Dharmendra Pradhan Resignation: देशभर में NEET पेपर लीक मामले ने बड़ा राजनीतिक और सामाजिक दबाव बना दिया था. इसी दबाव के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने कहा कि इस पूरे विवाद की नैतिक जिम्मेदारी वे पहले दिन से ही ले रहे थे. गौर करने वाली बात है कि कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में छात्र लगातार सड़कों पर आंदोलन कर रहे थे. वहीं, सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी छात्रों के समर्थन में अनशन किया था.
शिक्षा क्षेत्र में बदलाव
प्रधान के कार्यकाल में भारतीय शिक्षा व्यवस्था में कई बड़े सुधार देखने को मिले. इनमें सबसे अहम था कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET-UG) की शुरुआत. इससे देशभर के प्रमुख विश्वविद्यालयों में स्नातक प्रवेश प्रक्रिया को एक समान और पारदर्शी बनाने की कोशिश हुई.
पाठ्यपुस्तकों में सुधार
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत NCERT की नई किताबें तैयार की गईं. छपाई क्षमता को तीन गुना बढ़ाया गया, जिससे किताबों की कीमतें कम हुईं और अभिभावकों को राहत मिली.
विदेशी विश्वविद्यालयों को मंजूरी
NEP 2020 के तहत भारत में उच्च शिक्षा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए 19 विदेशी विश्वविद्यालयों को अपने कैंपस खोलने की अनुमति दी गई.
एकल नियामक की पहल
प्रधान के कार्यकाल में उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए एकल नियामक बनाने की दिशा में कदम उठाए गए. यूजीसी, एआईसीटीई और एनसीटीई जैसी संस्थाओं को मिलाकर ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025’ पेश किया गया.
हायर एजुकेशन में सुधार
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत मल्टीपल एंट्री-एग्जिट सिस्टम, एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स और चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम लागू किए गए. इसके साथ ही डिजिटल लर्निंग और स्किल आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया.
विवादों की लंबी सूची
प्रधान के कार्यकाल में कई विवाद भी सामने आए. NEET-UG 2024 और NEET-UG 2026 परीक्षाओं में पेपर लीक और अनियमितताओं ने लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित किया. मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे.
डिजिटल मूल्यांकन पर सवाल
सीबीएसई की 12वीं परीक्षा में पहली बार लागू की गई ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली में तकनीकी खामियां सामने आईं. धुंधली कॉपियों और खराब सिस्टम की वजह से मूल्यांकन पर गंभीर सवाल उठे.
त्रिभाषा नीति पर विरोध
कक्षा 9 के लिए त्रिभाषा नीति लागू करने पर तमिलनाडु समेत कई राज्यों ने केंद्र पर हिंदी थोपने का आरोप लगाया.
UGC इक्विटी रेगुलेशन विवाद
UGC Equity Regulations, 2026 को लेकर शिक्षा जगत और सामाजिक हलकों में व्यापक विरोध हुआ. इसे लेकर सरकार पर पक्षपात और असमानता बढ़ाने के आरोप लगे.
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धर्मेंद्र प्रधान का कार्यकाल शिक्षा क्षेत्र में बड़े बदलावों और गहरे विवादों दोनों के लिए याद किया जाएगा. जहां उन्होंने कई सुधार लागू किए, वहीं राष्ट्रीय परीक्षाओं में गड़बड़ियों और नीतिगत फैसलों ने उनके कार्यकाल को लगातार चर्चा में बनाए रखा.
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