Delimitation Lok Sabha Seats: केंद्र सरकार ने देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में अब तक का सबसे बड़ा बदलाव करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं. दरअसल महिला आरक्षण (Women Reservation Bill 2026) को हकीकत बनाने के लिए सरकार ने सांसदों को संविधान संशोधन बिल की प्रति सौंप दी है.
कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल द्वारा लोकसभा में पेश किए जाने वाले इस बिल का उद्देश्य न केवल महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में 33% आरक्षण देना है बल्कि दशकों से रुकी हुई ‘परिसीमन’ (Delimitation) की प्रक्रिया को भी फिर से शुरू करना है. बता दें कि यदि यह बिल पास होता है, तो भारत की राजनीति का स्वरूप पूरी तरह बदल जाएगा.
इस प्रस्तावित विधेयक का सबसे चौंकाने वाला पहलू लोकसभा सीटों की संख्या में वृद्धि है. दरअसल वर्तमान में लोकसभा की सीटें 1971 की जनगणना के आधार पर तय हैं, लेकिन नए नियमों के तहत सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 करने की योजना है. इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 81 में संशोधन का प्रस्ताव है ताकि मौजूदा जनसंख्या के हिसाब से प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके.
विधेयक के मुताबिक, सदस्यों की अधिकतम संख्या 850 तक जा सकती है, जिसमें राज्यों के लिए 815 और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 35 सीटें आरक्षित हो सकती हैं. यह कदम बढ़ती आबादी और चुनावी क्षेत्रों में असंतुलन को दूर करने के लिए उठाया जा रहा है.
विधेयक में एक उच्च-स्तरीय ‘परिसीमन आयोग’ बनाने का प्रावधान है, जिसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त या कार्यरत न्यायाधीश करेंगे. यह आयोग नई सीमाओं का निर्धारण करेगा और नवीनतम जनगणना के आंकड़ों के आधार पर यह तय करेगा कि कौन सी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी.
15 साल का कोटा: महिला आरक्षण शुरुआती तौर पर 15 वर्षों के लिए लागू किया जाएगा.
SC/ST आरक्षण: आरक्षित सीटों में अनुसूचित जाति और जनजाति की महिलाओं के लिए भी विशेष कोटा शामिल होगा.
रोटेशन सिस्टम: महिलाओं के लिए सीटें रोटेशन के आधार पर बदली जाएंगी, ताकि हर क्षेत्र को प्रतिनिधित्व का मौका मिले.
संविधान संशोधन जैसे महत्वपूर्ण विधेयक को पास कराने के लिए लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत (362 वोट) की आवश्यकता है. वर्तमान में एनडीए के पास 293 सांसद हैं, यानी सरकार को 69 और वोटों की जरूरत होगी. हालांकि, सरकार को भरोसा है कि महिला सशक्तीकरण से जुड़े इस बिल (Women Reservation Bill 2026) का विपक्ष सीधे तौर पर विरोध नहीं कर पाएगा.
यह भी बताते चलें कि अक्सर ऐसी स्थितियों में विपक्षी दल वोटिंग के दौरान सदन से बाहर (वॉकआउट) चले जाते हैं, जिससे सदन में मौजूद सदस्यों की संख्या कम हो जाती है और दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा हासिल करना आसान हो जाता है. एक बार बिल पास होकर गजट में प्रकाशित हो गया, तो इसके बाद होने वाले चुनाव नए परिसीमन और आरक्षण के आधार पर ही होंगे.
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-भारत एक्सप्रेस
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