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मुंबई में NUCFDC के नए हेडक्वार्टर का उद्घाटन! अमित शाह बोले- ‘सहकार से समृद्धि’ से मजबूत होगी छोटे कारोबारियों की ताकत

Amit Shah Sahakar Nav Kranti Mumbai: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सहकार से समृद्धि’ के विजन को धरातल पर उतारने की दिशा में शहरी सहकारी बैंकिंग क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है. मुंबई स्थित ऐतिहासिक BSE इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में आयोजित ‘सहकार नव-क्रांति’ कार्यक्रम में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शहरी सहकारी बैंकों को आधुनिक तकनीक, डिजिटल सेवाओं और साइबर सुरक्षा से जोड़ने वाली कई महत्वपूर्ण पहलों की शुरुआत की.

कार्यक्रम में शहरी सहकारी बैंकों के लिए Security Operation Centre (SOC) तथा राष्ट्रव्यापी सेवा बंडल के तहत Core Banking और उससे जुड़ी सेवाओं का शुभारंभ किया गया. इसके साथ ही NUCFDC और राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय (NFSU) के बीच समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान हुआ. इससे पहले अमित शाह ने मुंबई के फोर्ट स्थित शारदा सदन में NUCFDC के नए कार्यालय परिसर का उद्घाटन किया.

कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर, केंद्रीय सहकारिता एवं नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल सहित केंद्र और महाराष्ट्र सरकार के कई मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी तथा देशभर के शहरी सहकारी बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधि मौजूद रहे.

ऐतिहासिक BSE परिसर से सहकारी बैंकिंग में बदलाव का संदेश

अमित शाह ने कार्यक्रम स्थल के ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस स्थान ने लगभग एक सदी तक देश के शेयर बाजार की गतिविधियों को दिशा दी, वही परिसर अब शहरी सहकारी बैंकिंग क्षेत्र में एक नए परिवर्तन का गवाह बन रहा है.

उनका कहना था कि BSE का ऐतिहासिक ट्रेडिंग हॉल भारत के आर्थिक और औद्योगिक विकास की लंबी यात्रा का साक्षी रहा है. अब इसी स्थान से शहरी सहकारी बैंकों को तकनीक, सुरक्षा और प्रतिस्पर्धा के नए दौर के लिए तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है.

अम्ब्रेला ऑर्गेनाइजेशन बना बड़ी जरूरत का समाधान

अमित शाह ने कहा कि शहरी सहकारी बैंकों के लिए जिस Umbrella Organisation की स्थापना कभी बेहद कठिन चुनौती मानी जाती थी, वह अब वास्तविकता बन चुकी है. भारतीय रिजर्व बैंक की मान्यता, पर्याप्त पूंजी और नए कार्यालय के साथ यह संगठन शहरी सहकारी बैंकिंग व्यवस्था को मजबूत करने के लिए काम कर रहा है.

उन्होंने बताया कि संगठन के गठन के लिए बहुत कम समय में करीब 306 करोड़ रुपये की पूंजी जुटाई गई. इसका उद्देश्य केवल कोई नया संस्थागत ढांचा खड़ा करना नहीं, बल्कि देश के करीब 1,400 शहरी सहकारी बैंकों को तकनीकी और संस्थागत रूप से मजबूत बनाना है.

अम्ब्रेला ऑर्गेनाइजेशन बैंकों को RBI के नियामकीय मानकों को समझने और पूरा करने में सहायता देगा. साथ ही नए नियमों, तकनीकी बदलावों और बैंकिंग क्षेत्र में हो रहे सुधारों की जानकारी भी समय पर उपलब्ध कराई जाएगी.

‘Bank in a Box’ से छोटे बैंक भी बनेंगे डिजिटल

कार्यक्रम की सबसे अहम पहलों में ‘Bank in a Box’ सेवा का शुभारंभ रहा. इसके माध्यम से छोटे शहरी सहकारी बैंकों को भी आधुनिक बैंकिंग का पूरा डिजिटल ढांचा उपलब्ध कराने की कोशिश की गई है.

कोर बैंकिंग सिस्टम, डिजिटल भुगतान, क्लाउड सेवाएं, नियामकीय अनुपालन और अन्य आधुनिक बैंकिंग सुविधाओं को एकीकृत प्लेटफॉर्म पर लाने से छोटे बैंकों के लिए तकनीकी निवेश का बोझ कम होगा.

