Sonam Wangchuk hunger strike
Sonam Wangchuk on pm modi: नीट पेपर लीक को लेकर पिछले 17 दिनों से राजधानी दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शन में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भूख हड़ताल पर बैठे हैं. उनकी मांग एकदम स्पष्ट है कि पेपर लीक को लेकर जवाबदेही तय हो और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें. हालांकि, अब सोनम वांगचुक ने शिक्षा मंत्री के साथ ही प्रधानमंत्री को भी बड़ी नसीहत दी है. उन्होंने पीएम मोदी से जनता की बात सुनने और थोड़ा संवेदनशील बनने की अपील की है.
इंडियन एक्सप्रेस हिंदी से बातचीत के दौरान सोनम वांगचुक ने पीएम मोदी के सवाल पर कहा, “जनता की आवाज सुनना सरकार के दीर्घकालिक हित में है. उन्हें संवेदनशील होना चाहिए, कठोर नहीं. लोकतंत्र सहानुभूति और करुणा से चलता है, कठोरता से नहीं. मैं उनसे व्यक्तिगत रूप से कभी नहीं मिला.”
सोनम वांगचुक ने विपक्ष के नेताओं की भूमिका पर भी अपनी राय रखी. जब उनसे पूछा गया कि क्या विपक्ष के नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव इस प्रदर्शन में शामिल होंगे, तो उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सभी राजनीतिक दलों के नेता इस आंदोलन का समर्थन करेंगे. उनके मुताबिक, अगर कोई नेता नहीं आता है तो यह उसकी संकीर्ण सोच को दिखाएगा. उन्होंने यह भी साफ किया कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि जनता के हित से जुड़ा है.
पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर सोनम वांगचुक ने कहा कि सिर्फ इस्तीफा देने से समस्या खत्म नहीं होगी, लेकिन इससे जवाबदेही तय करने की शुरुआत जरूर होगी. उनका कहना था कि जब तक जिम्मेदारी तय नहीं होगी, तब तक ऐसी घटनाएं होती रहेंगी. उन्होंने कहा कि पेपर लीक सिर्फ शिक्षा व्यवस्था का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. अगर नकल या पेपर लीक के जरिए डॉक्टर और इंजीनियर बनेंगे, तो इसका सीधा असर लोगों की जान और सुरक्षा पर पड़ेगा.
सोनम वांगचुक ने यह भी कहा कि आज देश में ईमानदारी की अहमियत लगातार कम होती जा रही है. उनके अनुसार, जब परीक्षा से लेकर वोट तक हर चीज पर सवाल उठने लगें, तो ऐसे माहौल में देश का विकास मुश्किल हो जाता है.
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भूख हड़ताल के 16वें दिन सोनम वांगचुक ने कहा कि अब तक केंद्र सरकार की ओर से उनसे किसी भी तरह का संपर्क नहीं किया गया है. उनका कहना था कि अब उनका प्रयास अपनी आवाज को और बुलंद करने का है ताकि सरकार तक उनकी बात पहुंच सके. उन्होंने कहा कि यदि यह मुद्दा सरकार तक गंभीरता से नहीं पहुंच पाया है तो इसकी जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं, बल्कि जनता की भी है. उन्होंने लोगों से अपील की कि वे सड़कों पर उतरकर अपनी आवाज उठाएं और एकजुटता दिखाने के लिए एक दिन का उपवास रखें, जिससे सरकार पर बातचीत और समाधान निकालने का दबाव बने. उन्होंने बताया कि प्रतिदिन करीब 5,000 से 7,000 लोग समर्थन देने पहुंच रहे हैं, जिसे उन्होंने संतोषजनक बताया.
-भारत एक्सप्रेस
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