VHP Alok Kumar On Champat Rai: अयोध्या के राम मंदिर परिसर में हुए बहुचर्चित चंदा और चढ़ावा चोरी मामले के बाद देश के कूटनीतिक और धार्मिक कॉरिडोर्स में सियासी भूचाल आया हुआ है. इस महा-विवाद के बीच, राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के अचानक आए इस्तीफे ने हर किसी को हैरान कर दिया. इस हाई-प्रोफाइल इस्तीफे के बाद से ही लगातार यह सवाल गूंज रहा है कि आखिर चंपत राय को यह बड़ा कदम क्यों उठाना पड़ा?
इस पूरे प्रकरण और इस्तीफे की इनसाइड स्टोरी को लेकर विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतरराष्ट्रीय कार्याध्यक्ष आलोक कुमार का पहला और बेहद बेबाक बयान सामने आया है. आलोक कुमार ने स्पष्ट किया है कि चंपत राय का यह इस्तीफा किसी दबाव का नतीजा नहीं, बल्कि एक बेहद साहसी और नैतिक कदम है.
अक्सर देखा जाता है कि ऐसे बड़े विवादों के बाद इस्तीफे राजनीतिक दबाव या आलाकमान के निर्देश पर होते हैं, लेकिन आलोक कुमार ने इस धारणा को सिरे से खारिज कर दिया. वीएचपी अध्यक्ष ने इस कदम की क्रोनोलॉजी और मुख्य कारणों को स्पष्ट करते हुए कहा कि कोई मजबूरी या दबाव नहीं: चंपत राय पर संगठन, सरकार या संघ परिवार की तरफ से इस्तीफा देने का रत्ती भर भी दबाव या मजबूरी नहीं थी. किसी ने भी उनसे पद छोड़ने के लिए नहीं कहा था.
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आलोक कुमार के मुताबिक, चंपत राय ने यह निर्णय पूरी तरह अपनी अंतरात्मा की आवाज पर लिया. उनका मानना था कि यदि वे महासचिव के इतने रसूखदार पद पर बने रहते, तो पुलिस और एसआईटी (SIT) की चल रही जांच प्रभावित होने का अंदेशा बना रहता. जांच पूरी तरह स्वतंत्र, निष्पक्ष और बिना किसी प्रभाव के हो सके, इसी मर्यादा को कायम रखने के लिए उन्होंने खुद आगे बढ़कर अपना त्यागपत्र सौंप दिया, जो कि सार्वजनिक जीवन में एक बेहद साहसी कदम है.
इस चंदा चोरी को बेहद शर्मनाक बताते हुए आलोक कुमार ने कहा कि जिन 65 करोड़ लोगों ने अपनी गाढ़ी कमाई से प्रभु श्री राम के भव्य मंदिर निर्माण के लिए समर्पण निधि दी थी, इस घटना से उन सभी का दिल गहराई से दुखा है. उन्होंने साफ किया कि भगवान के पैसे के गलत इस्तेमाल को लेकर संघ परिवार और सरकार बेहद गंभीर है और किसी भी दोषी को बचाने का प्रयास कतई नहीं किया जाएगा. चाहे ट्रस्ट के भीतर का कोई पदाधिकारी हो या बाहर का कोई रसूखदार व्यक्ति, जो भी इस पाप में शामिल पाया जाएगा, उसे कानून के तहत सख्त से सख्त सजा मिलकर रहेगी.
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हालांकि, वीएचपी प्रमुख ने एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक दूरी भी स्पष्ट की. उन्होंने कहा कि साल 2019 में सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला आने के बाद से ही विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने खुद को मंदिर के निर्माण और दैनिक प्रबंधन के संचालन से पूरी तरह अलग कर लिया था. प्राण प्रतिष्ठा के मुख्य मंच पर भी वीएचपी का कोई नेता मौजूद नहीं था. इसलिए, इस प्रबंधन स्तर की चूक के लिए पूरी वीएचपी या संगठन को उत्तरदायी ठहराना तार्किक नहीं है.
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