VB-G RAM G Bill: मोदी सरकार 20 साल पुरानी मनरेगा योजना को खत्म करने जा रही है. संसद के शीतकालीन सत्र में विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार एंड अजीविका मिशन (ग्रामीण) बिल 2025 पेश किया जाएगा. इसे छोटे नाम से VB-G RAM G बिल कहा जा रहा है. यह नया कानून ग्रामीण परिवारों को 125 दिन का मजदूरी रोजगार देगा. पहले मनरेगा में 100 दिन की गारंटी थी. सरकार का कहना है कि यह बदलाव विकसित भारत 2047 के विजन से जुड़ा है. नई योजना से रोजगार के साथ मजबूत ग्रामीण ढांचा बनेगा.
VB-G RAM G बिल मनरेगा की जगह लेगा. यह ग्रामीण घरों के वयस्क सदस्यों को अकुशल मजदूरी काम के लिए 125 दिन का कानूनी अधिकार देगा. काम चार मुख्य क्षेत्रों में होंगे. पहला पानी की सुरक्षा जैसे तालाब और जल संरक्षण. दूसरा ग्रामीण सड़क और बुनियादी ढांचा. तीसरा आजीविका से जुड़े काम जैसे गोदाम और बाजार. चौथा मौसम की मार से बचाव के काम. सभी काम विकसित भारत नेशनल रूरल इंफ्रास्ट्रक्चर स्टैक में जुड़ेंगे. इससे राष्ट्रीय स्तर पर योजना बनेगी. सरकार कहती है कि मनरेगा 2005 के लिए बनी थी. अब ग्रामीण भारत बदल गया है. गरीबी कम हुई है. डिजिटल पहुंच बढ़ी है. पुरानी योजना में पैसा गलत इस्तेमाल और फर्जी काम की शिकायतें थीं. इसलिए नया कानून जरूरी है.
नई योजना में कई बड़े बदलाव हैं. रोजगार के दिन 100 से बढ़कर 125 हो गए. इससे परिवारों की कमाई ज्यादा होगी. काम बिखरे नहीं होंगे. चार मुख्य क्षेत्रों पर फोकस होगा. इससे मजबूत संपत्ति बनेगी. ग्राम पंचायतें खुद विकसित ग्राम पंचायत प्लान बनाएंगी. यह प्लान पीएम गति शक्ति जैसे राष्ट्रीय सिस्टम से जुड़ेगा. फंडिंग भी बदल रही है. पहले मनरेगा में मजदूरी का पूरा पैसा केंद्र देता था. अब यह सेंट्रली स्पॉन्सर्ड स्कीम होगी. सामान्य राज्यों में 60:40 अनुपात होगा. यानी केंद्र 60 प्रतिशत और राज्य 40 प्रतिशत देंगी. पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों में 90:10 होगा. इससे राज्य ज्यादा जिम्मेदारी लेंगे. गलत इस्तेमाल कम होगा.
नई योजना किसानों की मदद करेगी. पीक सीजन में जैसे बुवाई और कटाई के समय 60 दिन तक काम रोका जा सकेगा. इससे खेतों में मजदूर मिलेंगे. मजदूरी महंगी नहीं होगी. पानी से जुड़े काम प्राथमिकता पर होंगे. इससे सिंचाई बेहतर होगी. अमृत सरोवर जैसे पहले बनाए 68 हजार तालाबों का फायदा दिख रहा है. सड़क और गोदाम बनने से फसल बेचना आसान होगा. मौसम की मार से बचाव के काम फसल सुरक्षित रखेंगे. कुल मिलाकर किसानों को मजदूर और बेहतर ढांचा मिलेगा.
