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पटना हाईकोर्ट के एडवोकेट कुमारेश सिंह और उज्ज्वल राज ने ED के डिप्टी और असिसटेंट डायरेक्टर के गैर-कानूनी और अपमानजनक बर्ताव को लेकर CJI गवई को लिखा पत्र

पटना हाईकोर्ट के दो एडवोकेट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) के डिप्टी और असिसटेंट डायरेक्टर के रवैये को लेकर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई को पत्र लिखा है. एडवोकेट कुमारेश सिंह और उज्ज्वल राज ने ED के पटना ऑफिस के डिप्टी डायरेक्टर और असिस्टेंट डायरेक्टर का वकीलों के प्रति गैर-कानूनी, अनुशासनहीन, अपमानजनक और आक्रामक व्यवहार पर पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की है.

एडवोकेट कुमारेश सिंह और उज्ज्वल राज ने CJI B R Gavai को लिखा कि बहुत दुख की बात है कि सरकारी कर्मचारी वकीलों के साथ कैसा बर्ताव करने लगे हैं और इसी सिलसिले में आज पटना में डायरेक्टोरेट ऑफ एनफोर्समेंट के ऑफिस में हुई पूरी घटना का डिटेल्ड बयान नीचे दिया गया है:-

1. रिशु श्री, प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002 (इसके बाद PMLA) की धारा 50 के तहत जारी समन का पालन करते हुए, डायरेक्टोरेट ऑफ एनफोर्समेंट, पटना के अधिकारियों के सामने पेश होने के लिए तैयार थे और वहां गए. हालांकि, हमारे क्लाइंट रिशु श्री को ऐसी पेशी के दौरान अपनी पर्सनल सुरक्षा और आज़ादी को गंभीर खतरा महसूस हुआ, क्योंकि पहले भी इसी तरह के समन पर पेश होते समय कुछ अधिकारियों ने उनके साथ ज़बरदस्ती, डराया-धमकाया और मारपीट की थी, इसलिए उन्होंने हमें अपनी सेवाएं देने के लिए कहा ताकि हम उनके साथ समन की कार्यवाही में दिखाई देने वाली दूरी से मौजूद रहें ताकि उनके साथ आगे कोई शारीरिक दुर्व्यवहार और किसी भी तरह की धमकी न हो.

2. माननीय सुप्रीम कोर्ट ने हमारे क्लाइंट रिशु श्री -बनाम- यूनियन ऑफ इंडिया [W.P. (Crl.) no. 411/2025, आदेश दिनांक 17.10.2025] द्वारा दायर एक मामले में, रिट याचिका का निपटारा करते हुए, रिशु श्री की गिरफ्तारी पर 10.11.2025 तक रोक लगाकर अंतरिम सुरक्षा प्रदान की है ताकि वे राहत के लिए उचित फोरम से संपर्क कर सकें.

3. हम अपने क्लाइंट रिशु श्री के साथ दोपहर लगभग 12:40 बजे एनफोर्समेंट ऑफिस, पहली मंजिल, चांदपुरा प्लेस, वेस्ट गांधी मैदान, बिस्कोमान भवन के पास, बैंक रोड, पटना – 800001, बिहार पहुंचे, जो समन नंबर: PMLA/SUMMON/PTZO/2025/1933/913 में शामिल होने के लिए कार में इंतजार कर रहे थे. हमने सामान्य अभ्यास/प्रक्रिया का पालन करते हुए, डिप्टी डायरेक्टर, डायरेक्टोरेट ऑफ एनफोर्समेंट, पटना के ऑफिस में अपनी याचिका के साथ प्रवेश किया, जिसमें हमें समन की कार्यवाही में दिखाई देने वाली दूरी से शामिल होने की अनुमति देने का अनुरोध किया गया था ताकि हमारे क्लाइंट के साथ कोई शारीरिक दुर्व्यवहार और किसी भी तरह की धमकी न हो और पारदर्शिता और निष्पक्षता बनी रहे.

4. कि अमन सक्सेना, डिप्टी डायरेक्टर, पटना जोनल ऑफिस, प्रवर्तन निदेशालय और भूपेश, एडिशनल डायरेक्टर हमसे मिले. उनके साथ कुछ और लोग भी थे.

5. कि हमने संबंधित अधिकारियों के सामने यह निवेदन किया कि हम विनम्रतापूर्वक अनुमति चाहते हैं कि हमें रिशु श्री से पूछताछ को एक ऐसी दूरी से देखने दिया जाए जो केवल दिखाई देने वाली दूरी हो, सुनाई देने वाली दूरी नहीं, ताकि रिशु श्री पर कोई शारीरिक या मौखिक दुर्व्यवहार या किसी भी तरह का थर्ड डिग्री टॉर्चर न किया जाए.

6. कि इसके अलावा हमने इस संबंध में रिशु श्री द्वारा हस्ताक्षरित निर्णयों का एक संग्रह और वकालतनामा भी प्रस्तुत किया, जिसे रिकॉर्ड पर लेने से मना कर दिया गया.

