(AI IMAGE)
H1B Visa Rules 2026: अमेरिका में नौकरी का सपना देख रहे लाखों विदेशी पेशेवरों, विशेष रूप से भारतीय IT कर्मचारियों के लिए एक बड़ा झटका लगा है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने H-1B वीजा पर $1,00,000 (लगभग 85 लाख रुपये) शुल्क लगाने वाले कार्यकारी आदेश की अवधि को एक वर्ष के लिए और बढ़ा दिया है.
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने H-1B वीजा पर $1,00,000 फीस लगाने के कार्यकारी आदेश की समय सीमा एक साल के लिए बढ़ा दी है. हालांकि यह फैसला अदालती रोक और कानूनी चुनौतियों के अधीन है. इस नियम से मौजूदा वीजा धारकों और छात्रों को छूट दी गई है, लेकिन नए भारतीय IT पेशेवरों की भर्ती लागत बढ़ने से उनकी नौकरियों पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है.
व्हाइट हाउस के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने H-1B गैर-आप्रवासी वीजा पर $1,00,000 का भारी शुल्क लगाने से जुड़े कार्यकारी आदेश को एक और साल के लिए विस्तार दे दिया है. यह आदेश मूल रूप से सितंबर 2025 में जारी हुआ था और इस महीने समाप्त होने वाला था. इस नए फैसले के बाद अब यह शुल्क व्यवस्था अगले वर्ष तक प्रभावी रहेगी.
राष्ट्रपति ट्रंप लंबे समय से H-1B वीजा कार्यक्रम की कड़ी आलोचना करते रहे हैं. उनका तर्क है कि टेक कंपनियां अमेरिकी कर्मचारियों की जगह कम वेतन पर विदेशी पेशेवरों को काम पर रखने के लिए इस वीजा का उपयोग करती हैं. इसी वजह से ट्रंप प्रशासन मौजूदा $2,000 से $5,000 की फीस को स्थायी रूप से बढ़ाकर न्यूनतम $1,00,000 करना चाहता है.
भले ही आदेश की अवधि बढ़ा दी गई है, लेकिन यह मामला अभी अमेरिकी अदालतों में लंबित है. जून में एक संघीय जज ने इस बढ़ी हुई फीस को अवैध बताते हुए इसकी वसूली पर रोक लगा दी थी, जिसकी समीक्षा बोस्टन अपीलीय अदालत कर रही है. इसके अलावा अमेरिकी चैंबर ऑफ कॉमर्स की ओर से दायर चुनौती पर भी कानूनी सुनवाई जारी है.
यह नया आदेश उन विदेशी नागरिकों पर लागू नहीं होगा जो पहले से छात्र वीजा (Student Visa) पर अमेरिका में हैं और बाद में H-1B में स्विच करते हैं. इसके साथ ही मौजूदा H-1B वीजा के नवीनीकरण (Renewal) पर भी इसे लागू नहीं किया गया है. इसका सीधा असर पहली बार स्पॉन्सरशिप चाहने वाले नए आवेदकों और कंपनियों पर पड़ेगा.
H-1B वीजा का सबसे बड़ा लाभार्थी भारत रहा है. शुल्क बढ़ने से अमेरिकी कंपनियों के लिए भारतीय प्रतिभाओं की भर्ती महंगी हो जाएगी. इसका एक असर यह भी दिख रहा है कि गूगल (Alphabet) जैसी दिग्गज कंपनियां अब अमेरिका के बजाय भारत में ही अपने परिचालन और निवेश को विस्तार देने पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं.
यह भी पढ़ें-जब AI ने अमेरिका को दे दिया धोखा, चीन पर हमले के लिए उड़ चुके थे लड़ाकू विमान, फिर क्या हुआ?
-भारत एक्सप्रेस
Nana Patekar Tirangaa and Krantiveer iconic roles: नाना पाटेकर की 'तिरंगा' और 'क्रांतिवीर' ने 90…
Anupriya Nagar Sunil Lodhi Namo Book Fest Kashi: काशी के नमो बुक फेस्ट में पहली…
Lieutenant Governor Swaraj Dweep visit: उपराज्यपाल डॉ. दिनेश शर्मा के स्वराजद्वीप दौरे पर मिलीं कई…
Allahabad High Court Ayushman Bharat hospital cancellation: ब्लड कैंसर पीड़ित 2 माह के बच्चे के…
Vinoy Kumar Choubey Presidents Police Medal: पिंपरी-चिंचवड़ पुलिस कमिश्नर IPS विनय कुमार चौबे को विशिष्ट…
OPPOSITION MEETS PRESIDENT ON VOTE THEFT: विपक्षी गठबंधन INDIA के शीर्ष 10 नेताओं के एक…