Who is Sujit Sinha? रांची/मधुकर आनंद: कानपुर का चर्चित विकास दुबे कांड तो आपको याद ही होगा, जब यूपी पुलिस की गाड़ी पलटी, गैंगस्टर ने हथियार छीना, भागने की कोशिश की और जवाबी मुठभेड़ में मारा गया. ठीक वैसा ही फिल्मी और सनसनीखेज घटनाक्रम रविवार देर रात झारखंड के जामताड़ा में दोहराया गया. झारखंड के सबसे खूंखार गैंगस्टरों में शुमार और रंगदारी व हत्या के 75 से अधिक मामलों के आरोपी सुजीत सिन्हा का पुलिस एनकाउंटर में अंत हो गया.
साहेबगंज जेल से धनबाद शिफ्ट किए जाने के दौरान सुरक्षा काफिले की गाड़ी का टायर पंचर हुआ, जिसके बाद सुजीत ने पुलिस जवान का हथियार छीनकर भागने और फायरिंग करने की कोशिश की. पुलिस की जवाबी कार्रवाई में वह मौके पर ही ढेर हो गया.
मूल रूप से मेदिनीनगर (पलामू) का रहने वाला सुजीत सिन्हा कोई आम अपराधी नहीं था. उसने अपराध की दुनिया में अपना कदम हजारीबाग के कुख्यात डॉन सुशील श्रीवास्तव के मुख्य शूटर के रूप में रखा था. अपनी आक्रामक कार्यशैली और बेखौफ अंदाज के कारण जल्द ही उसने अपराध की दुनिया में अपनी अलग पहचान बना ली. सुशील श्रीवास्तव के बाद सुजीत ने अपना खुद का गिरोह खड़ा किया और देखते ही देखते पलामू, धनबाद, बोकारो, रामगढ़, रांची, लातेहार और चतरा जैसे जिलों में अपना दबदबा कायम कर लिया.
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75 से अधिक केस दर्ज: सुजीत के खिलाफ हत्या, रंगदारी, अपहरण, आर्म्स एक्ट और गैंग ऑपरेशन के 75 से ज्यादा गंभीर मामले दर्ज थे. अकेले पलामू जिले में ही उस पर 20 से अधिक आपराधिक मामले थे.
जेल से चलाता था गैंग: पलामू के बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड में वह आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा काट रहा था. लेकिन उसकी दहशत ऐसी थी कि जेल की सलाखों के पीछे रहकर भी वह मोबाइल और अपने गुर्गों के माध्यम से पूरा आपराधिक नेटवर्क संचालित कर रहा था.
कोयलांचल में लेवी और रंगदारी: उसका गिरोह मुख्य रूप से कोयला कारोबारियों, रेलवे ठेकेदारों, बिल्डरों और बड़े व्यवसायियों से करोड़ों की लेवी और रंगदारी वसूलने के लिए कुख्यात था.
रविवार शाम कुख्यात सुजीत सिन्हा को सुरक्षा कारणों से साहेबगंज मंडल कारा से धनबाद मंडल कारा स्थानांतरित (शिफ्ट) किया जा रहा था. रात करीब 10 बजे जब पुलिस का कैदी वाहन जामताड़ा जिले के साहिबगंज-गोविंदपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर सुपाईडीह और केंदबोना के पास पहुंचा, तभी अचानक सुरक्षा काफिले की एक गाड़ी का अगला टायर पंचर हो गया.
वाहन पंचर होने के बाद पुलिस टीम जब सुजीत सिन्हा को दूसरे सुरक्षित वाहन में बैठाने की प्रक्रिया कर रही थी, तभी सुजीत ने मौके का फायदा उठाया. उसने एक पुलिस जवान का हथियार (पिस्तौल/राइफल) छीन लिया और अंधेरे का फायदा उठाकर भागने लगा. भागते समय उसने पुलिस टीम पर सीधी फायरिंग शुरू कर दी. पुलिस ने तुरंत मोर्चा संभाला और जवाबी फायरिंग की.
मुठभेड़ में सुजीत सिन्हा को गोलियां लगीं और वह गंभीर रूप से घायल होकर गिर पड़ा. पुलिस उसे तुरंत अस्पताल ले गई, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. जामताड़ा एसपी शंभू कुमार सिंह और एसडीओ अनंत कुमार ने दल-बल के साथ पहुंचकर मुठभेड़ की पुष्टि की.
जामताड़ा में सुजीत सिन्हा के एनकाउंटर ने साल 2009 की उस पुरानी घटना की भी याद ताजा कर दी है, जब दुमका सेंट्रल जेल से धनबाद ले जाने के दौरान जामताड़ा के मिहिजाम (खालसा होटल के पास) में पुलिस ने कुख्यात डॉन भोला पांडेय को एनकाउंटर में मार गिराया था.
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घटना के बाद सोमवार सुबह से ही पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात है. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के दिशा-निर्देशों के तहत आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है. फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं. डॉक्टरों के विशेष मेडिकल बोर्ड से शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है और पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी हो रही है. पूरी मुठभेड़ की मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दे दिए गए हैं.
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