लीगल

दिल्ली हाई कोर्ट ने कानूनी सहायता वकीलों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए तंत्र विकसित करने का दिया निर्देश

दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (DSLSA) को निर्देश दिया है कि वह कानूनी सहायता वकीलों की अदालती उपस्थिति की निगरानी के लिए एक प्रभावी प्रणाली लागू करें. यह आदेश न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ ने उस मामले में पारित किया, जिसमें एक वादी की आपराधिक शिकायत दर्ज करने की याचिका को ट्रायल कोर्ट ने खारिज कर दिया था, क्योंकि उसका कानूनी सहायता वकील लगातार तीन सुनवाई में उपस्थित नहीं हुआ था.

न्याय प्रक्रिया में बाधा का मुद्दा

कोर्ट ने कहा कि इस तरह के मामले उन वंचित व्यक्तियों की चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो पूरी तरह से कानूनी सहायता प्रणाली पर निर्भर होते हैं. अदालत ने चिंता व्यक्त की कि क्या ऐसे याचिकाकर्ताओं को प्रभावी कानूनी प्रतिनिधित्व देने के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय मौजूद हैं?

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एक अशिक्षित व्यक्ति जो निजी वकील रखने में असमर्थ है, उसके लिए कानूनी सहायता वकील आशा का एक महत्वपूर्ण स्रोत होता है. न्याय प्रणाली की मांग है कि ऐसे व्यक्तियों को सिर्फ औपचारिकता के लिए कानूनी सहायता वकील न सौंपा जाए, बल्कि उन्हें प्रभावी कानूनी प्रतिनिधित्व प्रदान किया जाए. ऐसा न करने से कानून के समक्ष समानता का संवैधानिक वादा विफल हो जाता है.

कोर्ट का निर्देश

कोर्ट ने वादी की आर्थिक और अन्य अक्षमताओं को ध्यान में रखते हुए कहा कि न्याय में चूक नहीं होनी चाहिए. न्यायालय ने मामले को मजिस्ट्रेट की अदालत में वापस भेजते हुए यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि ऐसे मामलों को केवल इस आधार पर खारिज न किया जाए कि कानूनी सहायता वकील अदालत में उपस्थित नहीं हुए.

कोर्ट ने DSLSA के सचिव को निर्देश दिया कि दिल्ली के सभी जिला न्यायालयों में कानूनी सहायता वकीलों की उपस्थिति की निगरानी के लिए एक प्रभावी तंत्र स्थापित किया जाए. इसके तहत कानूनी सहायता वकीलों को अपने मामलों की नियमित उपस्थिति की सूचना संबंधित DLSA सचिव को देनी होगी. DSLSA उन स्थितियों से निपटने के लिए एक रूपरेखा तैयार करेगा, जहां कोई कानूनी सहायता वकील लगातार दो सुनवाई में अनुपस्थित रहता है. यह सुनिश्चित करने के लिए न्यायिक अधिकारियों को संवेदनशील और सतर्क बनाया जाएगा कि यदि कोई कानूनी सहायता वकील लगातार अनुपस्थित रहता है, तो यह DSLSA सचिव के ध्यान में लाया जाए.

क्या है मामला?

यह आदेश उस याचिका पर सुनवाई के दौरान आया, जिसे एक व्यक्ति ने दायर किया था. याचिकाकर्ता का आरोप था कि 2018 में कुछ लोगों ने जान से मारने की धमकी दी और नुकसान पहुंचाने के इरादे से उसके घर के एक हिस्से पर हमला किया. इस संबंध में उसने आपराधिक शिकायत दर्ज कराने के लिए याचिका दायर की थी, लेकिन उसके कानूनी सहायता वकील की लगातार अनुपस्थिति के कारण निचली अदालत ने याचिका खारिज कर दी.

अब हाई कोर्ट ने इस मामले को फिर से मजिस्ट्रेट कोर्ट में भेजते हुए कानूनी सहायता प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं.


ये भी पढ़ें- दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली जल बोर्ड पर व्यक्त की अपनी नाराजगी


-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

Recent Posts

Harry Boxer Arrested: लॉरेंस गैंग का कुख्यात हैरी बॉक्सर कैलिफोर्निया में गिरफ्तार, भारत लाने की कागजी कार्रवाई शुरू

Bollywood Threats: लॉरेंस बिश्नोई गैंग के कुख्यात गैंगस्टर हैरी बॉक्सर को अमेरिका के कैलिफोर्निया में…

33 minutes ago

अमेरिका से कनाडा तक दिवाली की धूम, जगमग हुए शहर; न्यू जर्सी में रामलीला तो टोरंटो में लगा स्ट्रीट मेला

Diwali Celebration America: अमेरिका और कनाडा के कई शहरों में दिवाली का जश्न धूमधाम से…

44 minutes ago

गुरनूर बरार की कातिलाना गेंदबाजी! दूसरे वनडे में न्यूजीलैंड 134 रन पर ढेर

India Vs New Zealand 2nd ODI: भारत ने हेनरी स्टेडियम में खेले जा रहे दूसरे…

55 minutes ago

Ghaziabad Blast में आतंकी कनेक्शन! ‘तहरीक-उल-मुजाहिदीन’ के नाम से वीडियो वायरल, पुलिस और एजेंसियां अलर्ट

Ghaziabad Police Chowki Blast: गाजियाबाद की वसुंधरा पुलिस चौकी में धमाके के बाद सोशल मीडिया…

1 hour ago

मोहम्मद शमी: टेस्ट क्रिकेट ने उन्हें छोड़ दिया, उन्होंने क्रिकेट को नहीं

Mohammed Shami Retirement: मोहम्मद शमी ने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी है.…

2 hours ago