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जान से खिलवाड़! 2 फीट पानी में जिंदगी का सफर, हर मानसून में मौत से सामना

Pratapgarh Flooded Bridge:  राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले के सुहागपुरा क्षेत्र से सामने आई तस्वीरें जमीनी हकीकत बयां कर रही हैं. एक ओर तेज बहाव वाली नदी और दूसरी ओर घर, स्कूल व अस्पताल पहुंचने की मजबूरी ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. यहां तीन गांवों को जोड़ने वाली छोटी पुलिया बारिश के दिनों में पूरी तरह पानी में डूब जाती है, लेकिन इसके बावजूद ग्रामीण जान जोखिम में डालकर आवागमन करने को मजबूर हैं.

हर मानसून में दोहराती है परेशानी, पुलिया बन जाती है खतरा

क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश के कारण नदी-नाले उफान पर हैं. कुण्डाल-गणावा और ठिकरिया गांवों को जोड़ने वाली पुलिया के ऊपर करीब 2 से 3 फीट तक पानी बह रहा है. पानी का तेज बहाव होने के बावजूद ग्रामीण रोजमर्रा के कामों के लिए इसी रास्ते का इस्तेमाल कर रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या हर साल मानसून में सामने आती है, लेकिन अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं हो पाया है.

मरीजों और स्कूली बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी

ग्रामीणों के मुताबिक पुलिया डूबने के बाद सबसे बड़ी समस्या आपातकालीन स्थिति में आती है. गांव तक एंबुलेंस नहीं पहुंच पाती, जिससे मरीजों को पहले सुरक्षित स्थान तक लाना पड़ता है. इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाने के लिए करीब 20 किलोमीटर का अतिरिक्त रास्ता तय करना पड़ता है.

वहीं, स्कूली बच्चों को भी इस परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के दिनों में बच्चों को स्कूल पहुंचने में अतिरिक्त समय लगता है और कई बार खतरे के कारण उनकी पढ़ाई भी प्रभावित होती है.

ग्रामीणों ने की ऊंचे और स्थायी पुल की मांग

ग्रामीणों का कहना है कि कई वर्षों से यहां ऊंचे और मजबूत पुल के निर्माण की मांग की जा रही है. कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन भी दिए गए, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया. ग्रामीण चेतन मीणा जिगरा समेत अन्य लोगों ने बताया कि इस समस्या का असर बच्चों की शिक्षा, किसानों की खेती और मरीजों के इलाज तक पर पड़ रहा है. उनका कहना है कि हर बारिश में गांवों का संपर्क टूट जाता है और लोगों को मजबूरी में खतरा उठाना पड़ता है.

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ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द से जल्द स्थायी पुल निर्माण की स्वीकृति देने और काम शुरू कराने की मांग की है, ताकि हर मानसून में लोगों को अपनी जान जोखिम में डालकर नदी पार करने की मजबूरी से राहत मिल सके.

भारत एक्सप्रेस

Swati Pandey

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