Shraddha paksha
Shraddha paksha हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का विशेष महत्व माना गया है। यह वह समय होता है जब परिवारजन अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं. मान्यता है कि पितरों की आत्मा को तृप्त करने के लिए श्राद्ध और तर्पण करना अनिवार्य है. शास्त्रों में कहा गया है कि यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में पितृदोष विद्यमान हो, तो जीवन में बार-बार बाधाएँ आती हैं. इस दोष से मुक्ति पाने का सर्वोत्तम अवसर पितृ पक्ष ही माना जाता है.
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब सूर्य, चंद्रमा, गुरु, मंगल, शुक्र, शनि या अन्य ग्रह राहु-केतु के साथ युति करते हैं तो पितृदोष उत्पन्न होता है. इसे पूर्वजों के अपूर्ण कार्यों और पिछले जन्मों के पाप कर्मों से भी जोड़ा जाता है. इसके प्रभाव से जातक को आर्थिक संकट, वैवाहिक समस्या, संतान सुख में बाधा और पारिवारिक क्लेश जैसी कठिनाइयाँ झेलनी पड़ सकती हैं.
पितृ पक्ष 2025 में विशेष महत्व रखता है क्योंकि इस दौरान किए गए कर्मकांड शीघ्र फलदायी होते हैं. शास्त्रों में कहा गया है कि जब पितरों की आत्मा तृप्त होती है तो वे संतुष्ट होकर अपने वंशजों को आशीर्वाद देते हैं. इससे परिवार में सुख-शांति और समृद्धि आती है.
श्राद्ध करना पितृ पक्ष का सबसे प्रमुख कार्य है। ब्राह्मण को बुलाकर विधि-विधान से श्राद्ध कराएं. भोजन करने से पहले रोटी, अन्न या जल का हिस्सा गाय, कुत्ते और कौवों को अवश्य दें.
गया, वाराणसी, उज्जैन और हरिद्वार जैसे पवित्र तीर्थस्थलों पर पिंडदान करना पितृदोष निवारण का श्रेष्ठ उपाय है. मान्यता है कि पिंडदान से आत्माओं को मोक्ष प्राप्त होता है और वंशजों का जीवन सुगम बनता है.
पितृ पक्ष में अन्न, वस्त्र, तिल, गुड़ और दक्षिणा का दान करने से पितरों की कृपा प्राप्त होती है. विशेष रूप से गरीब, गौ, कुत्ते और पक्षियों को भोजन कराना शुभ माना गया है.
प्रतिदिन पीपल के पेड़ को जल चढ़ाएँ, सात परिक्रमा करें और “ॐ पितृभ्यः नमः” मंत्र का जप करें. शास्त्रों के अनुसार, पितरों का वास पीपल वृक्ष में होता है.
इस समय गीता का पाठ और गरुड़ पुराण का श्रवण करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है. यह उपाय घर-परिवार में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है.
कुश, काले तिल और जल से तर्पण करने से पितृ दोष का प्रभाव कम होता है. यह सबसे सरल और फलदायी उपाय माना जाता है.
ब्राह्मणों को भोजन कराना और गौ सेवा करना पितृ तृप्ति का सर्वोत्तम साधन माना गया है. मान्यता है कि इससे पूर्वज प्रसन्न होकर वंशजों को आशीर्वाद देते हैं.
पितृ पक्ष केवल धार्मिक आस्था ही नहीं बल्कि कृतज्ञता का पर्व भी है. यह समय हमें यह याद दिलाता है कि हमारी जड़ें हमारे पूर्वजों से जुड़ी हैं और उनका सम्मान करना हमारा कर्तव्य है. पितृदोष से पीड़ित जातक यदि इन उपायों को सच्चे मन से करें तो जीवन की कई कठिनाइयाँ दूर हो सकती हैं और घर-परिवार में सुख-समृद्धि का संचार होता है.
भारत एक्सप्रेस
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