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पांच आतंकियों की रिहाई के बदले हुई थी रिबैया की वापसी, 35 साल बाद CBI ने आरोपी को दबोचा, पढ़ें- EXPLAINER

Rubaiya Sayeed Kidnapping Case: तारीख थी 8 दिसंबर 1989 और जगह…श्रीनगर का लाल देद अस्पताल… इस दिन कश्मीर घाटी में कुछ ऐसा होने वाला था जिसने जम्मू-कश्मीर की राजनीति को हमेशा के लिए बदल दिया.

उस समय भारत के गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबैया सईद लाल देद अस्पताल से अपनी शिफ्ट पूरी करके निकली ही थी कि घर से आधा किलोमीटर दूर उनका अपहरण कर लिया जाता है. रुबैया जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की बहन हैं और अभी तमिलनाडु में रहती हैं.

35 सालों बाद एक आरोपी गिरफ्तार

गृह मंत्री की बेटी के अपहरण की सूचना जैसे ही मिली भारत में हड़कंप मच गया. तत्कालीन वीपी सिंह सरकार ने 5 दिनों के बाद 5 आतंकियों की रिहाई के बाद रुबैया को वापस लाया. आज उस अपहरण कांड के 35 सालों बाद मुख्य अभियुक्तों में से एक और भगोड़ा घोषित शफात अहमद शांगलू को CBI ने गिरफ्तार कर लिया. वह श्रीनगर में रह रहा था.

शांगलू जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के मुखिया यासीन मलिक का करीबी माना जाता है. उसने यासिन मलिक सहित दूसरे साथियों के साथ मिलकर इस वारदात को अंजाम दिया था. उसपर 10 लाख रुपये का इनाम भी रखा गया था.

जांच एजेंसियों ने रुबैया सईद को बनाया गवाह

जांच एजेंसियों ने इस मामले में तत्कालीन गृह मंत्री मुफ्ती सईद की बेटी रुबैया सईद को सरकारी गवाह बनाया है. एजेंसियों के मुताबिक शांगलू उस समय जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट में एक अधिकारी के रूप में काम कर रहा था और संगठन का फाइनेंस विभाग संभाल रहा था.

बता दें कि, इस मामले को सीबीआई ने 1990 में अपने हाथों में लिया था. इस मामले में रुबैया ने यासीन मलिक के अलावा 4 अन्य आरोपियों की पहचान की थी. यासीन मलिक फिलहाल दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद है.

कैसे की गई किडनैपिंग?

इस किडनैपिंग कांड की पटकथा जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट का एक नेता अशफाक माजिद वानी ने लिखी थी. वह पहले जम्मू-कश्मीर की तरफ से एथलीट था. वो लोग कुछ ऐसा करना चाहते थे कि पूरी सरकार हिल जाए. जब दिल्ली की गद्दी पर वीपी सिंह बैठे तो मुफ्ती मोहम्मद सईद को गृह मंत्री बनाया गया. JKLF इसी की तलाश में था. उसे मुफ्ती सईद की बेटी रुबैया के बारे में पहले से ही जानकारी थी. इसलिए उनके लिए यह काम आसान था. चूंकि रुबैया बिना किसी सुरक्षा के एक मिनी बस से घर जाती थीं. इसलिए JKLF के लिए इस किडनैपिंग को अंजाम देना एकदम आसान था.

उन्होंने पहले मुफ्ती और उनके परिवार की रेकी की और 8 दिसंबर 1989 को रुबैया को किडनैप कर लिया. उन्हें सबसे पहले एक पुलिस के अधिकारी के घर में रखा. आतंकी ये जानते थे कि सुरक्षा एजेंसियां हर उस ठिकाने पर जांच करेंगी जहां उनको शक होगा, लेकिन एक पुलिस अधिकारी का घर उनकी नजर में नहीं आएगा. आतंकियों की ये सोच एकदम सच साबित हुई.

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रुबैया के बदले 5 आतंकी हुए रिहा

किडनैपिंग के बाद इस किडनैपिंग में शामिल आरोपी जावेद मीर ने एक अखबार को फोन कर मामले की जानकारी दी. उसने अखबार से ये भी कहा कि वह रुबैया के बदले अपने 7 साथियों जिसमें शेख हामिद, शेर खान, नूर मोहम्मद कलवल, अल्ताफ बट, जावेद जगरार और मकबूल भट के भाई गुलान नबी भट और अहद वाज की रिहाई चाहता है. हालांकि इनमें से सिर्फ 5 लोगों को ही रिहा किया गया.

देश के गृहमंत्री की बेटी की किडनैपिंग की खबर जब देश के सामने आई तो पूरा भारत हिल गया. सेना के कई बड़े अधिकारी श्रीनगर के लिए तुरंत रवाना हो गए. एक तरफ सुरक्षा एजेंसियां जम्मू कश्मीर के चप्पे-चप्पे की तलाश कर रही थीं, तो वहीं दूसरी तरफ अधिकारी बिचौलियों के जरिये किडनैपरों से बातचीत करने में लगे थे. अंत में JKLF 5 आतंकियों पर बात बन गई और उन्हें छोड़ दिया गया. जिसके बाद 13 दिसंबर की शाम रुबैया को एक जज जस्टिस भट के घर छोड़ दिया गया. इस मामले के मास्टरमाइंड को सुरक्षा एजेंसियों ने 31 मार्च 1990 को मार गिराया.

ड्रामा था रुबैया अपहरण कांड- अलगाववादी नेता

एक अलगाववादी नेता हिलाल वार ने रुबैया के इस अपहरण पर बड़ा दावा किया है. उन्होंने अपनी किताब ‘ग्रेट डिस्क्लोजरः सीक्रेट अनमास्क्ड’में कहा है कि कश्मीर को जलाने की पटकथा बहुत पहले ही लिखी जा चुकी थी. रुबैया का अपहरण तो बस शुरुआत था. उन्होंने किताब में ये भी दावा किया है कि 90 के शुरुआती दशक में एकाध घटनाओं को छोड़ दिया जाए तो मामला पूरा शांत था. जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद शुरू करने में रुबैया सईद का अपहरण बस एक ड्रामा भर था.

-भारत एक्सप्रेस

Govind Kumar Singh

मैं गोविंद सिंह हूं और मूल रूप से बिहार के कैमूर की पहाड़ियों वाले इलाके से आता हूं। मेरी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज से हुई। इसके बाद मैंने पटना कॉलेज, पटना से मास कम्यूनिकेशन में ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद मैंने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की और अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए खबरों की दुनिया को करीब से समझा। अपने पेशेवर सफर में मुझे ईटीवी भारत, इनशॉर्ट्स और श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन जैसे संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला। इन जगहों पर काम करते हुए मैंने रिपोर्टिंग, कंटेंट लेखन, रिसर्च और समाचारों की प्रस्तुति से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें सीखीं। फिलहाल मैं भारत एक्सप्रेस में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हूं। यहां मेरी मुख्य रुचि विदेश, राजनीति और बिहार से जुड़ी खबरों को कवर करने में है।

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