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वोडाफोन-आइडिया की ओर से दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 13 अक्टूबर को सुनवाई करेगा

Vodafone-Idea AGR Dues Dispute: वोडाफोन-आइडिया की ओर से दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 13 अक्टूबर को सुनवाई करेगा. सीजेआई बी. आर गवई, जस्टिस के विनोद चंद्रन और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ वोडाफोन आइडिया की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है. मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुनवाई टालने की मांग की, जिसपर कोर्ट ने 13 अक्टूबर तक के लिए सुनवाई को टाल दिया.

पिछली सुनवाई में एसजी मेहता ने कोर्ट को बताया था कि सरकार भी इस मामले में हितधारक है, क्योंकि अब सरकार की कंपनी में 50 फीसदी हिस्सेदारी है. उन्होंने कहा था कि कुछ समाधान निकलना होगा और इसके लिए कोर्ट की मदद की जरूरत होगी.

Vodafone Idea ने AGR बकाया राशि पर किया विवाद

वही वोडाफोन आइडिया की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा था कि मोबाइल कंपनियों को लाइसेंस शुल्क उनकी आय पर देना होता है. लेकिन विवाद इस बात को लेकर है कि अगले कंपनी होटल जैसे अन्य बिजनेस भी चलाती है तो उसकी आमदनी भी मोबाइल कंपनी के राजस्व में जोड़ दी जाती है.

इस पर एसजी मेहता ने कहा था कि इस केस में कुछ और मुद्दा है जो अगली सुनवाई में बताएंगे. वोडाफोन-आइडिया ने एजीआर (एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू) बकाया को चुनौती दी है. कंपनी ने 9 450 करोड़ रुपये के अतिरिक्त एजीआर बकाया को गलत ठहराते हुए इसे अदालत में चुनौती दी हैं. वोडाफोन आइडिया का कहना है कि सरकार ने इस डिमांड में कुछ राशि को दोहराया है. ऐसे में इसमें सुधार करना चाहिए.

वोडाफोन आइडिया ने AGR बकाया की जांच मांगी

याचिका में कंपनी ने अनुरोध किया है कि वह दूरसंचार विभाग को 3 फरवरी 2020 को पेश किए गए डिडक्शन वेरिफिकेशन गाइडलाइन का इस्तेमाल करके एजीआर बकाया की पूरी तरह से जांच करने के लिए कहें. दूरसंचार विभाग ने वोडाफोन आइडिया को 2018-19 के लिए एजीआर बकाया के रूप में 2774 करोड़ रुपये अतिरिक्त देने को कहा है. 9450 करोड़ रुपये की कुल मांग में से 2774 करोड़ रुपये विलय वाली कंपनी के लिए है, जबकि 5675 करोड़ रुपए विलय से पहले वोडाफोन समूह के बकाया के लिए है.

वोडाफोन आइडिया का दावा है कि कुछ रकम दो बार जोड़ा गया है, जिसके लिए उसने वित्त वर्ष 2016-17 से पहले की अवधि के बकाए का मिलान करने की मांग की है. इसके जवाब में DoT ने कोर्ट को बताया है कि यह मांग पुनर्मूल्यांकन या पुनर्गणना के कारण नहीं है, बल्कि लंबित खातों को अंतिम रूप देने.से उत्पन्न हुई है. विभाग ने वित्तीय खातों के बंद होने के बाद पाई गई असंगतियों को इसका कारण बताया है.

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-भारत एक्सप्रेस 

गोपाल कृष्ण

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