नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ नेता एवं कार्यकारी समिति के सदस्य डॉ. इंद्रेश कुमार द्वारा हाल ही में हरियाणा भवन, नई दिल्ली में विमोचित पुस्तक ‘भारतीय मुस्लिमों की गौरव गाथाएं’ देश के उन 115 प्रतिष्ठित मुस्लिम हस्तियों की कहानी बयां करती है, जिन्होंने अपनी तालीम, तहज़ीब और तरक्की से राष्ट्रप्रेम की मिसाल पेश की. इस पुस्तक में शामिल प्रमुख चेहरों में से एक हैं प्रो. (डॉ.) शाहिद अख्तर, जो वर्तमान में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्था आयोग (NCMEI) के कार्यकारी अध्यक्ष हैं.
प्रो. शाहिद अख्तर झारखंड के रांची के निवासी हैं. एक ऐसा राज्य जिसे विकास की बात करें तो अक्सर पिछड़े क्षेत्रों में गिना जाता है, लेकिन यहाँ की माटी ने उन्हें वो संस्कार दिए जो आज उन्हें राष्ट्रीय मंच पर प्रतिष्ठित कर रहे हैं. उनके परिवार ने बचपन से ही उन्हें तालीम (शिक्षा), तहज़ीब (संस्कार) और तरक्की (विकास) की शिक्षा दी. वह स्वयं को पैगम्बर मोहम्मद (स.) और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम से गहरी प्रेरणा लेते हैं.
प्रो. अख्तर अक्सर पैगम्बर मोहम्मद के उस कथन को दोहराते हैं, “जब मैं तन्हा और तन्हाई में होता हूँ, तो हिन्द से मुझे ठंडी हवा आती है.” वहीं डॉ. कलाम के जीवन से उन्होंने यह सीखा कि कैसे सीमित संसाधनों के बावजूद शिक्षा के बल पर कोई व्यक्ति रॉकेट की तरह ऊँचाईयों को छू सकता है और देश को मिसाइल तकनीक में आत्मनिर्भर बनाकर सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुँच सकता है.
प्रो. अख्तर ने डॉ. कलाम की तरह ही शिक्षा को अपना सबसे मज़बूत हथियार बनाया. उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) से बी.एससी. (केमिस्ट्री ऑनर्स) किया, उसके बाद रांची यूनिवर्सिटी से एमबीए (मार्केटिंग मैनेजमेंट) में द्वितीय स्थान प्राप्त किया. फिर रांची विश्वविद्यालय से एलएलबी की और अंततः कॉमर्स एंड बिजनेस मैनेजमेंट में पीएचडी की उपाधि हासिल की .
आज वे जामिया मिलिया इस्लामिया में प्रबंधन विभाग में प्रोफेसर हैं और भारत ही नहीं, विदेशों में भी व्यवसाय प्रबंधन के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुके हैं. उनके 100 से अधिक शोध पत्र राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित हो चुके हैं. उन्होंने मैनेजमेंट विषय पर कई पुस्तकें लिखी हैं, जिनमें ग्रिवेंस मैनेजमेंट, ब्रांड मैनेजमेंट, फंडामेंटल डिजिटल मार्केटिंग प्रमुख हैं.
प्रो. अख्तर ने लेखन को ज्ञान के प्रसार का माध्यम बनाया. उनकी सबसे चर्चित पुस्तकों में से एक है “भारतीय मुसलमान: एकता का आधार – हुब्बुल वतनी (राष्ट्रीयता)”. इस पुस्तक का उद्देश्य हिंदू-मुस्लिम एकता, राष्ट्रीय एकजुटता और देशभक्ति की भावना को सशक्त बनाना है. वक्फ संशोधन विधेयक 2024 पर भी उन्होंने “Waqf Bill 2024: Respect to Islam and Gift for Muslims” नामक पुस्तक लिखी, जिसमें उन्होंने इस विधेयक के इस्लामी मूल्यों के अनुरूप होने और मुस्लिम समाज के लिए इसके लाभों को विस्तार से समझाया.
जब सरकार वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 लेकर आई, तो कुछ राजनीतिक तत्वों ने मुस्लिम समाज में भ्रम फैलाने की कोशिश की कि यह कानून वक्फ संपत्तियों को छीनने के लिए है. इस नाजुक समय में प्रो. शाहिद अख्तर ने मोर्चा संभाला और पूरे देश में मुसलमानों को जागरूक करने का बीड़ा उठाया.
उन्होंने देशभर के 100 से अधिक मुस्लिम संगठनों और लाखों मुसलमानों को एकजुट करते हुए वक्फ (संशोधन) विधेयक के समर्थन में व्यापक जनजागरण अभियान चलाया. उन्होंने स्पष्ट किया कि इस विधेयक का असली उद्देश्य वक्फ संपत्तियों को भू-माफिया और भ्रष्ट तंत्र से मुक्त कराना है, ताकि इनका उपयोग गरीबों, जरूरतमंदों और महिलाओं के हित में किया जा सके.
