Vice President Election 2025
Vice President Election 2025: राजनीति की बिसात पर हर चाल एक कहानी कहती है. जब भारत के उपराष्ट्रपति चुनाव की बात हो तो सियासी कहानी और गहरी हो जाती है. एक तरफ एनडीए के उम्मीदवार सी.पी. राधाकृष्णन के पक्ष में संख्या बल का पलड़ा भारी दिख रहा है. वहीं दूसरी तरफ INDIA ब्लॉक के उम्मीदवार सुदर्शन रेड्डी ने भी अपनी तरफ से पूरी ताकत झोंक दी है. ऊंट किस करवट बैठेगा यह तो 9 सितंबर ही पता चलेगा. इस चुनाव को सिर्फ जीत-हार के तराजू में तौलना गलत होगा. यह मुकाबला सिर्फ एक पद के लिए नहीं, बल्कि दोनों गठबंधनों के भीतर आपसी तालमेल और रणनीति की भी परीक्षा है.
उप-राष्ट्रपति चुनाव (vice president election update) के लिए मतदान 9 सितंबर को सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक होगा. मतगणना उसी दिन शाम 6 बजे शुरू होगी. इस चुनाव में एनडीए की ओर से महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन और विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ की ओर से पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज बी सुधर्शन रेड्डी उम्मीदवार हैं. आइये इस चुनाव से जुड़े फैक्ट जानते हैं.
उप-राष्ट्रपति चुनाव के लिए चुनावी प्रक्रिया में राज्यसभा और लोकसभा के सदस्य शामिल होते हैं. इस समय राज्यसभा में 233 निर्वाचित सदस्य हैं. हालांकि, 5 सीटें खाली हैं. वहीं मनोनित सदस्यों की संख्या 12 है. इस प्रकार 240 मत राज्यसभा से गिने जाएंगे. लोकसभा में 543 निर्वाचित सदस्य हैं. हालांकि, अभी 1 सीट खाली है. ऐसे में उप-राष्ट्रपति चुनाव में राज्यसभा से 542 वोट गिने जाएंगे. इस प्रकार दोनों सदनों को मिलाकर 782 वोट हैं. 50%+1 के गणित में बहुमत का आंकड़ा 392 पहुंच जाता है.
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लोकसभा और राज्यसभा मिलाकर जीत के लिए 394 की जरूरत होती है. हालांकि, इस समय दोनों सदनों में मिलाकर 6 सीटें खाली हैं. ऐसे में बहुमत का आंकड़ा 392 पहुंच जाता है. अभी एनडीए को 422 सदस्यों का समर्थन प्राप्त है. यह आंकड़ो जीत के लिए आवश्यक 392 मतों से अधिक है.
जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई को भारत के उपराष्ट्रपति पद से अपना इस्तीफा दे दिया था. यह इस्तीफा तत्काल प्रभाव से लागू हो गया और संविधान के अनुच्छेद 67(ए) के अनुसार प्रस्तुत किया गया. जगदीप धनखड़ 2022 से भारत के उपराष्ट्रपति बने थे. इससे पहले वह 2019 से 2022 तक पश्चिम बंगाल के राज्यपाल थे.
इस चुनाव में भले ही एनडीए का जीतना तय माना जा रहा हो, लेकिन इंडिया ब्लॉक भी अपनी तरफ से कोई कसर नहीं छोड़ रहा है. उनके उम्मीदवार का मुकाबला, जो संवैधानिक मामलों में अपनी स्पष्टवादिता के लिए जाने जाते हैं, न केवल एक सांकेतिक लड़ाई है, बल्कि विपक्ष की एकजुटता को भी प्रदर्शित करती है. यह चुनाव भविष्य की राजनीति का एक आईना भी है, जो यह दिखाएगा कि क्या एकजुटता में बल है या फिर अकेले चना भाड़ नहीं फोड़ सकता.
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