पश्चिम बंगाल में सुवेंदु अधिकारी की पहली कैबिनेट बैठक( Bengal Cabinet Meeting) के फैसलों को देखकर राजनीतिक गलियारों में एक ही चर्चा है कि स्क्रिप्ट पहले ही लिखी जा चुकी थी. गृह मंत्री अमित शाह ने बंगाल की चुनावी रैलियों में जिन मुद्दों को ‘मोदी की गारंटी’ बताया था, सुवेंदु ने मुख्यमंत्री बनते ही पहली ही कलम से उन पर मुहर लगा दी.
चाहे वो बांग्लादेश सीमा पर बीएसएफ को जमीन देने का संवेदनशील मामला हो या आयुष्मान भारत को लागू करने का ऐतिहासिक फैसला, सुवेंदु सरकार के ये कदम अमित शाह के उस ‘मास्टरप्लान’ का हिस्सा हैं, जो उन्होंने ‘दीदी’ के किले को ढहाने के लिए तैयार किया था.
अमित शाह ने बंगाल के सीमावर्ती जिलों में गर्जना करते हुए कहा था कि एक बार भाजपा की सरकार बना दो, परिंदा भी पर नहीं मार पाएगा. सुवेंदु कैबिनेट ने पहली ही मीटिंग में BSF को 45 दिन के भीतर बाड़ लगाने के लिए जमीन देने का जो आदेश दिया है, वह सीधे गृह मंत्रालय की उस ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का हिस्सा है.
शाह जानते थे कि घुसपैठ रोकने के लिए सबसे बड़ी बाधा राज्य सरकार द्वारा जमीन न देना है. सुवेंदु ने इस बाधा को 24 घंटे के भीतर खत्म कर शाह की ‘क्रोनोलॉजी’ को सच कर दिखाया है.
ग्रहमंत्री अमित शाह अक्सर अपनी सभाओं में पूछते थे कि “बंगाल के गरीबों को 5 लाख का मुफ्त इलाज क्यों नहीं मिल रहा?” ममता बनर्जी के कड़े विरोध के बावजूद, शाह ने वादा किया था कि भाजपा की सरकार बनते ही बंगाल के हर घर में आयुष्मान कार्ड पहुँचेगा. सुवेंदु ने पहली कैबिनेट में इस योजना को मंजूरी देकर शाह के उस वादे को निभाया है. यह केवल एक स्वास्थ्य योजना नहीं बल्कि शाह द्वारा टीएमसी के ‘स्वस्थ साथी’ मॉडल पर किया गया सबसे बड़ा ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ है.
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अमित शाह ने चुनाव प्रचार के दौरान युवाओं की रुकी हुई भर्तियों पर गहरा दुख व्यक्त किया था. उन्होंने कहा था कि टीएमसी सरकार ने युवाओं का भविष्य बर्बाद कर दिया है. सुवेंदु कैबिनेट द्वारा सरकारी नौकरियों में 5 साल की आयु सीमा बढ़ाना सीधे तौर पर अमित शाह के उस विजन का हिस्सा है, जिसे उन्होंने बंगाल के युवाओं को मुख्यधारा में लाने के लिए बुना था. यह फैसला बताता है कि सुवेंदु सरकार की हर फाइल पर शाह के ‘सोशल इंजीनियरिंग’ की छाप है.
न्याय’ की शुरुआतअमित शाह के नेतृत्व में देश ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) को अपनाया, लेकिन बंगाल में इसे लागू करने में रोड़े अटकाए जा रहे थे. सुवेंदु ने पहली ही बैठक में आईपीसी और सीआरपीसी को इतिहास बनाकर नए कानूनों को लागू कर दिया.
यह गृह मंत्री अमित शाह की उस कानूनी क्रांति का विस्तार है, जिसे वो पूरे देश में एक समान देखना चाहते हैं. साफ है कि सुवेंदु अधिकारी केवल मुख्यमंत्री के तौर पर नहीं, बल्कि अमित शाह के ‘संकल्पों के सारथी’ के रूप में बंगाल की नई तस्वीर लिख रहे हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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