अमित शाह ने कहा कि इसका सबसे बड़ा लाभ उन छोटे बैंकों को मिलेगा, जिनकी एक या कुछ ही शाखाएं हैं. ऐसे बैंक भी बड़े वित्तीय संस्थानों की तरह आधुनिक बैंकिंग सुविधाएं अपने ग्राहकों को उपलब्ध करा सकेंगे.

साइबर हमलों से सुरक्षा के लिए Security Operation Centre

डिजिटल बैंकिंग के विस्तार के साथ साइबर सुरक्षा की चुनौती भी लगातार बढ़ रही है. इसी को ध्यान में रखते हुए शहरी सहकारी बैंकों के लिए Security Operation Centre शुरू किया गया है.

यह सेंटर बैंकों को 24 घंटे साइबर सुरक्षा निगरानी, जोखिम की पहचान और आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराने में मदद करेगा. अमित शाह ने सभी शहरी सहकारी बैंकों से इस व्यवस्था का सदस्य बनने की अपील की.

उनके अनुसार, डिजिटल युग में बैंक की सुरक्षा का मतलब केवल बैंकिंग संस्थान की सुरक्षा नहीं, बल्कि उसके ग्राहकों और जमाकर्ताओं की जमा पूंजी की सुरक्षा भी है.

NFSU के साथ समझौता, डिजिटल फोरेंसिक को मिलेगी मजबूती

शहरी सहकारी बैंकिंग व्यवस्था को साइबर अपराधों से बचाने के लिए NUCFDC और राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय (NFSU) के बीच समझौता किया गया है.

इस साझेदारी के जरिए छोटे से छोटे शहरी सहकारी बैंक तक साइबर सुरक्षा और डिजिटल फोरेंसिक की सुविधाएं पहुंचाने का लक्ष्य है. कर्मचारियों के प्रशिक्षण, डिजिटल फोरेंसिक, साइबर सुरक्षा और अनुसंधान को भी इस सहयोग से मजबूती मिलेगी.

अमित शाह ने MuleHunter जैसे सॉफ्टवेयर और AI आधारित तकनीकी समाधानों के इस्तेमाल पर भी जोर दिया. इन तकनीकों का उद्देश्य संदिग्ध लेनदेन और वित्तीय धोखाधड़ी को समय रहते पहचानना और रोकना है.

करीब 6 लाख करोड़ रुपये की जमा राशि, छोटे कारोबार की बड़ी ताकत

अमित शाह ने शहरी सहकारी बैंकों की आर्थिक भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि देश के लगभग 1,400 शहरी सहकारी बैंकों में करीब 6 लाख करोड़ रुपये की जमा राशि है.

इन बैंकों की विशेषता यह है कि वे छोटे दुकानदारों, व्यापारियों, MSME, स्थानीय उद्यमियों, महिला स्वयं सहायता समूहों और मध्यम वर्ग तक अपेक्षाकृत आसानी से पहुंच बनाते हैं.

उन्होंने कहा कि बड़े वाणिज्यिक बैंकों के लिए समाज के इन वर्गों तक उसी स्तर की स्थानीय पहुंच बनाना हमेशा आसान नहीं होता. ऐसे में शहरी सहकारी बैंक स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार के लिए महत्वपूर्ण वित्तीय आधार तैयार करते हैं.

छोटे कर्ज, मजबूत रिकवरी का उदाहरण

अमित शाह ने शहरी सहकारी बैंक के अध्यक्ष के रूप में अपने अनुभव को साझा करते हुए छोटे ऋणों की वापसी की बेहतर प्रवृत्ति का उल्लेख किया. उन्होंने बताया कि उनके बैंक में बिना गारंटी और कोलेटरल के छोटे ऋण देने की व्यवस्था शुरू की गई थी.

उन्होंने कहा कि पहले ढाई लाख रुपये तक के ऐसे ऋण दिए जाते थे, जिसकी सीमा अब बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दी गई है. उनके अनुसार, इस व्यवस्था में वितरित ऋणों की लगभग पूरी राशि ब्याज सहित वापस आई.

उनका तर्क था कि छोटे ऋणों के मामले में सामान्य और छोटे आय वर्ग के लोग अपने वित्तीय दायित्वों को लेकर काफी गंभीर रहते हैं. यही कारण है कि छोटे ऋणों की रिकवरी कई बार बेहतर दिखाई देती है.

