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3 देशों के दौरे पर RSS प्रमुख, जानें मोहन भागवत के इन विदेश यात्राओं का क्या है उद्देश्य?

विदेश में अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए RSS ने नया तरीका अपनाया है. संघ अब सीधे तौर पर नहीं, बल्कि विदेशों में रहने वाले प्रवासी भारतीयों और अपने समर्थकों द्वारा बनाए गए स्वतंत्र मंचों के जरिए संवाद कर रहा है. अमेरिका में AHEAD यानी अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग और ब्रिटेन में Integral जैसे संगठन इसी नई रणनीति का हिस्सा हैं. इनके माध्यम से RSS के बड़े नेताओं के कार्यक्रम और अलग-अलग समुदायों के साथ बातचीत आयोजित की जा रही है.

इस रणनीति का सबसे बड़ा उदाहरण संघ प्रमुख मोहन भागवत की मौजूदा विदेश यात्रा है. शनिवार को न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन के इन्फोसिस थिएटर में AHEAD द्वारा आयोजित वैश्विक एकीकरण महोत्सव में वे मुख्य रूप से शामिल होंगे, जहां बड़ी संख्या में हिंदू संगठनों के लोग जुटेंगे.

मोहन भागवत के दौरे का क्या है मकसद?

अमेरिका के बाद मोहन भागवत रविवार को कनाडा के टोरंटो जाएंगे, जहां उनका कम्युनिटी कार्यक्रम रखा गया है. टोरंटो में दो दिन रुकने के बाद वे 2 से 7 सितंबर तक ब्रिटेन में रहेंगे. लंदन में भारतीय समुदाय के साथ-साथ यहूदी, ईसाई और सिख धर्म के लोगों से भी उनके संवाद की उम्मीद है.

बताया जा रहा है कि इस अंतरराष्ट्रीय विस्तार के पीछे मकसद विदेशों में RSS को लेकर बनी गलतफहमियों को दूर करना है. भारत में बीजेपी के वैचारिक मार्गदर्शक के तौर पर RSS की भूमिका बढ़ने के बाद विदेशों में भी इसे लेकर दिलचस्पी बढ़ी है. संघ सीधे संवाद के जरिए हिंदुत्व, सामाजिक समरसता और वैश्विक मुद्दों पर अपना नजरिया रखना चाहता है.

पिछले एक साल में संघ की यह विदेश गतिविधि तेज हुई है. सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जर्मनी जा चुके हैं, जबकि प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर कजाकिस्तान और किर्गिस्तान का दौरा कर चुके हैं और उनके भागवत के साथ ब्रिटेन जाने की भी संभावना है.

क्या है AHEAD और Integral?

सूत्रों के मुताबिक RSS पदाधिकारी ब्रिटेन और यूरोप में भारतीय दूतावासों के संपर्क में भी हैं. हिंदू स्वयंसेवक संघ के अलावा AHEAD और Integral जैसे मंच औपचारिक रूप से RSS का हिस्सा नहीं हैं, लेकिन संघ के मूल्यों के अनुरूप काम कर रहे हैं और स्थानीय समाज तक पहुंच बनाने में मदद कर रहे हैं.

माना जा रहा है कि भागवत की यह यात्रा भविष्य के लिए एक मॉडल बन सकती है, जिसमें RSS विदेशों में ऐसे ही स्थानीय मंचों का ज्यादा इस्तेमाल करेगा. इस शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों की सफलता का आकलन इंदौर में होने वाली अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक में किया जाएगा.

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-भारत एक्सप्रेस

कोमल शर्मा, वरिष्ठ संवाददाता

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