Rajasthan Tiger Reserve: मानसून के विदा होते ही राजस्थान में वन्यजीव प्रेमियों और पर्यटकों के लिए जंगल सफारी का रोमांचक सीजन शुरू हो गया है. रणथंभौर और सरिस्का से लेकर नए धौलपुर-करौली टाइगर रिजर्व तक, राज्य के कुल 5 प्रमुख टाइगर रिजर्व पर्यटकों के स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार हैं. अक्टूबर से जून तक चलने वाले इस मुख्य पर्यटन सीजन में बाघ और तेंदुओं का दीदार करने के लिए पर्यटक ऑनलाइन बुकिंग कर सकते हैं.
राजस्थान में मानसून के बाद पर्यटकों के लिए 5 टाइगर रिजर्व (रणथंभौर, सरिस्का, रामगढ़ विषधारी, मुकुंदरा हिल्स और धौलपुर-करौली) खोल दिए गए हैं. 1 अक्टूबर से 30 जून तक चलने वाले इस सीजन में पर्यटक ऑनलाइन बुकिंग के जरिए जंगल सफारी का लुत्फ उठा सकते हैं और बाघ-तेंदुओं का दीदार कर सकते हैं.
बरसात का मौसम खत्म होने के बाद राजस्थान में एडवेंचर का दौर शुरू हो चुका है. राज्य के प्रमुख राष्ट्रीय उद्यानों और संरक्षित वनों में जंगल सफारी का मुख्य सीजन 1 अक्टूबर से 30 जून तक माना जाता है, क्योंकि इस दौरान मानसून की पाबंदियां हट जाती हैं और कोर जोन में आवाजाही आसान हो जाती है. फिलहाल, राजस्थान में कुल 5 प्रमुख टाइगर रिजर्व हैं, जहां देशी-विदेशी पर्यटक बाघों की एक झलक पाने के लिए बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं.
रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान में बंगाल टाइगर के अलावा तेंदुए, सांभर, चीतल, मगरमच्छ और पक्षियों की तमाम प्रजातियां पाई जाती हैं, जबकि ऐतिहासिक रणथंभौर किला इसकी खूबसूरती में चार चांद लगाता है. वहीं, अरावली की प्राचीन पहाड़ियों के बीच फैला सरिस्का टाइगर रिजर्व वन्यजीव संरक्षण के इतिहास में खास स्थान रखता है, जहां बाघों के सफल पुनर्वास के बाद इनकी संख्या में लगातार इजाफा हुआ है. इसके भीतर प्राचीन कांकवाडी किला और पांडुपोल हनुमान मंदिर भी स्थित हैं.
राजस्थान के महत्वपूर्ण वन्यजीव क्षेत्रों में रामगढ़ विषधारी और मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व बाघों के प्राकृतिक आवास और गलियारे के रूप में बहुत अहम हैं. विंध्यन रेंज की पहाड़ियों और चंबल नदी के किनारे स्थित इन रिजर्वों में तेंदुए, भालू और चिंकारा पाए जाते हैं. इसके अलावा, पांचवें टाइगर रिजर्व के रूप में स्थापित धौलपुर-करौली वन्यजीव संरक्षण का एक उभरता हुआ महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है.
अगर आप टाइगर रिजर्व के अलावा दूसरे अनूठे इकोसिस्टम का अनुभव करना चाहते हैं, तो केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (बर्ड वॉचिंग), डेजर्ट नेशनल पार्क (गोडावण पक्षी), कुंभलगढ़ और माउंट आबू अभयारण्य, ताल छापर (काले हिरण) तथा नाहरगढ़ जैविक उद्यान की योजना बना सकते हैं. इन सभी जगहों पर वन विभाग के नियमों और दिशा-निर्देशों के अनुसार सफारी का आनंद लिया जा सकता है.
अरावली व विंध्याचल के जंगलों में बाघ और तेंदुए देखने के लिए अब दलालों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं है. पर्यटक ऑफिशियल पोर्टल booking.forestrajasthan.com या fmdss.forest.rajasthan.gov.in के जरिए टिकट बुक कर सकते हैं. इसके अलावा sso.rajasthan.gov.in पर जाकर ‘Forest and Wildlife’ एप्लीकेशन के माध्यम से रिजर्व, तारीख, शिफ्ट (सुबह या शाम) और वाहन (जिप्सी या कैंटर) का चयन करके सभी सदस्यों की जानकारी भरकर ऑनलाइन पेमेंट कर अपना पक्का परमिट डाउनलोड किया जा सकता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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