देश

कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और कवि इमरान प्रतापगढ़ी की ओर से दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित

कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और कवि इमरान प्रतापगढ़ी की ओर से दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों की जिरह के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है. जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने कहा कि पुलिस को कुछ संवेदनशीलता दिखानी होगी. उन्हें कम से कम पढ़ना और समझना तो चाहिए. कोर्ट ने कहा संविधान के अस्तित्व में आने के 75 साल बाद, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कम से कम अब पुलिस को समझना होगा.

कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने पर उठाया था सवाल

जस्टिस ओका ने कहा कि रचनात्मकता का सम्मान नहीं रह गया है. अगर आप इसे पढ़े तो इसमें लिखा है कि जो खून के प्यासे हैं, वे हमारी बात सुन लें. न्याय की लड़ाई में अगर अन्याय भी मिले, तो हम उस अन्याय का जवाब प्यार से देंगे. जिसपर राज्य सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आपत्ति जताई और कहा कि यह एक सड़क छाप कविता है. वही इमरान प्रतापगढ़ी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने तर्क देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट कई फैसलों में आलोचना करता है, इसमें गलत क्या है? पिछली सुनवाई में मामले में कोर्ट ने कविता पर गुजरात पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज करने पर सवाल उठाया था.

कोर्ट ने कही ये बात

कोर्ट ने कहा था कि गुजरात हाई कोर्ट ने कविता का अर्थ को ठीक से नही समझा है. यह कविता किसी धर्म के खिलाफ नही है, बल्कि एक संदेश दिया गया है कि यदि कोई हिंसा में लिप्त है तो हम हिंसा में लिप्त नही होंगे. कविता यही संदेश देती है. यह किसी विशेष समुदाय के खिलाफ नही है. गुजरात हाई कोर्ट ने इमरान प्रतापगढ़ी के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने से इनकार कर दिया था.

क्यों कोर्ट ने खारिज की थी याचिका ?

गुजरात हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि चूंकि जांच बहुत प्रारंभिक चरण में है, इसलिए मुझे भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 528 या भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत अपनी शक्तियों का उपयोग करने बक कोई कारण नजर नही आता. यही कहते हुए कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया था. इमरान ने गुजरात के जामनगर में आयोजित एक सामूहिक विवाह कार्यक्रम में शामिल होने के बाद X पर वीडियो शेयर किया था, जिसमें लिखा था-उस रब की कसम हँसते-हँसते इतनी लाशें दफना देंगे. इसके बाद जामनगर पुलिस में शिकायत दर्ज किया गया था.

कई धाराओं के तहत दर्ज किया गया मामला

यह एफआईआर तीन फरवरी को एक एडवोकेट के क्लर्क ने दर्ज कराया था. इसमें आरोप लगाया गया था कि यह सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ रहा है. कांग्रेस नेता प्रतापगढ़ी पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 196 (धर्म, नस्ल आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) और 197 (राष्ट्रीय एकता के लिए प्रतिकूल आरोप, दावे) के तहत मामला दर्ज किया गया था. सांसद ने इस एफआईआर के खिलाफ गुजरात हाई कोर्ट का रुख किया था. हाई कोर्ट ने यह कहते हुए इमरान प्रतापगढ़ी की याचिका को खारिज कर दिया है कि चूंकि आवेदक खुद एक सांसद है और कानून बनाने वाली संसद के सदस्य है, इसलिए उन्हें जिम्मेदारी से काम करना चाहिए. हाई कोर्ट ने यह भी कहा था कि कानूनी प्रक्रिया का सम्मान किया जाना चाहिए.

-भारत एक्सप्रेस
गोपाल कृष्ण

Recent Posts

आडंबरी गुरुओं पर करारा तमाचा! ‘हनुमान अंश’ ने खोला सच, जानिए कौन है असली और फरेबी संत?

Hanuman Ansh Movie: 'हनुमान अंश' फिल्म ने याद दिलाए नीब करौरी बाबा और ब्रज के…

11 minutes ago

DCAC में भाषा और डिजिटल क्रांति का संगम: ‘डिजिटल जगत में भारतीय भाषाएं’ पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न

दिल्ली यूनिवर्सिटी के DCAC में ‘डिजिटल जगत में भारतीय भाषाएं: नूतन विमर्श का निर्माण’ विषय…

14 minutes ago

​हिटमैन का ‘जिगरी’ गब्बर: 350 रन का प्रेशर और वो एक हंसी… रोहित शर्मा ने सुनाया दिल छू लेने वाला किस्सा

Rohit Sharma Shikhar Dhawan Friendship: रोहित शर्मा और शिखर धवन की ओपनिंग जोड़ी ने मैदान…

29 minutes ago

JPSC परीक्षा मामला: सुप्रीम कोर्ट ने CBI जांच वाली याचिका दूसरी बेंच को ट्रांसफर की, 5 अक्टूबर को सुनवाई

झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) परीक्षा में गड़बड़ियों की CBI जांच वाली याचिका को सुप्रीम…

48 minutes ago