Special Intensive Revision India: चुनाव आयोग की तरफ से एक बड़ी जानकारी सामने आई है. बुधवार (17 सितंबर 2025) को चुनाव आयोग के अधिकारियों ने जानकारी शेयर की, उनका कहना है कि देश को ज्यादातर राज्यों में अब आधे से ज्यादा वोटरों को SIR के लिए किसी भी तरह के कोई दस्तावेज दिखाने की जरूरत नहीं होगी. साथ ही उन्होंने जानकारी दी कि ऐसा इसलिए है क्योंकि पिछली बार हुए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में उनके नाम पहले से शामिल थे.
इसके अलावा चुनाव आयोग के अफसरों का कहना है कि ज्यादातर राज्यों में वोटर लिस्ट को सही करने का काम साल 2002 से 2008 के बीच में हुआ था. इसलिए आने वाले समय में जब भी ये काम दोबारा होगी तो साल 2002-08 को ही कट-ऑफ डेट माना जाएगा. यानी जिन भी लोगों के नाम इस समय सीमा के दौरान वोटर लिस्ट में शामिल थे उन्हें अब ज्यादा दस्तावेज दिखाने की जरूरत नहीं पड़ेगी.
जल्द ही पूरे देश में मतदाता सूची की बड़ी सफाई (SIR- Systematic Information Revision) शुरू होने जा रही है. चुनाव आयोग इसके लिए तारीख तय करने की प्रक्रिया में है. उम्मीद की जा रही है कि साल के आखिर तक राज्यों में वोटर लिस्ट सुधारने का काम भी चालू हो जाएगा.
हाल ही में हुई एक अहम मीटिंग में, सभी राज्यों के मुख्य चुनाव अधिकारियों (CEO) को कहा गया कि वे अपनी-अपनी पिछली वोटर लिस्ट को तैयार रखें ताकि नई प्रक्रिया smoothly शुरू की जा सके.
बिहार में पिछली बार SIR करीब 20 साल पहले 2003 में हुआ था. अब नई तैयारी के साथ एक बार फिर बिहार चर्चा में है. राज्य की मौजूदा वोटर लिस्ट के हिसाब से करीब 60% वोटरों को अपनी जन्मतिथि या जन्मस्थान साबित करने के लिए कोई डॉक्यूमेंट देने की जरूरत नहीं होगी, क्योंकि उनके रिकॉर्ड पहले से ही पक्के हैं.
लेकिन बाकी 40% वोटर्स को अपनी पहचान और जन्म से जुड़े दस्तावेज जमा करने होंगे. इसमें 12 तयशुदा डॉक्यूमेंट्स में से कोई एक देना होगा.
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अगर कोई पहली बार वोटर बन रहा है या हाल ही में किसी दूसरे राज्य से शिफ्ट होकर आया है, तो उसे सिर्फ डॉक्यूमेंट ही नहीं, बल्कि एक शपथपत्र (घोषणा पत्र) भी देना होगा. इसमें उसे यह बताना होगा कि उसका जन्म 1 जुलाई 1987 से पहले भारत में ही हुआ था.
बिहार में इस पूरी प्रक्रिया को लेकर पहले भी विवाद हो चुके हैं. विपक्षी दलों ने चिंता जताई थी कि जिन लोगों के पास पूरे कागजात नहीं हैं, उन्हें वोट देने के अधिकार से वंचित किया जा सकता है. हालांकि चुनाव आयोग ने ये साफ किया है कि वो प्रक्रिया को पारदर्शी और सभी के लिए आसान बनाने की कोशिश कर रहा है.
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-भारत एक्सप्रेस
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