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‘संरक्षण के बिना तरक्की सिर्फ एक धोखा…’ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में बोले CJI सूर्यकांत

पर्यावरण संरक्षण और जलवायु की गतिशीलता का भविष्य विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में शामिल सीजेआई सूर्यकांत ने पर्यावरण संरक्षण और न्यायपालिका की भूमिका पर विस्तार से बात की है.

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि प्रकृति की रक्षा भारत की पुरानी परंपरा का हिस्सा रही है. इसका असर संविधान में दिखाई देता है. उन्होंने कहा कि पृथ्वी को बचाने का विचार भारत की विरासत में गहराई से बसा हुआ है, और प्रकृति के प्रति देश का पुराना सम्मान संविधान में भी झलकता है.

संविधान एक नैतिक समझौता

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि संविधान सिर्फ एक राजीनीतिक चार्टड नहीं है, बल्कि पिछली, वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के साथ एक नैतिक समझौता है. सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि अदालतों के सामने अब सवाल संरक्षण बनाम विकास का नहीं है. सवाल यह है कि दोनों को साथ कैसे चलाया जाए और लंबे समय तक कायम रखा जाए.

सीजेआई ने सुप्रीम कोर्ट को न्याय का बरगद का पेड़ बताया. उन्होंने कहा कि अदालत ने चार दशकों में पर्यावरण कानून को मजबूत किया है. सीजेआई सूर्यकांत ने संविधान के अनुच्छेद 48A का जिक्र किया. इसके तहत राज्य को पर्यावरण की रक्षा और उसमें सुधार के लिए काम करने की जिम्मेदारी दी गई है.

जीवन के अधिकार का हिस्सा

CJI सूर्यकांत ने अनुच्छेद 51A (G)का उल्लेख किया. इसमें हर नागरिक से प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और सुधार की अपेक्षा की जाती है. अदालत ने स्वास्थ पर्यावरण के अधिकार को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा माना है.

उन्होंने कहा ये सिद्धांत अधिकारियों और पर्यावरण को नुकसान पहुचाने वालों पर नुकसान रोकने, खराब हुए पर्यावरण को ठीक करने और जवाबदेही सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी डालते है.

रक्षा करना सिर्फ परोपकार का काम नहीं

सीजेआई ने कहा कि कोर्ट के फैसलों से यह बात साफ होती है कि प्रकृति की रक्षा करना सिर्फ परोपकार का काम नहीं है, बल्कि यह खेद के अस्तित्व को बचाने और जीवन को बनाए रखने से भी जुड़ा है.

सुप्रीम कोर्ट ने दशकों से इस बात की वकालत की है कि संरक्षण के बिना तरक्की सिर्फ एक मृगतृष्णा (धोखा) है, जो पर्यावरण के विनाश के रेगिस्तान में गायब हो जाती है.

यह भी पढ़ें: हाई कोर्ट्स में बड़ा बदलाव! 14 न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति को राष्ट्रपति की मंजूरी

-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

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