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टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा पर नया आदेश पारित करने के लिए लोकपाल ने मांगा समय, दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर

लोकपाल ने टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ कैश फॉर क्वेरी मामले में नया आदेश पारित करने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट से 2 महीने का समय मांगा है. जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस रेनू भटनागर की बेंच मामले में सुनवाई कर रही है. मामले की सुनवाई के दौरान लोकपाल की ओर से पेश वकील ने सर्दियों की छुट्टियों के कारण काम बंद होने का हवाला देते हुए मामले में नया आदेश पारित करने के लिए 2 सप्ताह का समय मांगा है.

19 दिसंबर 2025 को दिल्ली हाई कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए लोकपाल के उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें सीबीआई को उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने की इजाजत दी गई थी. कोर्ट ने लोकपाल से यह भी कहा था कि वे लोकपाल और लोकायुक्त एक्ट के प्रावधानों के मुताबिक इस मामले की दोबारा जांच करें और एक महीने के अंदर नया फैसला ले.

महुआ मोइत्रा का लोकपाल पर आरोप

महुआ मोइत्रा ने आरोप लगाया कि निगरानी संस्था ने गलत तरीके से सीबीआई को उनके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल करने की अनुमति दे दी, जिसमें उन पर संसद में प्रश्न पूछने के बदले में व्यवसायी दर्शन हीरानंदानी से नकदी और उपहार स्वीकर करने का आरोप है. 12 नवंबर को लोकपाल की पूर्ण पीठ ने लोकपाल अधिनियम की धारा 20(7)(A) उपधारा धारा 23 (1) के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए सीबीआई को चार सप्ताह में महुआ मोइत्रा के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने की अनुमति दी थी और कहा था कि चार्जशीट के एक कॉपी उसके सामने भी पेश की जाए.

महुआ मोइत्रा की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि लोकपाल का आदेश लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 2013 के खिलाफ है और वह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का उल्लंघन करता है, क्योंकि यह उनके विस्तृत लिखित और मौखिक प्रस्तुतियों पर विचार किए बिना पारित किया गया है.

CBI रिपोर्ट लीक पर हाई कोर्ट सख्त

इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने लोकपाल और सीबीआई को निर्देश दिया था कि वे तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ कथित रूप से धन के बदले संसद में प्रश्न पूछने के मामले में चल रही लोकपाल कार्यवाही की गोपनीयता बनाए रखना सुनिश्चित करें. अदालत ने मोइत्रा की याचिका का निपटारा करते हुए कहा था कि लोकपाल व सीबीआई को 5 जून को जारी परिपत्र के निर्देशों के साथ वैधानिक प्रावधानों के अनुसार गोपनीयता बनाए रखना अनिवार्य है. लोकपाल को सौंपी गई सीबीआई की रिपोर्ट मीडिया में लीक हो गई थी.

इस मामले में आचार समिति ने मोइत्रा को दोषी ठहराया था और बाद में उन्हें 8 दिसंबर, 2023 को लोकसभा सांसद के पद से निष्कासित कर दिया गया था. उन पर व्यवसायी और मित्र दर्शन हीरानंदानी की ओर से प्रश्न पूछने के बदले नकद प्राप्त करने का आरोप लगाया गया था.

ये भी पढ़ें: उन्नाव रेप मामले में दोषी कुलदीप सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ा झटका, पीड़िता के पिता की मौत मामले में जमानत याचिका खारिज

-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

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