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दिल्ली में गणतंत्र दिवस परेड पर कितना खर्च होता है? टिकट बेचकर सरकार कितनी कमाई करती है, जानिए

Republic Day Parade cost: सोमवार 26 जनवरी 2026 को देश अपना 77वां गणतंत्र दिवस मनाने जा रहा है. समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेन शामिल होंगी. हर साल की तरह इस बार भी भव्य सैन्य परेड आयोजित की जाएगी. इसमें देश की सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक विविधता और तकनीकी प्रगति का प्रदर्शन किया जाएगा. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस सैन्य परेड पर सरकार कितना खर्च करती है और टिकटों की बिक्री से कितनी कमाई होती है? आइए जानते हैं.

प्रथम गणतंत्र दिवस का पहला खर्च

1950 में जब भारत ने पहला गणतंत्र दिवस मनाया था, तब कुल खर्च करीब 11,250 रुपये था, जिसे बाद में 11,093 रुपये बताया गया. समय के साथ यह खर्च लगातार बढ़ता गया.

  • 1956 में यह 5,75,000 रुपये,
  • 1971 में 17 लाख 12 हजार रुपये,
  • 1973 में 23,38,000 रुपये
  • 1988 में 69,69,159 रुपये तक पहुंच गया.

पहले गणतंत्र दिवस के मौके पर दिल्ली में बेहद सादगी से जश्न मनाया गया था. उस समय राहत शिविरों और ग्रामीण स्कूलों में कार्यक्रम आयोजित किए गए थे. बच्चों को स्मृति-चिह्न के रूप में प्लेटें दी गई थीं, जबकि महिला कैदियों को मिठाइयां और खिलौने बांटे गए थे.

2015 में 320 करोड़ रुपये का खर्च

आरटीआई से हासिल एक जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2015 में दिल्ली रिपब्लिक डे परेड के लिए सरकार ने करीब 320 करोड़ रुपये खर्च किए थे. जबकि टिकट बेचकर आमदनी महज 34 लाख रुपये ही रही.

टिकट से कितनी कमाई?

2018 से 2020 के बीच सरकार को टिकट बिक्री से औसतन 34 लाख रुपये सालाना की आमदनी हुई. कोरोना काल में दर्शकों की संख्या सीमित होने के कारण 2021 में यह कमाई घटकर 10.12 लाख रुपये और 2022 में सिर्फ 1.14 लाख रुपये रह गई. कोरोना के बाद 2023 में जब बड़ी संख्या में लोग परेड देखने पहुंचे, तो टिकट बिक्री से सरकार को 28.36 लाख रुपये की आमदनी हुई.


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10,000 विशेष अतिथि

गणतंत्र दिवस समारोह में लगभग 10,000 विशेष अतिथि शामिल होंगे. इनमें वैज्ञानिक, खिलाड़ी, किसान, महिला उद्यमी, स्टार्टअप संस्थापक, कारीगर, स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं, दिव्यांगजन, जनजातीय प्रतिनिधि और विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभार्थी शामिल होते हैं. उनका समावेश जनभागीदारी को प्रोत्साहित करता है और राष्ट्र निर्माण में सभी वर्गों की भूमिका को दर्शाता है.

-भारत एक्सप्रेस

Sahil Singh

पढ़ने-लिखने से शुरू हुआ सफर खबरों तक ले गया. पत्रकारिता को करियर बनाने का एक मात्र उद्देश्य—पढ़ना, साथ ही नई-नई चीज़ों को जानने की जिज्ञासा रखना था. आज से पहले ‘आज तक’ चैनल, उसके बाद दायित्व वेबसाइट, और अब भारत एक्सप्रेस में बतौर सब-एडिटर की भूमिका निभा रहा हूं.

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