7. कि उसी समय, संग्रह और आवेदन को देखकर, अमन सक्सेना, डिप्टी डायरेक्टर ने हमारे साथ दुर्व्यवहार करना शुरू कर दिया और कहा कि “हम उसको तुम लोगों के सामने मारेंगे तो तुम लोग उसको बचा लोगे” और आगे कहा कि “कि तुम्हारी औकात नहीं है कि तुम लोग कुछ कर सको और उसको डिफेंड कर सको.” हमने इसका विरोध किया और उन्हें माननीय सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के साथ-साथ हमारे क्लाइंट के मामले में माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित आदेश के बारे में बताया, जिस पर उन्होंने आगे कहा कि “तुम्हारे ऑर्डर का हम बत्ती बना देंगे”.

8. कि हमने विनम्रतापूर्वक उनके व्यवहार का विरोध किया और कहा कि यह एक सज्जन अधिकारी से अपेक्षित और स्वीकार्य नहीं है. हमने उनसे आगे अनुरोध किया कि बातचीत सभ्य और विनम्र तरीके से रखें.

9. कि इसके अलावा भूपेश ने हमसे संबंधित फैसले दिखाने के लिए कहा जहां हमें अनुमति दी जा सकती है और अवसर दिया जा सकता है. इस संदर्भ में हमने उन्हें संबंधित पैराग्राफ के साथ संबंधित फैसले दिखाए लेकिन सब कुछ मना कर दिया गया. इसके अलावा, बातचीत के दौरान, अमन सक्सेना हम पर चिल्ला रहे थे और हमें डराने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन हमने पेशेवर वकीलों की तरह जितना हो सका उतना विनम्रता से व्यवहार किया.

10. हमने मिस्टर अमन सक्सेना, डिप्टी डायरेक्टर से विनम्रता से रिक्वेस्ट की कि या तो हमें इजाज़त दें ताकि मिस्टर रिशु श्री अपनी मर्ज़ी से पूछताछ में शामिल हो सकें और सहयोग कर सकें, लेकिन बदकिस्मती से, उन्हें गुस्सा आ गया और उन्होंने हम पर चिल्लाते हुए कहा “भाग बहनचोद” और आगे धमकी दी कि अगर हमने यह केस नहीं छोड़ा तो हमें बुरे नतीजे भुगतने पड़ेंगे और हमें फंसा दिया जाएगा. उन्होंने आगे कहा, “10 तारीख के बाद ऑर्डर की बत्ती बनाएंगे और तुम्हारे और तुम्हारे क्लाइंट के गांड में डाल देंगे”. उन्होंने आगे कहा कि तुम लोग मेरे ऑफिस में कैसे घुस गए और कहा कि क्या तुम्हें नहीं पता कि यह ED का ऑफिस है. अगली बार इस केस में आने की हिम्मत मत करना. यह बताया जाता है कि जब उनका व्यवहार बर्दाश्त से बाहर हो गया, तो हमें भी गुस्सा आ गया और हमने भी उन्हें सही शब्दों में जवाब दिया, तभी वे थोड़े सभ्य हुए.

11. इसके बावजूद कि मिस्टर अमन का व्यवहार बहुत बुरा और बदतमीज़ी भरा था, कई बार मिस्टर रिशु श्री को परेशान किया गया, पीटा गया, थप्पड़ मारे गए, उनके साथ हाथापाई की गई, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. मिस्टर अमन सक्सेना हमें बेइज्ज़त करने और गालियां देने पर तुले हुए थे, साथ ही हमें धमकियां भी दे रहे थे और उसी समय 4-5 अधिकारियों ने हमें घेर लिया था. इस पॉइंट पर, वकीलों को फिजिकली खतरा महसूस हुआ और उन्होंने ऑफिस छोड़ने का फैसला किया.

12. ऊपर बताए गए दोनों अधिकारियों का व्यवहार बहुत ही खराब, बदतमीज़ी भरा और गैर-कानूनी था, इस हद तक कि हमें गालियां दी गईं और हमें फिजिकली खतरा महसूस हुआ. यह फिर से कहा जाता है कि संबंधित अधिकारियों से हमारी बस इतनी सी रिक्वेस्ट थी कि पूछताछ के समय हमें थोड़ी दूरी पर रहने दिया जाए. हालांकि, इसके जवाब में हमें गुस्सा, बदतमीज़ी भरा व्यवहार, गालियां और फिजिकली धमकियां मिलीं.

13. यह भी कहा जाता है कि हमने ED ऑफिस आने की एंट्री विजिटर्स रजिस्टर की किताब में तारीख और समय के साथ की है, जो रिकॉर्ड में है.

14. यह भी कहा जाता है कि ED, पटना के परिसर में हुई सभी घटनाएं रिसेप्शन काउंटर रूम में लगे कैमरे (c.c.t.v.) में रिकॉर्ड हो गई हैं, और उस फुटेज को भविष्य के रेफरेंस के लिए सुरक्षित रखा जाना चाहिए.

15. इसके बावजूद कि उनके कहने पर हम पूछताछ के दौरान अपने फोन उन्हें देने के लिए भी तैयार हो गए थे. हालांकि, हमारे साथ जो व्यवहार किया गया वह गैर-संसदीय और गलत था.

16. ऊपर बताए गए तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए, रिक्वेस्ट है कि मिस्टर अमन सक्सेना और मिस्टर भूपेश के खिलाफ कार्रवाई की जाए ताकि प्रवर्तन निदेशालय और वकील समुदाय की गरिमा बनी रहे और किसी भी वकील के साथ ऐसा बुरा व्यवहार और बेइज्ज़ती न हो.

-भारत एक्सप्रेस

Md Shadan Ayaz

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