प्रो. अख्तर ने संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के समक्ष अपने विचार रखे और विभिन्न मुस्लिम संगठनों को भी समिति के सामने अपना पक्ष रखने के लिए प्रेरित किया. उन्होंने समिति को समझाया कि यह बिल वक्फ संपत्तियों को अधिक पारदर्शी, सुव्यवस्थित और जवाबदेह बनाएगा .
उनके नेतृत्व में MRM के एक चार सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने JPC अध्यक्ष जगदंबिका पाल से मुलाकात की और वक्फ प्रबंधन में सुधार के लिए विस्तृत सुझाव दिए . इस दौरान उन्होंने “वक्फ संशोधन विश्वकोश (Encyclopedia)” नामक एक विस्तृत दस्तावेज तैयार किया, जिसे देशभर में लाखों लोगों तक पहुँचाया गया.
27 जनवरी 2025 को हिंदुस्तान टाइम्स में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, प्रो. शाहिद अख्तर ने वक्फ संशोधन विधेयक को सामाजिक समानता और विकास के लिए ऐतिहासिक कदम बताया. उन्होंने कहा कि यह विधेयक केवल एक कानून नहीं, बल्कि समाज के लिए एक “नई शुरुआत” है.
MRM की महिला विंग की प्रमुख शालिनी अली ने भी इस विधेयक की सराहना करते हुए कहा कि यह पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करता है, जिससे समाज में समानता और समृद्धि को बढ़ावा मिलेगा.
प्रो. शाहिद अख्तर को शिक्षा, सामाजिक सुधार और राष्ट्रीय एकता में योगदान के लिए अनेक प्रतिष्ठित सम्मान मिले हैं. इनमें महात्मा गांधी एक्सीलेंस अवार्ड 2024, डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम मानद पुरस्कार 2023, ग्रेट ह्यूमेनिटेरियन अवार्ड 2021, सर सैयद अवार्ड, सरदार पटेल अवार्ड 2018 और राष्ट्रीय रत्न पुरस्कार 2016 प्रमुख हैं. NCMEI की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, उन्हें अब तक 100 से अधिक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हो चुके हैं.
जमीनी स्तर पर काम: झारखंड की बेटियों के लिए प्रेरणा
जब भी प्रो. अख्तर अपने पैतृक स्थान रांची लौटते हैं, वे वहाँ के मुस्लिम और हिंदू आदिवासी बच्चों को शिक्षा के लिए प्रेरित करते हैं. उन्होंने वहाँ एक पुस्तकालय की स्थापना की है और बच्चों को अच्छी किताबें उपलब्ध कराते हैं. वे बच्चों से कहते हैं:
“हमारे धार्मिक विश्वास भले अलग हों, पर हम सब भारत माता की संतान हैं. हमारा डीएनए एक है. हमें एक-दूसरे की आस्था का सम्मान करना चाहिए.”
विशेष रूप से बेटियों की शिक्षा पर उनका विशेष बल है. वे कहते हैं कि झारखंड की बेटियाँ आज तीरंदाजी और हॉकी जैसे खेलों में देश का नाम रोशन कर रही हैं, इसलिए हर माता-पिता को अपनी बेटियों को आगे बढ़ने का पूरा अवसर देना चाहिए.
प्रो. अख्तर वर्तमान में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्था आयोग (NCMEI) के कार्यकारी अध्यक्ष हैं . इससे पहले वे झारखंड राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष (कैबिनेट मंत्री का दर्जा) और राष्ट्रीय उर्दू भाषा प्रोत्साहन परिषद (NCPUL) के उपाध्यक्ष रह चुके हैं. वे अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी और इंदिरा गांधी ट्राइबल यूनिवर्सिटी में विजिटर (राष्ट्रपति) नामित सदस्य भी हैं.
प्रो. शाहिद अख्तर आज राष्ट्रवादी मुसलमानों की सशक्त और प्रेरणादायक आवाज़ बन चुके हैं. वे अल्पसंख्यक समुदाय को सरकारी सुधारों और राष्ट्रीय विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं. सोशल, इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया पर उनकी उपस्थिति बेहद प्रभावशाली है.
‘भारतीय मुस्लिमों की गौरव गाथाएं’ पुस्तक में उनका शामिल होना इस बात का प्रमाण है कि तालीम, तहज़ीब, तरक्की और वतन परस्ती से ही सच्चे भारत का निर्माण संभव है. डॉ. इंद्रेश कुमार ने पुस्तक के विमोचन के अवसर पर प्रो. अख्तर सहित सभी 115 हस्तियों के योगदान की सराहना की और राष्ट्रभक्ति एवं राष्ट्रप्रेम की भावना को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया.
प्रो. अख्तर का जीवन इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि यदि इरादे मज़बूत हों, तो सीमित संसाधन भी असीम सफलता की ओर ले जा सकते हैं. वे आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं और उनका मानना है कि शिक्षा ही वह रास्ता है जो इंसान को अंधेरे से उजाले की ओर ले जाती है.
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-भारत एक्सप्रेस
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