सहकारिता के जरिए छोटी पूंजी को बड़ी आर्थिक शक्ति में बदलने पर जोर

अमित शाह ने कहा कि सहकारिता की सबसे बड़ी ताकत यही है कि इसमें लाखों लोगों की छोटी-छोटी पूंजी और भागीदारी को जोड़कर बड़ी आर्थिक शक्ति बनाई जा सकती है.

उन्होंने अमूल, IFFCO, KRIBHCO और लिज्जत पापड़ जैसे उदाहरणों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन संस्थाओं का निर्माण किसी एक बड़े पूंजी निवेशक के दम पर नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में छोटे सदस्यों की सामूहिक भागीदारी से हुआ.

उन्होंने अमूल का उदाहरण देते हुए कहा कि सहकारी मॉडल महिलाओं और छोटे उत्पादकों को आर्थिक गतिविधियों की मुख्यधारा से जोड़ने की क्षमता रखता है. यही मॉडल ‘सहकार से समृद्धि’ के व्यापक उद्देश्य को समझने का आधार बनता है.

महाराष्ट्र में होगा NUCFDC का मुख्यालय

अमित शाह ने बताया कि महाराष्ट्र में देश के सबसे अधिक 449 शहरी सहकारी बैंक हैं. महाराष्ट्र के साथ गुजरात, गोवा और कर्नाटक में भी शहरी सहकारी बैंकिंग की मजबूत उपस्थिति है.

इसी व्यापक गतिविधि को देखते हुए NUCFDC का मुख्यालय दिल्ली से महाराष्ट्र स्थानांतरित करने की घोषणा की गई. इससे देश के प्रमुख शहरी सहकारी बैंकिंग केंद्रों के साथ संगठन का समन्वय और मजबूत होने की उम्मीद है.

साझी तकनीक से कम होगी लागत

अम्ब्रेला ऑर्गेनाइजेशन के पीछे सरकार की सोच यह है कि हर शहरी सहकारी बैंक को अलग-अलग महंगी तकनीकी प्रणालियां, सॉफ्टवेयर और साइबर सुरक्षा सेवाएं खरीदने की जरूरत न पड़े.

सामूहिक खरीद और साझा तकनीकी ढांचे के माध्यम से लागत कम की जा सकती है. इससे छोटे बैंक भी ऐसी तकनीक अपना सकेंगे, जिसे व्यक्तिगत स्तर पर खरीदना उनके लिए महंगा साबित हो सकता है.

सहकार CBS, साझा भुगतान सेवाएं, Loan Origination System, Sahakar Cloud और Security Operation Centre इसी व्यापक व्यवस्था का हिस्सा हैं. इसके अलावा AI आधारित धोखाधड़ी रोकथाम, सामूहिक साइबर बीमा, डिजिटल फोरेंसिक, आधार आधारित सेवाएं, नियामकीय अनुपालन का स्वचालन और आधुनिक जोखिम प्रबंधन व्यवस्था विकसित करने पर भी जोर दिया गया है.

RBI के साथ बढ़ते संवाद को बताया महत्वपूर्ण बदलाव

अमित शाह ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक के बीच संवाद और समन्वय से शहरी सहकारी बैंकों से जुड़े कई पुराने मुद्दों का समाधान हुआ है.

इनमें बिना अलग अनुमति के निर्धारित सीमा तक शाखाओं का विस्तार, डोरस्टेप बैंकिंग, पात्र टियर-3 बैंकों को अनुसूचित बैंक का दर्जा प्राप्त करने की प्रक्रिया को आसान बनाना, RBI में नोडल अधिकारी की नियुक्ति, प्राथमिकता क्षेत्र ऋण से जुड़े नियमों में बदलाव, आवास ऋण सीमा में वृद्धि और One Time Settlement (OTS) जैसी सुविधाएं शामिल हैं.

उन्होंने कहा कि शहरी सहकारी बैंकों और नियामक के बीच पुराने अविश्वास को समाप्त कर विश्वास और पारदर्शिता पर आधारित व्यवस्था तैयार करना आवश्यक है.

