देश

बारूदी मिडिल ईस्ट पर भारत में सियासत! वाजपेयी के नाम पर कौन सी नसीहत दे रही हैं सोनिया गांधी?

Sonia Gandhi On PM Modi: मध्य पूर्व में जारी भीषण संघर्ष और ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की ‘लक्षित हत्या’ पर भारत सरकार की आधिकारिक ‘खामोशी’ को विपक्ष ने बड़ा मुद्दा बना लिया है. कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने एक प्रमुख समाचार पत्र में लिखे अपने लेख के जरिए मोदी सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा है कि यह चुप्पी ‘तटस्थता’ नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी से ‘भागना’ है.

अटल बिहारी वाजपेयी का हवाला

सोनिया गांधी ने भाजपा के ही दिग्गज नेता और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का जिक्र किया. सोनिया ने याद दिलाया कि अप्रैल 2001 में जब तत्कालीन पीएम वाजपेयी ईरान दौरे पर गए थे, तब उन्होंने भारत-ईरान के ‘गहरे और समकालीन’ संबंधों को नई ऊंचाई दी थी. उन्होने तंज कसते हुए पूछा कि क्या मौजूदा सरकार के लिए वाजपेयी के वे प्रयास और सिद्धांत अब कोई मायने नहीं रखते? उन्होंने कहा कि सरकार की वर्तमान चुप्पी उन दशकों पुराने रिश्तों और कूटनीतिक प्रतिबद्धताओं का अपमान है.

ये भी पढ़ें: 77 साल, 7 जंग और अधूरा अंजाम…, 1948 से 2026 तक बारूदी मिडिल ईस्ट; अरब की लड़ाई में ईरान क्यों अकेला विलेन?

खामोशी विश्वसनीयता पर सवाल- सोनिया गांधी

सोनिया गांधी ने सरकार के रुख को ‘हैरान करने वाला’ बताते हुए कई गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजरायल द्वारा एक संप्रभु राष्ट्र (ईरान) के प्रमुख की हत्या अंतरराष्ट्रीय कानूनों और यूनाइटेड नेशंस चार्टर (अनुच्छेद 2/4) का खुला उल्लंघन है, जिस पर भारत की चुप्पी चिंताजनक है.

सोनिया ने लिखा कि पीएम मोदी ने ईरान के पलटवार की तो आलोचना की, लेकिन इजरायल द्वारा किए गए संप्रभुता के उल्लंघन पर एक शब्द नहीं बोला. यह भारत की विदेश नीति की दिशा और साख पर सवाल खड़ा करता है. उन्होंने सवाल किया कि यदि भारत अपने सिद्धांतों की रक्षा नहीं कर सकता, तो ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील देश) के अन्य राष्ट्र भारत पर नेतृत्व के लिए भरोसा क्यों करेंगे?

संसद में चर्चा की मांग

उन्होंने ने मांग की है कि संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में इस ‘चिंताजनक चुप्पी’ पर बिना किसी टालमटोल के खुलकर चर्चा होनी चाहिए. गांधी कहा कि भारत को अपना ‘नैतिक आधार’ वापस पाने की जरूरत है और दुनिया के सामने अपनी स्पष्ट प्रतिबद्धता जाहिर करनी चाहिए.

ईरान-इजरायल युद्ध ने भारत के सामने एक जटिल चुनौती पेश की है. जहां सरकार इजरायल के साथ रणनीतिक साझेदारी और ईरान के साथ ऐतिहासिक संबंधों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है, वहीं विपक्ष इसे ‘डर’ और ‘सिद्धांतों से समझौता’ बता रहा है. सोनिया गांधी द्वारा वाजपेयी का नाम लेकर दी गई यह नसीहत भाजपा के लिए न केवल कूटनीतिक, बल्कि वैचारिक रूप से भी एक बड़ी चुनौती बन गई है.

Shyamdatt Chaturvedi

श्यामदत्त चतुर्वेदी एक अनुभवी मीडिया पेशेवर हैं. वर्तमान में नोएडा 'भारत एक्सप्रेस' में पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में सात वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामदत्त ने हिंदी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए कंटेंट राइटिंग, रिपोर्टिंग, एडिटिंग और डेटा एनालिसिस में गहरी विशेषज्ञता हासिल की है. इससे पहले उन्होंने जी न्यूज, ईटीवी भारत, टीएफआई मीडिया, वे2न्यूज और सैफायर मीडिया लिमिटेड (इंडिया डेली लाइव) जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं. उन्होंने स्थानीय पंचायत से लेकर विधानसभा, लोकसभा तक की व्यापक कवरेज की. उन्होंने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (IGNTU), अमरकंटक से पत्रकारिता और जनसंचार में स्नातक (BJMC) करने के बाद, प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर डिग्री (M.A.) हासिल की है.

Recent Posts

Aaj Ka Rashifal Mesh Rashi: काम में बदलाव के संकेत, बढ़ेगी भागदौड़; खर्च पर रखें नियंत्रण

Aaj Ka Rashifal Mesh Rashi: मेष राशि वालों के लिए आज कार्यस्थल पर बदलाव और…

16 minutes ago

आज का राशिफल वृष राशि : कामकाज में नए विचार आएंगे, पुराने अटके कामों को मिलेगी गति

Aaj Ka Rashifal Vrish Rashi: वृष राशि वालों के लिए आज पुराने अटके कामों में…

16 minutes ago