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बंगाल में महाराष्ट्र वाला खेला! विधायकों की हो गई सीक्रेट मीटिंग, क्या दीदी के हाथ से छिन जाएगी TMC की कमान?

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) अब तक के अपने सबसे बड़े और गंभीर आंतरिक संकट के चक्रव्यूह (TMC Internal Crisis) में फंस गई है. दरअसल राजनीतिक गलियारों में इस वक्त सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न तैर रहा है कि क्या बंगाल में भी महाराष्ट्र जैसा ‘महा-खेला’ होने जा रहा है? क्या ममता बनर्जी का हश्र भी उद्धव ठाकरे और शरद पवार जैसा होने वाला है?

बता दें कि यह आशंकाएं इसलिए मजबूत हो रही हैं क्योंकि पार्टी से निष्कासित और असंतुष्ट नेताओं ने कोलकाता के विधायक हॉस्टल में कई सीक्रेट बैठकें शुरू कर दी हैं, जिससे ‘असली तृणमूल’ के गठन और दीदी के हाथ से कमान छिनने की अटकलें तेज हो गई हैं.

दो विधायकों की बलि के बाद भड़की अंदरूनी आग(TMC Internal Crisis)

इस पूरे सियासी बवंडर की शुरुआत तब हुई जब टीएमसी नेतृत्व ने उलुबेरिया पूर्व से विधायक ऋतब्रत बनर्जी और एंटाली के विधायक संदीपन साहा को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में सीधे सस्पेंड कर दिया. इन दोनों विधायकों ने पार्टी के अंदर चल रहे एक प्रस्ताव में फर्जी हस्ताक्षर (फर्जी दस्तखत) का गंभीर आरोप लगाया था.

संदीपन साहा ने खुलकर कहा कि जो नेता बैठक में थे ही नहीं, उनके साइन भी फाइलों में कर दिए गए. इस कार्रवाई के बाद बगावत दबने के बजाय और भड़क गई है और निलंबित प्रवक्ता रिजू दत्ता जैसे नेता लगातार शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं.

‘असली तृणमूल’ के नाम पर पर्दे के पीछे से खेल

अंदरूनी सूत्रों का दावा है कि इस वक्त टीएमसी के करीब 15 से 20 विधायक इन बागी गुटों के सीधे संपर्क में हैं, जो पार्टी के भीतर एक मजबूत ‘दबाव समूह’ (Pressure Group) बनाकर ममता-अभिषेक की जोड़ी को चुनौती दे रहे हैं. महाराष्ट्र की तर्ज पर ही यहां भी ‘असली तृणमूल’ के नाम पर एक नया राजनीतिक विकल्प या मोर्चा तैयार करने की गुप्त रणनीतियां बनाई जा रही हैं. जिस तरह साल 2022 में एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे को और अजित पवार ने शरद पवार को पटखनी देकर उनकी पार्टियां और सिंबल छीन लिए थे, ठीक वैसी ही पटकथा के संकेत अब कोलकाता में दिखाई देने लगे हैं.

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खुद ममता बनर्जी ने स्वीकारा सबसे बड़ा खतरा?

हैरानी की बात यह है कि खुद टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने भी इस खतरे (TMC Internal Crisis) को भांप लिया है. उन्होंने हाल ही में सार्वजनिक मंच से स्वीकार किया कि तृणमूल कांग्रेस को कमजोर करने और पूरी पार्टी को दोफाड़ करने की एक बहुत बड़ी ‘संगठित कोशिश’ चल रही है.

दीदी ने जमीनी कार्यकर्ताओं को हाई-अलर्ट पर रहने की हिदायत देते हुए कहा कि पार्टी कुछ नेताओं के बिना भी आगे बढ़ सकती है. हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बगावत को सफल बनाने के लिए बड़ी संख्या की जरूरत होगी, लेकिन जिस तरह से दीदी के खेमे में बेचैनी है, उससे साफ है कि बंगाल की सत्ता की कमान अब एक नाजुक मोड़ पर खड़ी है.

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-भारत एक्सप्रेस

Rohit Agrawal

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