1,400 में से 650 बैंक जुड़े, अब लक्ष्य 100 प्रतिशत सदस्यता

अमित शाह ने बताया कि देश के करीब 1,400 शहरी सहकारी बैंकों में लगभग 650 बैंक अम्ब्रेला ऑर्गेनाइजेशन से जुड़ चुके हैं. यानी सदस्यता करीब आधे स्तर तक पहुंच गई है.

उन्होंने अगले एक वर्ष में सभी शहरी सहकारी बैंकों को इस नेटवर्क से जोड़ने का लक्ष्य सामने रखा. साथ ही NUCFDC से अपील की कि एक शाखा वाले छोटे बैंकों को ध्यान में रखते हुए सदस्यता शुल्क को और किफायती बनाया जाए.

उनका स्पष्ट संदेश था कि अम्ब्रेला ऑर्गेनाइजेशन का उद्देश्य मुनाफा कमाना नहीं, बल्कि शहरी सहकारी बैंकों को मजबूत, सुरक्षित और प्रतिस्पर्धी बनाना है.

‘सहकार से समृद्धि’ का मतलब बैंक के साथ ग्राहक की समृद्धि भी

अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2047 तक भारत को विकसित और समृद्ध राष्ट्र बनाने का लक्ष्य रखा है. इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए केवल बड़े उद्योगों और पूंजी बाजार का विस्तार पर्याप्त नहीं होगा. देश के आम नागरिकों के लिए स्वरोजगार और छोटे उद्यमों के अवसर बढ़ाने होंगे.

यहीं शहरी सहकारी बैंकों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है. छोटे व्यापारियों, उद्यमियों और स्वरोजगार से जुड़े लोगों को समय पर और उनकी जरूरत के अनुरूप ऋण उपलब्ध कराकर ये बैंक स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को गति दे सकते हैं.

उन्होंने कहा कि ‘सहकार से समृद्धि’ का अर्थ केवल सहकारी बैंक को मजबूत करना नहीं है, बल्कि बैंक से जुड़े ग्राहक को भी आर्थिक रूप से सक्षम बनाना है. बैंक और ग्राहक—दोनों की समृद्धि ही इस अभियान की वास्तविक सफलता होगी.

नए कार्यालय से नई दिशा की उम्मीद

अमित शाह ने कहा कि NUCFDC के नए कार्यालय और अम्ब्रेला फ्रेमवर्क के साथ शहरी सहकारी बैंकिंग क्षेत्र एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है. उन्होंने देशभर के सहकारी बैंकों के अध्यक्षों और निदेशक मंडलों के सदस्यों को इस व्यवस्था को सफल बनाने में सहयोग के लिए धन्यवाद दिया.

उन्होंने विश्वास जताया कि आधुनिक तकनीक, साझा सेवाओं, साइबर सुरक्षा और बेहतर नियामकीय अनुपालन के माध्यम से शहरी सहकारी बैंक आने वाले वर्षों में और मजबूत होंगे तथा छोटे शहरों और कस्बों तक आर्थिक विकास की पहुंच बढ़ाएंगे.

कार्यक्रम के दौरान RBI के पूर्व उप महाप्रबंधक जी. पी. मिस्त्री की पुस्तक ‘Operational Risk Management – A Practical Guide to Urban Co-operative Banks’ तथा भारत में सहकारी बैंकिंग की यात्रा पर आधारित कॉफी टेबल बुक का भी लोकार्पण किया गया. इसके अलावा ‘सहकार CBS’ से सफलतापूर्वक जुड़ने वाले शुरुआती छह शहरी सहकारी बैंकों के प्रतिनिधियों को सम्मानित किया गया.

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कुल मिलाकर ‘सहकार नव-क्रांति’ का संदेश साफ है- शहरी सहकारी बैंकों को अब केवल स्थानीय स्तर के वित्तीय संस्थान के रूप में नहीं, बल्कि आधुनिक डिजिटल बैंकिंग, साइबर सुरक्षा और तकनीकी प्रतिस्पर्धा से लैस संस्थाओं के रूप में विकसित करने की कोशिश हो रही है. यदि यह मॉडल देश के सभी शहरी सहकारी बैंकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचता है, तो छोटे कारोबार, स्वरोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को वित्तीय मजबूती देने में इसकी भूमिका आने वाले वर्षों में और महत्वपूर्ण हो सकती है.

-भारत एक्सप्रेस

महिमा कटारिया

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