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यूपी : किसान ने किया कमाल, नयी तकनीक से उगाया 16 फीट ऊंचा गन्ना

मेरठ- कृषि के क्षेत्र में  अब विज्ञान और तकनीक के माध्यम से खेती पर अधिक जोर दिया जाता है. अच्छी फसल के लिए बेहतर मौैसम के साथ-साथ उचित तकनीक भी बहुत जरूरी है. इन दिनों मेरठ में गन्ना उत्पादक चंद्रहास की फसल शहर में खूब चर्चा बटोर रही है. इस बार किसानों ने गन्ने की अद्भुद फसल पैदा की है. इस बार गन्ने की खेती से आमतौर पर होने वाले फायदे से ज्यादा फायदे का संभावना जताई जा रही है.

किसानों ने इस बार गन्ने की खेती के लिए दूसरी तकनीक का इस्तेमाल किया था. गन्ने के लिए की जाने वाली इस तकनीक को ट्रेंच तकनीक के नाम से जाना जाता है. इस आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करके मेरठ के किसानों नेे  चंद्रहास के खेत में सामान्य से 5 से 7 फीट लंबे गन्ने के बजाय 16 फीट के गन्ने उगाए हैं. इससे किसानों को दोगुना फायदा मिलने की उम्मीद है. इससे गन्ना किसानों की आय  में वृद्धि भी होगी.

ट्रेंच तकनीक गन्नों की फसलों में लाएगा क्रांति

गन्ने के फसलों में बढ़ोतरी के लिए किसान ट्रेंच तकनीक का उपयोग कर रहे हैं. उत्पादन  की क्वालिटी औऱ क्वाटिंंटी के लिहाज से यह काफी अच्छी साबित हो रही है. किसानों का कहना है कि. इस साल ट्रेंच तकनीक का इस्तेमाल करने से उपज असाधारण रूप से काफी अच्छी रही है. उन्होंने बताया कि क्योंकि  पौधे की जड़ें गहरी हो गई हैं, इसलिए गन्नों की ऊंचाई भी बढ़ गई है.

गन्ना उत्पादन की इस नई तकनीक पर जिला  गन्ना अधिकारी दुष्यंत ने कहा कि ट्रेंच तकनीक गन्ने की खेती में क्रांति ला सकती है. इस तकनीक से गन्ना किसानों को दोगुना फायदा मिलेगा. उन्होंने तकनीक की खासियत के बारे में बात करते हुए बताया कि ट्रेंच तकनीक के इस्तेमाल से गन्नों की  दोहरी फसल भी की जा सकती है. ऐसा इसलिए क्योंकि गन्ना का उत्पादन करने वाले  किसान इसके साथ-साथ अन्य चीजों का उत्पादन जैसे  सब्जियों और फूलों की भी खेती कर सकते हैं. साथ-साथ उगा सकते हैं.

बता दें किसान हमेशा से परंपरागत तरीके से ही गन्ने की बुवाई करते हैं. लेकिन अब कृषि को अधिक बढ़ावा देने और इसके उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता को दोगुना करने के उद्देश्य से  इसमें लगातार तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है. गन्ना किसान अब ट्रेंच विधि से गन्ने की बुवाई करके ज्यादा पैदावार कर सकते हैं. जानकारी के अनुसार इस गन्ने के उत्पादन करने के लिए इस्तेमाल की जा रही इस नई तकनीक में किसानों को फसल लगाते समय ज्यादा पानी लगाने की जरूरत नहीं पड़ती है.

 

-आईएएनएस/ भारत एक्सप्रेस

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