US Israel Iran Conflict: मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच छिड़े विनाशकारी युद्ध को 30 दिन बीत चुके हैं. एक तरफ पाकिस्तान में शांति वार्ता की मेज सज रही है, तो दूसरी तरफ ग्राउंड पर बमबारी जारी है. इस बीच ईसाई समुदाय के सबसे बड़े धर्मगुरु पोप लियो (14वें) ने युद्ध भड़काने वाले नेताओं पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है. रविवार को ‘पाम संडे’ के पवित्र अवसर पर सेंट पीटर स्क्वायर में हजारों लोगों को संबोधित करते हुए पोप ने स्पष्ट कर दिया कि धर्म की आड़ में युद्ध को सही नहीं ठहराया जा सकता.
पोप लियो ने यीशु मसीह को “शांति का राजा” बताते हुए कहा कि यीशु ने हमेशा हिंसा के बजाय विनम्रता और त्याग को चुना. उन्होंने धार्मिक ग्रंथों का हवाला देते हुए कड़े लहजे में कहा कि ईश्वर उन नेताओं की प्रार्थनाओं को सिरे से खारिज कर देता है, जो युद्ध शुरू करते हैं. बाइबिल की एक बेहद सख्त पंक्ति का जिक्र करते हुए पोप ने चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि भले ही तुम कितनी भी प्रार्थनाएं करो, मैं नहीं सुनूंगा, क्योंकि तुम्हारे हाथ खून से सने हुए हैं.
भले ही पोप लियो ने अपने संबोधन में किसी भी विश्व नेता का सीधे तौर पर नाम नहीं लिया, लेकिन कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि उनका यह सीधा निशाना अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर था. हाल के हफ्तों में पोप ने ईरान युद्ध और अंधाधुंध हवाई हमलों की लगातार कड़ी आलोचना की है. उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी देश या नेता भगवान के नाम पर युद्ध को उचित नहीं ठहरा सकता.
पोप की इस नाराजगी के पीछे हाल ही में कुछ अमेरिकी अधिकारियों द्वारा दिए गए भड़काऊ बयान माने जा रहे हैं. दरअसल, 28 फरवरी को ईरान पर हुए संयुक्त अमेरिका-इजरायल हमलों को सही ठहराने के लिए अमेरिकी अधिकारियों ने ‘ईसाई शब्दावली’ का इस्तेमाल किया था.
हाल ही में अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने एक प्रार्थना सभा में दुश्मनों के खिलाफ “जबरदस्त हिंसक कार्रवाई” के लिए प्रार्थना करने की बात कही थी. हेगसेथ ने युद्ध को एक ‘ईसाई राष्ट्र’ द्वारा अपने शत्रुओं को सैन्य शक्ति से पराजित करने के प्रयास के रूप में पेश किया था. माना जा रहा है कि पाम संडे के मौके पर पोप लियो का यह बयान हेगसेथ और ट्रंप प्रशासन के उसी ‘धार्मिक दांव’ का करारा जवाब है.
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पाम संडे, जो ईस्टर से पहले साल के सबसे पवित्र सप्ताह (होली वीक) की शुरुआत का प्रतीक है, के अवसर पर पोप ने दुनिया से शांति का रास्ता अपनाने की अपील की. उन्होंने कहा कि यीशु का गधे पर बैठकर यरूशलेम में प्रवेश करना विनम्रता और युद्ध के अस्वीकार का प्रतीक था. पोप ने विश्व समुदाय से तत्काल युद्धविराम लागू करने और युद्ध पीड़ितों के साथ खड़े होने का आग्रह किया है.
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