इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है, जिसमें हाई कोर्ट ने कहा है कि स्तन पकड़ने और पायजामे का नाड़ा खोलना दुष्कर्म नहीं है, बल्कि यौन उत्पीड़न है. यह याचिका सुप्रीम कोर्ट के वकील अंजलि पटेल ने दायर की है. याचिका में हाईकोर्ट द्वारा फैसले में लिखे गए पैरा नंबर 26 को विवादास्पद बताते हुए हटाने कि मांग की गई है. साथ ही यह भी कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट को ऐसे मामलों के लिए दिशा-निर्देश जारी करना चाहिए, ताकि निचली अदालतें या हाईकोर्ट संवेदनशील भाषा का इस्तेमाल महिलाओं के मामले में करें. याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट इन स्थितियों के मद्देनजर उचित आदेश जारी करें.
याचिकाकर्ता की दलील है कि हाल ही में कुछ हाई कोर्ट के जजों ने जिस तरह की टिप्पणी की है. वह ठीक नहीं है इसलिए जिस तरह से अन्य मामलों में दिशा निर्देश जारी किया जाता हैं, उसी तर्ज पर जजों के लिए भी दिशा निर्देश जारी होना चाहिए. हालांकि इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील इंदिरा जय सिंह ने भी ट्वीट कर कहा कि सुप्रीम कोर्ट को इस मामले में स्वतः संज्ञान लेना चाहिए.
हाई कोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि स्तन पकड़ने और पायजामे का नाड़ा खोलना दुष्कर्म नहीं है, बल्कि यौन उत्पीड़न है. यह मामला कासगंज जिले के पटियाली थाने में दर्ज है. बता दें कि इससे पहले आरोपियों के खिलाफ धारा 376 आईपीसी (बलात्कार) और पॉक्सो एक्ट की धारा 18 (अपराध करने का प्रयास) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था. हाई कोर्ट ने कहा कि आरोपियों पर लगाए गए आरोप और मामले के तथ्यों के आधार पर इस मामले में रेप की कोशिश का अपराध नहीं बनता. इसकी बजाय उन्हें आईपीसी की धारा 354 (बी) यानी पीड़िता को निवस्त्र करने या उसे नग्न होने के लिए मजबूर करने के इरादे से हमला या दुर्व्यवहार करने और पॉक्सो एक्ट की धारा 9 (एम) के तहत आरोप के तहत तलब किया जा सकता है.
पवन और आकाश पर उत्तर प्रदेश के कासगंज में 11 वर्षीय पीड़िता स्तन पकड़ने, उसके पायजामा का नाड़ा तोड़ने और उसे पुलिया के नीचे खींचने का प्रयास करने का आरोप है. राहगीरों के हस्तक्षेप के बाद आरोपी मौके से भाग गए. यह घटना 2021 में हुई थी. जब आरोपी ने बच्ची को लिफ्ट देने की पेशकश की थी. निचली अदालत ने इसे पॉक्सो एक्ट के तहत बलात्कार के प्रयास और यौन उत्पीड़न का मामला मानते हुए समन जारी किया था.
आरोपियों ने निचली अदालत के इस आदेश को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. याचिका में तर्क दिया गया है कि शिकायत के आधार पर यह मामला धारा 376 आईपीसी के तहत नहीं आता है और यह केवल धारा 354 (बी) आईपीसी और पॉक्सो अधिनियम के तहत ही आ सकता है.
-भारत एक्सप्रेस
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