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कैश फॉर जॉब्स’ मनी लॉन्ड्रिंग मामला: पूर्व मंत्री वी. सेंथिल बालाजी के याचिका वापस लिया, कोर्ट ने मामले को ट्रांसफर करने की मांग पर नोटिस जारी कर जवाब मांगा

Cash for Jobs Money Laundering Case: सुप्रीम कोर्ट ने कैश फॉर जॉब मामले में  तमिलनाडु के पूर्व मंत्री और कथित आरोपी वी. सेंथिल बालाजी को याचिका को वापस लेने की अनुमति दे दी है. दायर याचिका में बालाजी ने ने अदालत.से उनके खिलाफ जमानत आदेश में की गई टिप्पणियों को हटाने की मांग की गई थी. वही कोर्ट ने मामले को दिल्ली ट्रांसफर करने की मांग वाली याचिका पर राज्य सरकार को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब मांगा है.

बालाजी पर मनी लॉन्ड्रिंग के तहत मुकदमा चल रहा है. जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने यह आदेश दिया है. जस्टिस सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ये कोर्ट के दिमाग की झलक है, इसे सही या गलत नहीं कह सकते. कोर्ट ने बालाजी की ओर से दायर याचिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि आपने ये आवेदन जस्टिस अभय ओका की रिटायरमेंट के बाद क्यों दायर किया? इसपर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इसे अच्छे स्वाद में न होने वाला कदम बताया है.

बालाजी ने टिप्पणी हटाने की याचिका दायर

वही बालाजी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि ऐसा न समझा जाए कि बालाजी मंत्री पद नहीं संभाल सकते. उन्होंने कहा कि देश में कई मंत्री मुकदमों का सामना कर रहे हैं, कितने लोग इस्तीफा देते हैं? जबकि बालाजी के खिलाफ लंबित दो अन्य मामले को दिल्ली ट्रांसफर करने की मांग का दिल्ली सरकार की ओर से पेश वकील अमित आनंद तिवारी ने विरोध किया. उन्होंने कहा कि गवाह तमिलनाडु में हैं, ऐसे में दिल्ली में ट्रायल संभव नहीं होंगा. उन्होंने कहा कि अगर ट्रांसफर होता है तो इसका मतलब होगा कि राज्य की जांच पर भरोसा नहीं है. इसपर जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि इस पर विचार किया जा सकता है.

बालाजी की ओर से दायर अर्जी में कहा गया था कि 8 सितंबर 2022 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले में की गई टिप्पणियों को हटाने की मांग की गई थी. याचिका में कहा गया था कि कोर्ट द्वारा की गई टिप्पणी से उनके खिलाफ निचली अदालत में चल रहे ट्रायल को प्रभावित कर सकता है और संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत निष्पक्ष सुनवाई के उनके अधिकार का उल्लंघन करती हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि क्रिमिनल कानून का एक नौदिखिया भी पीसी एक्ट के अपराधों को अंतिम रिपोर्ट से बाहर नही रखता है. कोर्ट ने जांच अधिकारी के मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा था कि वह वॉर करना चाहता था, लेकिन घाव देने से डरता था.

ये भी पढ़ें- वोडाफोन-आइडिया की ओर से दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 13 अक्टूबर को सुनवाई करेगा

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-भारत एक्सप्रेस 

गोपाल कृष्ण

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