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आज ही के दिन विश्व इतिहास में भारत ने पोलो खेल में लहराया था अपना परचम

जयपुर के एचएच सवाई पद्मनाभ सिंह, जिन्हें आमतौर पर पाचो के नाम से जाना जाता है, भारतीय राष्ट्रीय पोलो टीम के वर्तमान सदस्य हैं और पूरे भारत में पोलो के विकास के बारे में भावुक हैं. महाराजा ने 2017 में एफआईपी वर्ल्ड पोलो चैम्पियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व किया और टूर्नामेंट में सफलता के लिए प्रयास जारी रखा. पांचो भारत का प्रतिनिधित्व करने और वह ट्रॉफी घर ले जाने के अलावा और कुछ नहीं चाहेंगे जो उनके दादाजी, दिवंगत महामहिम महाराजा भवानी सिंह जी ने 1987 में एफआईपी को दान की थी, जब टूर्नामेंट पहली बार बनाया गया था.

पोलो के खेल से भारत को किसने अवगत कराया

पोलो, जैसा कि अब खेला जाता है, 1860 के दशक के दौरान भारत (मणिपुर) में तैनात ब्रिटिश कैवेलरी रेजिमेंट और चाय बागान मालिकों द्वारा भारत और दुनिया को पेश किया गया था, लेकिन यह तिब्बती-बर्मन साम्राज्य के निर्वासित राजकुमारों द्वारा खेले जाने वाले खेल से लिया गया है. 1819 और 1826 के बीच कभी-कभी देशी टट्टुओं पर मणिपुर (अब भारत का एक राज्य) का.

कब बनाये गए पोलो के नियम

प्रथम विश्व युद्ध के बाद खेल के लिए अंतर्राष्ट्रीय नियम बनाए गए और अब पोलो हर जगह इन्हीं नियमों के तहत खेला जाता है. इंडियन पोलो एसोसिएशन का गठन 1892 में हुआ था. उस समय की कुछ प्रमुख टीमें अलवर, भोपाल, बीकानेर, जयपुर, हैदराबाद, पटियाला, जोधपुर, किशनगढ़ और कश्मीर थीं.
ब्रिटिश और ब्रिटिश भारतीय सेना की अधिकांश घुड़सवार रेजीमेंटों ने भी टीमें तैनात कीं. इनमें से प्रमुख थे सेंट्रल इंडिया हॉर्स (CHI), प्रिंस अल्बर्ट विक्टर ओन कैवेलरी (PAVO’s Cav), इनस्किलिंग ड्रैगून गार्ड्स, 10वीं रॉयल हुसर्स, 15वीं लांसर्स और 17/21वीं लांसर्स.

पोलो में भारत ने कब लहराया अपना परचम

25 अगस्त 1957 को, भारतीय राष्ट्रीय पोलो टीम ने विश्व चैम्पियनशिप टूर्नामेंट जीता. भारत आधुनिक पोलो का जन्मस्थान है। पहला पोलो क्लब 1834 में असम के सिलचर में स्थापित किया गया था. 1800 से 1910 के दशक तक, भारतीय रियासतों का प्रतिनिधित्व करने वाली कई टीमें अंतरराष्ट्रीय पोलो परिदृश्य पर हावी रहीं.

कब हुई इंडियन पोलो एसोसिएशन (IPA) की स्थापना

इंडियन पोलो एसोसिएशन (आईपीए) की स्थापना 1892 में हुई थी, जिसने दूसरे विश्व युद्ध के फैलने और घुड़सवार सेना इकाइयों के मशीनीकरण के कारण 17 साल के अंतराल के बाद 1956 में भारतीय पोलो चैंपियनशिप को पुनर्जीवित किया था. भारतीय पोलो टीम ने 1957 में फ्रांस में विश्व चैम्पियनशिप में भाग लिया और टूर्नामेंट जीता. इससे देश में पोलो के प्रति रुचि को पुनर्जीवित करने में काफी मदद मिली. वर्ष 1992 में आईपीए ने 100 वर्ष पूरे किए और तब से देश में पोलो के प्रति रुचि बढ़ती जा रही है. आज हमारे 33 पोलो क्लब आईपीए के साथ पंजीकृत हैं.

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-भारत एक्सप्रेस

Pratyush Priyadarshi

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