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विकसित भारत की नींव बन रहे सीमावर्ती गांव, युवाओं की भागीदारी से बदलेगी देश की तस्वीर: प्रधानमंत्री मोदी

PM Modi Vibrant Village Program: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को विकसित वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम 2026 के प्रतिभागियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संवाद करते हुए देश के युवाओं को विकसित भारत के सबसे बड़े परिवर्तनकारी अभियान का प्रमुख भागीदार बताया. उन्होंने कहा कि यदि भारत को 21वीं सदी का अग्रणी राष्ट्र बनाना है, तो उसके सीमावर्ती गांवों का विकास और युवाओं की सक्रिय भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण आधार बनेंगे.

प्रधानमंत्री ने देश के लगभग 250 जिलों से जुड़े युवा प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि यह कार्यक्रम केवल सीमावर्ती क्षेत्रों की यात्रा भर नहीं है, बल्कि भारत की विविधता, संस्कृति, राष्ट्रीय एकता और राष्ट्रभक्ति को निकट से समझने का एक अनूठा अवसर है.

मेरा युवा भारत से जुड़े करोड़ों युवा

उन्होंने कहा कि कुछ वर्ष पहले शुरू किए गए ‘मेरा युवा भारत (MY Bharat)’ मंच ने आज देशभर के करोड़ों युवाओं को एक साझा उद्देश्य से जोड़ दिया है. यह मंच केवल युवाओं को जोड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें राष्ट्र निर्माण के कार्यों में सक्रिय भागीदारी का अवसर भी दे रहा है. विकसित भारत संवाद से लेकर विकसित वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम तक, युवा समाज के बीच सकारात्मक बदलाव के वाहक बन रहे हैं.

प्रधानमंत्री ने बताया कि विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग के दौरान यह विचार सामने आया था कि देश के युवाओं को केवल डिजिटल दुनिया तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें भारत की वास्तविक परिस्थितियों को भी समझना चाहिए. इसी सोच के तहत लाखों युवाओं में से चुनकर सैकड़ों युवाओं को हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और लद्दाख के सीमावर्ती गांवों में भेजा गया, ताकि वे वहां के लोगों के जीवन, संस्कृति, संघर्ष और देशभक्ति को करीब से महसूस कर सकें.

उन्होंने कहा कि जब देश के अलग-अलग राज्यों के युवा सीमावर्ती क्षेत्रों की संस्कृति और जीवनशैली से जुड़ते हैं, तो ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना और अधिक मजबूत होती है. यह अनुभव उन्हें केवल नई जगहों से परिचित नहीं कराता, बल्कि पूरे देश को एक परिवार के रूप में देखने की प्रेरणा भी देता है.

पीएम ने साझा किया अपना अनुभव

प्रधानमंत्री ने अपने पुराने अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन में आने से पहले उन्हें सीमावर्ती इलाकों में काफी समय बिताने का अवसर मिला था. उन्होंने सैनिकों के साथ दीपावली मनाने की अपनी परंपरा का भी उल्लेख किया और कहा कि सीमा पर तैनात जवानों का त्याग, समर्पण और साहस हर भारतीय के लिए प्रेरणा है. उन्होंने कारगिल विजय दिवस पर वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि आज का भारत उनके बलिदान को कभी नहीं भूल सकता.

उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी पूरा होगा जब देश का हर गांव, विशेषकर सीमावर्ती गांव, विकास की मुख्यधारा से जुड़ेगा. युवाओं का इन क्षेत्रों से जुड़ना केवल एक यात्रा नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण की एक नई शुरुआत है. जब युवा जमीनी स्तर पर समस्याओं और संभावनाओं को समझते हैं, तो उनके भीतर देश के लिए कुछ करने का संकल्प और मजबूत होता है.

प्रधानमंत्री ने सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों की देशभक्ति की सराहना करते हुए कहा कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और वर्षों की उपेक्षा के बावजूद वहां रहने वाले लोगों का राष्ट्र के प्रति समर्पण कभी कमजोर नहीं पड़ा. उन्होंने कहा कि पहले इन गांवों को देश का अंतिम गांव माना जाता था, जिसके कारण विकास की योजनाएं भी वहां तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाती थीं.

भारत सरकार ने इन्हें माना है पहला गांव

उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने इस सोच को बदलते हुए इन गांवों को देश का ‘पहला गांव’ माना है, क्योंकि भारत में सूरज की पहली किरण और तिरंगा सबसे पहले इन्हीं क्षेत्रों में दिखाई देता है. इसी नई सोच के कारण सीमावर्ती इलाकों में सड़कों, बिजली, पेयजल, गैस कनेक्शन, इंटरनेट और अन्य बुनियादी सुविधाओं का तेजी से विस्तार हुआ है. इससे न केवल लोगों का जीवन आसान हुआ है, बल्कि खेती, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिली है.

प्रधानमंत्री ने कहा कि बेहतर आधारभूत सुविधाओं के कारण अब सीमावर्ती गांवों में पर्यटन भी तेजी से बढ़ रहा है. जिन गांवों में कभी सन्नाटा रहता था, वहां आज पर्यटकों की आवाजाही बढ़ रही है. इससे स्थानीय लोगों की आय बढ़ रही है, महिलाओं और युवाओं को रोजगार मिल रहा है तथा शिक्षा और स्वरोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि विकसित वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम इस परिवर्तन को और अधिक गति दे रहा है.

उन्होंने प्रतिभागियों से कहा कि यह यात्रा केवल घूमने का अनुभव नहीं थी, बल्कि उन्होंने वहां सम्मान, अपनापन और भारत की सांस्कृतिक समृद्धि को महसूस किया है. ऐसे अनुभव किसी पुस्तक या कक्षा में नहीं मिल सकते. इसलिए अब उनकी जिम्मेदारी है कि वे अपने अनुभव अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं.

कंटेंट क्रियेटर्स से की ये अपील

प्रधानमंत्री ने प्रत्येक युवा से आग्रह किया कि वह कम से कम सौ अन्य युवाओं के साथ अपने अनुभव साझा करे. उन्होंने युवाओं से स्थानीय कंटेंट क्रिएटर्स के साथ मिलकर सीमावर्ती क्षेत्रों की संस्कृति, परंपराओं, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों को सोशल मीडिया के माध्यम से देशभर में प्रचारित करने का भी आह्वान किया. साथ ही उन्होंने परिवारों को सीमावर्ती क्षेत्रों की यात्रा के लिए प्रेरित करने और स्कूलों व कॉलेजों में शैक्षणिक भ्रमण आयोजित करने की भी अपील की.

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अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि भारत का युवा वर्ग ही विकसित भारत की सबसे बड़ी ताकत है. उन्होंने कहा कि जब देश की युवा शक्ति सीधे राष्ट्र की चुनौतियों, संभावनाओं और समाधान से जुड़ती है, तब केवल गांव ही नहीं बदलते, बल्कि पूरे देश का भविष्य उज्ज्वल बनता है. उन्होंने कहा कि 21वीं सदी का भारत युवाओं की ऊर्जा, नवाचार और राष्ट्रभक्ति के बल पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगा तथा सीमावर्ती गांव इस परिवर्तन की सबसे मजबूत नींव बनेंगे.

-भारत एक्सप्रेस

महिमा कटारिया

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