मजदूरों को ज्यादा फायदा होगा. 125 दिन का मतलब 25 प्रतिशत ज्यादा कमाई. काम पहले से प्लान होगा. विकसित ग्राम पंचायत प्लान से पता चलेगा कि कहां काम मिलेगा. पेमेंट डिजिटल होगा. आधार और बायोमेट्रिक से चोरी रुकेगी. पहले से 99.94 प्रतिशत पेमेंट डिजिटल हैं. अगर काम नहीं मिला तो बेरोजगारी भत्ता मिलेगा. मजदूर खुद बनाए ढांचे से फायदा लेंगे जैसे बेहतर सड़क और पानी. महिलाओं की भागीदारी पहले से ज्यादा है. यह जारी रहेगी.
फंडिंग में बदलाव क्यों और क्या असर?
पहले मनरेगा डिमांड बेस्ड थी. जितनी जरूरत उतना पैसा. अब नॉर्मेटिव फंडिंग होगी. केंद्र हर साल राज्यवार तय राशि देगा. यह ज्यादातर सरकारी योजनाओं जैसा है. सरकार कहती है कि इससे प्लानिंग आसान होगी. 2024-25 में सही अनुमान लगा. आपदा में अतिरिक्त मदद मिलेगी. अगर काम नहीं दिया तो भत्ता देना पड़ेगा. इससे 125 दिन की गारंटी मजबूत रहेगी. लेकिन विपक्ष कहता है कि इससे अधिकार कमजोर होगा. राज्य पर बोझ बढ़ेगा.
पुरानी योजना में क्या समस्याएं थीं?
मनरेगा में कई सुधार हुए. महिलाओं की भागीदारी 48 से 56 प्रतिशत हुई. आधार लिंक 76 लाख से 12 करोड़. डिजिटल पेमेंट 37 से 99 प्रतिशत. लेकिन समस्याएं बनी रहीं. पश्चिम बंगाल में फर्जी काम मिले. कई राज्यों में पैसा खर्च हुआ लेकिन काम नहीं दिखा. मशीन इस्तेमाल जहां मजदूर चाहिए थे. 2024-25 में 193 करोड़ का गबन. महामारी के बाद सिर्फ 7 प्रतिशत परिवारों ने 100 दिन पूरे किए. इन समस्याओं से नई योजना जरूरी हुई. अब एआई से धोखा पकड़ा जाएगा. सोशल ऑडिट मजबूत होगा. जीपीएस मॉनिटरिंग होगी.
पारदर्शिता और सुरक्षा के नए उपाय
नई योजना में पारदर्शिता ज्यादा होगी. AI धोखा पकड़ेगा. केंद्र और राज्य स्टीयरिंग कमिटी निगरानी करेंगी. पंचायतों की भूमिका बढ़ेगी. जीपीएस और मोबाइल मॉनिटरिंग होगी. रीयल टाइम डैशबोर्ड होंगे. हर हफ्ते सार्वजनिक जानकारी दी जाएगी. हर ग्राम पंचायत में साल में दो बार सोशल ऑडिट होगा. इससे पैसा सही जगह लगेगा.
विपक्ष इस बदलाव का विरोध कर रहा है. कांग्रेस कहती है कि यह मनरेगा का नाम बदलना और कमजोर करना है. गांधी जी का नाम हटाना गलत है. अधिकार आधारित योजना को बजट आधारित बना रहे हैं. राज्य पर बोझ डाल रहे हैं. सीपीएम सांसद जॉन ब्रिटास ने कहा कि यह अधिकार खत्म कर रहा है. राज्य मजबूर होंगे. लेकिन सरकार कहती है कि यह आधुनिक और बेहतर है. ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी. प्रवासी मजदूरी कम होगी.
यह बिल संसद में पेश होगा. पास होने पर मनरेगा खत्म हो जाएगी. नई योजना लागू होगी. ग्रामीण भारत के लिए यह बड़ा बदलाव है. सरकार इसे विकास की दिशा में कदम बता रही है. विपक्ष इसे अधिकार छीनना कह रहा है. आने वाले दिन बताएंगे कि ग्रामीण मजदूरों और किसानों को कितना फायदा होता है.
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