तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बैंक खातों को प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा फ्रीज किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) ने जांच एजेंसी से एक अहम सवाल पूछा है. सुप्रीम कोर्ट ने ईडी से पूछा है कि क्या पार्टी के फ्रीज किए गए खातों में से दैनिक और रोजमर्रा के राजनीतिक खर्चों के संचालन के लिए एक सीमित राशि अदालत द्वारा नियुक्त प्रशासक (अड्मिनीस्ट्रेटर) को जारी की जा सकती है?
सुप्रीम कोर्ट के माननीय न्यायाधीश जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस पी.बी. वराले की दो सदस्यीय खंडपीठ टीएमसी द्वारा दायर इस विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई कर रही है. सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले पर आगामी 11 अगस्त 2026 को अगली सुनवाई करेगा. गौरतलब है कि कलकत्ता हाई कोर्ट द्वारा टीएमसी के खातों पर लगी रोक को पूरी तरह हटाने से जुड़ी अंतरिम राहत देने से इनकार करने के बाद पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है.
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने संदिग्ध वित्तीय लेनदेन के मामले में टीएमसी के तीन प्रमुख बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है, जिनमें कुल ₹450 करोड़ की राशि जमा है. एजेंसी का आरोप है कि टीएमसी के एक बैंक खाते से करीब ₹133.84 करोड़ की भारी-भरकम राशि ‘केयरवेल एविएशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड’ (Carewell Aviation India Pvt Ltd) को हस्तांतरित की गई.
ईडी का दावा है कि यह पूरी रकम वित्तीय अनियमितता, धन के गलत इस्तेमाल और मनी लॉन्ड्रिंग (पैसे को सफेद करने) के गंभीर अपराध से जुड़ी हुई है. शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि एविएशन और ट्रैवल कंपनियों के माध्यम से ₹150 करोड़ से अधिक के फंड को अवैध रूप से इधर-उधर किया गया है.
इससे पहले, कलकत्ता हाई कोर्ट ने टीएमसी के फ्रीज किए गए तीनों बैंक खातों को पार्टी के रोजमर्रा के प्रशासनिक खर्चों के लिए इस्तेमाल करने की सशर्त अनुमति प्रदान की थी. हाई कोर्ट ने टीएमसी के सामने शर्त रखी थी कि खातों का संचालन कोर्ट द्वारा नियुक्त किसी तटस्थ अधिकारी/प्रशासक की कड़ी निगरानी में ही किया जाएगा.
यह अंतरिम आदेश 30 सितंबर 2026 तक प्रभावी रखने का निर्देश दिया गया था. कलकत्ता हाई कोर्ट ने पुलिस/जांच एजेंसियों द्वारा जल्दबाजी में खातों को सील करने की कार्रवाई पर सवाल उठाए थे और कहा था कि असली टीएमसी गुट का विवाद फिलहाल भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के समक्ष लंबित है, तथा इस वित्तीय आदेश का उस राजनीतिक विवाद पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा.
सुप्रीम कोर्ट में टीएमसी की ओर से पेश हुए देश के वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत के समक्ष पुरजोर दलीलें पेश कीं. उन्होंने कहा कि बैंक खातों पर डेबिट रोक (Debit Freeze) लगा दिए जाने के कारण एक राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल का सामान्य और दैनिक कामकाज पूरी तरह ठप हो गया है.
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जांच एजेंसियों की यह कार्रवाई भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) [वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता] और अनुच्छेद 19(1)(d) [अबाध आवागमन/संगठन संचालन] का सीधा उल्लंघन करती है. चुनावों और राजनीतिक गतिविधियों के दौरान राजनीतिक दलों के लिए ‘समान अवसर’ (Level Playing Field) के सिद्धांत को यह कार्रवाई कमजोर करती है.
शुरुआती शिकायतें पूरी तरह से अस्पष्ट
डॉ. सिंघवी ने तर्क दिया कि शुरुआती शिकायतें पूरी तरह से अस्पष्ट हैं और प्राथमिक एफआईआर (FIR) दर्ज होने के महज दो दिनों के भीतर पार्टी के सभी खातों को सील कर देना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और पूर्वाग्रह से ग्रसित कदम है. सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार व एजेंसियों के वकीलों से भी पूछा कि शिकायत दर्ज होते ही बैंक खातों को तत्काल फ्रीज करने का ठोस वैधानिक आधार क्या था. अब 11 अगस्त को होने वाली सुनवाई में ईडी के जवाब पर सभी की नजरें टिकी होंगी.
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