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MGNREGA

कमजोर मॉनसून और ग्रामीण संकट के बीच रोजगार गारंटी योजना के तहत काम मिलने में भारी गिरावट आई है. नए कानून VB-GRAM G के लागू होने के बीच यह स्थिति चिंताजनक है.

VB-G RAM G scheme: केंद्र सरकार 1 जुलाई से VB-G RAM G योजना लागू करने जा रही है. बिहार, मध्य प्रदेश और झारखंड ने इस पर वित्तीय बोझ को लेकर चिंता जताई है.

बजट सत्र से पहले कांग्रेस ने संसद में सरकार को घेरने की पूरी रणनीति तय कर ली है. सोनिया गांधी के आवास पर हुई अहम बैठक में मनरेगा, जातिगत जनगणना, विदेश नीति, गिरता रुपया, पर्यावरण, जम्मू-कश्मीर का राज्य दर्जा और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने का फैसला लिया गया है.

मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने गृह मंत्री अमित शाह से मिलकर अमरावती को राजधानी के रूप में वैधानिक दर्जा देने और नई केंद्रीय योजनाओं के वित्तीय बोझ को कम करने का आग्रह किया है.

कांग्रेस पार्टी ने मनरेगा को बचाने के लिए एक बड़ा राष्ट्रव्यापी आंदोलन 'मनरेगा बचाओ संग्राम' शुरू करने का फैसला किया है. 10 से 29 जनवरी तक चलने वाले इस अभियान के जरिए पार्टी सीधे गांवों और पंचायतों तक पहुंचेगी.

संसद से पारित होकर कानून बन चुके ‘विकसित भारत जी राम जी’ बिल को लेकर सियासी विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. विपक्ष का आरोप है कि यह कानून ग्रामीण रोजगार की गारंटी को कमजोर करता है.

VB G Ram G Act 2025: राष्ट्रपति ने द्रौपदी मुर्मू ने रविवार को 'जी राम जी विधेयक' को दी मंजूरी दे दी है. इसी के साथ अब यह कानून बन गया है. इससे ग्रामीण रोजगार गारंटी 125 दिनों तक बढ़ जाएगी.

आज लोकसभा में VB-G RAM G बिल पास हो गया. विपक्ष के सांसदों ने खूब हंगामा किया और बिल की कॉपी फाड़ दी. मगर, सरकार कामयाब रही, अब यह बिल MGNREGA की जगह लेगा, जो ग्रामीण रोजगार की गारंटी देता है.

जानकारी के लिए बता दें कि मनरेगा को साल 2005 में ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से शुरू किया गया था. इसकी खासियत यह है कि मनरेगा दुनिया के सबसे बड़े रोजगार गारंटी कार्यक्रमों में से एक है. 2022-23 तक इस योजना के तहत करीब 15.4 करोड़ एक्टिव मेंबर रजिस्टर्ड थे. सरकार की ओर से शुरू किए गए इस योजना का उद्देश्य था अधिकार-आधारित सिस्टम के जरिए गरीबी की जड़ को दूर करना.

Vikasit Bharat Bill: केंद्र सरकार ने मनरेगा कानून की जगह नया ‘विकसित भारत- G RAM G’ बिल पेश किया है. विपक्ष ने इसे गरीबों के रोजगार अधिकार पर हमला बताया, जबकि सरकार का कहना है कि यह बदलाव भविष्य की जरूरतों के अनुरूप है.