PM Modi Viral Video Ban by Meta: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नीट पेपर लीक मामले को लेकर देर रात जारी किए गए एक बेहद अनूठे और सेल्फी-स्टाइल ‘हेलो फ्रेंड्स’ वीडियो ने सोशल मीडिया पर इतिहास रच दिया है. जहां एक तरफ इंस्टाग्राम पर इस वीडियो ने 24 घंटे में रिकॉर्डतोड़ 30.3 करोड़ (303 Million) व्यूज हासिल कर पूरी दुनिया के सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए, वहीं दूसरी तरफ मेटा के घटिया एआई मॉडरेशन की बड़ी नाकामी सामने आई है.
बता दें कि फेसबुक पर आधी रात को पीएम मोदी के इसी संदेश वाले पोस्ट को भारत में अचानक ब्लॉक कर दिया गया, जिसके बाद सोशल मीडिया पर हड़कंप मच गया और यूजर्स ने इसके स्क्रीनशॉट्स शेयर कर मेटा को आड़े हाथों लिया.
एक तरफ जहां इंस्टाग्राम पर यह वीडियो दुनिया का सबसे ज्यादा देखा जाने वाला पॉलिटिकल कंटेंट बन रहा था, वहीं दूसरी तरफ मेटा के दूसरे प्लेटफॉर्म फेसबुक पर भारतीय यूज़र्स को झटका लगा. भारत में फेसबुक खोल रहे यूज़र्स को पीएम मोदी का यह पोस्ट दिखना बंद हो गया.
दरअसल वीडियो की जगह मेटा ने सिर्फ चार शब्दों की एक लाइन चिपका दी कि ‘Due to a legal request’. यानी किसी कानूनी अनुरोध का हवाला देकर भारत के प्रधानमंत्री के वीडियो को भारत के ही नागरिकों के लिए ब्लॉक कर दिया गया.
🚨 Facebook has withheld PM Modi’s first selfie-video reel on the paper leak within India.
It had 163M views and 9.3M likes. pic.twitter.com/0eskBTPCb8
— ً (@Kaaliyug) July 27, 2026
पीएम नरेंद्र मोदी ने देर रात नीट पेपर लीक की धांधली और छात्रों के दर्द पर सीधे संवाद करते हुए एक खास रील पोस्ट की थी. ‘हेलो फ्रेंड्स’ के कैजुअल अंदाज़ में शुरू हुई इस रील में पीएम ने बताया कि पेपर लीक करने वाले आरोपी जेल में हैं और सरकार इसके खिलाफ संसद में नया कानून ला रही है.
बताते चलें महज 24 घंटे के भीतर इस रील ने 303 मिलियन व्यूज का आंकड़ा पार कर दिया. इसके साथ ही पीएम मोदी ने 300 मिलियन व्यूज के ग्लोबल रिकॉर्ड को तोड़ दिया और रातों-रात उनके 10 लाख से ज्यादा नए फॉलोअर्स बढ़ गए.
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इस सेंसरशिप के बाद इंटरनेट पर बहस छिड़ गई कि आखिर पीएम मोदी अपनी ही सरकार और देश के छात्रों के लिए जारी किए गए वीडियो को भारत में खुद क्यों ब्लॉक करवाएंगे? मीडिया रिपोर्ट्स और एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह मेटा के ‘थर्ड क्लास और घटिया AI सिस्टम’ की भारी चूक यानी हैलुसिनेशन (Hallucination) का नतीजा है. मेटा ने पिछले कुछ महीनों में अपने कंटेंट मॉडरेशन का पूरा काम अपने अनट्रेंड एआई एल्गोरिदम के भरोसे छोड़ रखा है, जो फर्जी रिपोर्ट्स और गलत सिग्नल्स पर असली और प्रामाणिक अकाउंट्स पर बैन लगा देता है.
सोशल मीडिया पर जब यूज़र्स ने फेसबुक की इस सेंसरशिप के स्क्रीनशॉट्स वायरल कर दिए और मेटा की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फजीहत होने लगी, तब जाकर कंपनी की नींद खुली. तकनीकी गड़बड़ी और भारी दबाव के बाद मेटा ने अपनी गलती सुधारी और पीएम मोदी के उस वीडियो को फेसबुक पर दोबारा लाइव कर दिया.
हालांकि, मार्क ज़करबर्ग और मेटा की तरफ से अभी तक इस बात का कोई साफ जवाब नहीं दिया गया है कि एक अमेरिकी कंपनी का कमजोर एआई भारत के प्रधानमंत्री के मैसेज को किस आधार पर और किसके इशारे पर रोक रहा था.
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-भारत एक्सप्रेस
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