की सीधी बचत हो रही है.
पीएम कुसुम योजना: 30 लाख से अधिक किसानों को सोलर सिंचाई पंपों से जोड़ा गया है, जिससे किसानों के डीजल व पारंपरिक बिजली खर्च में औसतन प्रतिवर्ष ₹1 लाख की बचत हो रही है.
प्रधानमंत्री ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IITs), उद्यमियों और स्टार्टअप्स से ऐसे नवोन्मेषी उत्पाद विकसित करने का आह्वान किया, जिनसे किसी परिवार की ऊर्जा जरूरतें पूरी तरह सौर ऊर्जा से संचालित हो सकें. उन्होंने रूफटॉप सोलर कुकिंग और इलेक्ट्रिक वाहनों (दोपहिया व चार पहिया) की सोलर चार्जिंग पर विशेष बल दिया.
प्रधानमंत्री ने विनिर्माण और ट्रांसमिशन ढांचे की मजबूती का उल्लेख करते हुए कहा:
सौर मॉड्यूल (Solar Module) निर्माण की घरेलू क्षमता एक दशक पहले के महज 2 गीगावाट से 100 गुना बढ़कर अब 200 गीगावाट से अधिक हो चुकी है, जो ‘मेक इन इंडिया’ की आत्मनिर्भरता का प्रमाण है.
ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर और राष्ट्रीय बिजली ट्रांसमिशन ग्रिड को आधुनिक बनाने के लिए ₹2 लाख करोड़ के निवेश का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.
राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत 2030 तक प्रतिवर्ष 50 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन की दिशा में कार्य जारी है, जिसके क्रम में देश ने हाल ही में अपनी पहली ग्रीन हाइड्रोजन ट्रेन भी सफलतापूर्वक पटरी पर उतारी है.
प्रधानमंत्री ने वैश्विक निवेशकों को आमंत्रित करते हुए कहा कि पिछले एक दशक में भारत के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में ₹15 लाख करोड़ से अधिक का प्रत्यक्ष निवेश आया है, जिसमें से ₹6 लाख करोड़ का निवेश बीते दो वर्षों (2024 री-इन्वेस्ट समिट के बाद) में दर्ज हुआ है. इस दशक के अंत तक इस सेक्टर में ₹20 लाख करोड़ से अधिक के नए निवेश अवसर सृजित होंगे, जिससे सोलर इंस्टॉलेशन, मेंटेनेंस, बैटरी स्टोरेज और परिवहन क्षेत्र में युवाओं के लिए लाखों नए रोजगार पैदा होंगे.
वैश्विक दक्षिण (Global South) के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराते हुए प्रधानमंत्री ने अफ्रीका के ऊर्जा विकास हेतु 200 मिलियन डॉलर की ‘अफ्रीका सोलर फैसिलिटी’ का प्रस्ताव रखा. उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी राष्ट्रों को समान रूप से तकनीक और वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराकर ही एक न्यायसंगत, हरित और सुरक्षित भविष्य का निर्माण किया जा सकता है.
| प्रमुख क्षेत्र / पैमाना | उपलब्धि एवं आगामी लक्ष्य |
|---|---|
| गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता | वर्तमान में ~300 GW स्थापित; 2025 में ही 50% क्षमता का लक्ष्य पूरा (समय से 5 साल पहले) |
| भविष्य का विस्तार लक्ष्य | अगले 10-11 वर्षों में 500 गीगावाट (GW) अतिरिक्त गैर-जीवाश्म क्षमता जोड़ने का लक्ष्य |
| पीएम सूर्य घर योजना | 65 लाख से अधिक परिवार जुड़े; घरेलू बिजली बिलों में 76% तक की बचत दर्ज |
| सौर मॉड्यूल विनिर्माण | दशक पूर्व 2 GW से उछलकर वर्तमान में 200 GW से अधिक की क्षमता |
| ट्रांसमिशन ग्रिड व निवेश | ग्रीन कॉरिडोर के लिए ₹2 लाख करोड़ निवेश; दशक के अंत तक ₹20 लाख करोड़ के निवेश अवसर |
| अंतरराष्ट्रीय सहयोग | अफ्रीका में स्वच्छ ऊर्जा के लिए 200 मिलियन डॉलर की ‘अफ्रीका सोलर फैसिलिटी’ प्रस्तावित |
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