लीगल

दिल्ली हाईकोर्ट ने झुग्गीवासियों के पुनर्वास पर बनाई मॉनिटरिंग कमेटी, सुविधाओं की होगी निगरानी

दिल्ली हाई कोर्ट ने बी. आर. कैंप, मस्जिद कैंप और डीआईजी कॉलोनो की झुग्गी-झोपड़ी बस्तियों के निवासियों को सवदा घेवरा स्थित डीयूएसआईबी कॉलोनी में बसाने की प्रक्रिया पर लगातार निगरानी के लिए एक मॉनिटरिंग कमेटी गठित की है. अदालत ने कहा कि केवल लोगों को एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट कर.देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि पुनर्वास के बाद वे सम्मानजनक और बेहतर जीवन जी सकें.

मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने तीन झुग्गीवासियों के समूहों की ओर से दायर अपीलों पर सुनवाई कर रही थी. सिंगल बेंच ने बेदखली और पुनर्वासके खिलाफ दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया गया था. यह मामला बी. आर. कैंप, मस्जिद कैंप और डीआईजी कॉलोनी की करीब 717 आवासीय इकाइयों से जुड़ा है. जमीन खाली कराने के बाद यहां रहने वाले लोगों को सवदा घेवरा स्थित डीयूएसआईबी कॉलोनी में बने फ्लैटों में बसाने की योजना है.

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि पुनर्वास की प्रक्रिया की लगातार निगरानी जरूरी है, ताकि झुग्गीवासियों को नई जगह पर बसने के बाद वास्तविक रूप से एक सार्थक और सम्मानजनक जीवन मिल सके.

कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की दलीलें खारिज कीं

याचिककर्ताओ की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि उन्हें पांच किलोमीटर से अधिक दूरी पर स्थानांतरित किया जा रहा है, जो दिल्ली स्लम एंड जेजे रिहैबिलिटेशन एंड रिलोकेशन पॉलिसी 2015 के प्रावधानों के खिलाफ है. हालांकि अदालत ने इन दलालों को खारिज कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि नीति में यह प्रावधान है कि डीयूएसआईबी की पूर्व मंजूरी मिलने पर लोगों को पांच किलोमीटर से अधिक दूरी पर भी स्थानांतरित किया जा सकता है. इस मामले में सवदा घेवरा स्थित पुनर्वास स्थल को 9 अप्रैल 2026 की बैठक में डीयूएसआईबी की मंजूरी मिल चुकी थी. ऐसे में केवल दूरी के आधार पर स्थानांतरण की प्रक्रिया को अवैध नही कहा जा सकता.

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा कि पुनर्वास का अधिकार केवल मकान उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं हो सकता. संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत सम्मान के.साथ जीवन जीने के अधिकार को ध्यान में रखते हुए पुनर्वास की व्यवस्था की जानी चाहिए.

मामले की सुनवाई के दौरान नए पुनर्वास स्थल पर परिवहन, बच्चों की शिक्षा, बिजली, सीवर, पानी, स्वास्थ्य सुविधाओं और सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई गई. कोर्ट ने माना कि सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन यह सुनिश्चित करने के लिए और निर्देशों की जरूरत है कि ये सुविधाएं जमीन पर भी सही तरीके से मिलें.

यह भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली दंगे में साजिश रचने के मामले में आरोपी अतहर खान की ओर से दायर जमानत याचिका पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर मांगा जवाब

-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

Recent Posts

दिल्ली दंगे: कड़कड़डूमा कोर्ट ने ‘आप’ के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को ठहराया दोषी

कड़कड़डूमा कोर्ट ने दिल्ली दंगों से जुड़े दयालपुर इलाके के एक मामले में 'आप' के…

1 minute ago

नाना पाटेकर के निधन की असली वजह आई सामने, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में क्या आया सामने? गोवा पुलिस ने किया खुलासा

Nana Patekar Postmortem Report: गोवा मेडिकल कॉलेज की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में नाना पाटेकर की मौत…

22 minutes ago

डिफेंस एक्सपोर्ट में अडाणी डिफेंस का जलवा, SIDM Champion Award 2026 से हुआ सम्मानित

Adani Defence SIDM Champion Award 2026: अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस को रक्षा और एयरोस्पेस निर्यात…

44 minutes ago

‘तो हो जाए अयोध्या में फैसला’, सीएम योगी ने स्वीकार की अखिलेश यादव की चुनौती

UP News: अयोध्या से चुनाव लड़ने की अखिलेश यादव की सलाह पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ…

1 hour ago

‘तकनीक का इस्तेमाल नहीं, अब निर्माता बने भारत’: PHDCCI के 121वें सत्र में बोले केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह

PHDCCI के 121वें वार्षिक सत्र में केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत को तकनीक…

1 hour ago

समुद्र तटों की जोरदार सफाई: 2,000 से ज्‍यादा लोगों ने देश के किस बीच से हटाया 15 टन कचरा? रोपे गए ‘सुरुचि’ के पौधे

वसई-विरार महानगरपालिका द्वारा राजोडी समुद्र तट पर एक विशाल स्वच्छता अभियान चलाया गया. मेयर और…

1 hour ago