दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने आदेशों को ‘गंभीरता’ से नहीं लेने के लिए दिल्ली जल बोर्ड (DJB) पर अपनी नाराजगी व्यक्त की है. अदालत ने चेतावनी दी कि आगे भी निष्क्रियता की स्थिति में न्यायालय अपने निर्देशों का ‘उचित रूप से अनुपालन’ सुनिश्चित करने के लिए न्यायालय की अवमानना अधिनियम के तहत ‘सख्त और कठोर कार्रवाई करने में संकोच नहीं करेगा. जस्टिस प्रतिभा सिंह और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की खंडपीठ सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) के कामकाज से संबंधित एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी. डीजेबी के मुख्य अभियंता ने अदालत को बताया कि 37 एसटीपी में से फ्लो मीटर केवल 22 एसटीपी के अपशिष्ट आउटलेट पर लगाए गए हैं और चार अतिरिक्त एसटीपी के लिए फ्लो मीटर मार्च 2025 तक लगाए जाने की उम्मीद है.
अदालत के निर्देशों के बाद नहीं लगा कोई फ्लो मीटर
अदालत को बताया गया कि शेष 11 एसटीपी के लिए, फ्लो मीटर लगाने के अनुमान अभी भी तैयार किए जा रहे हैं. डीजेबी के तहत 37 एसटीपी घरेलू और आवासीय क्षेत्रों से यमुना नदी में बहने वाले सीवेज की देखभाल करते हैं. औद्योगिक अपशिष्ट दिल्ली राज्य औद्योगिक और बुनियादी ढांचा विकास निगम के अधिकार क्षेत्र में हैं.
अदालत ने नोट किया कि नवंबर 2024 में सभी 37 एसटीपी में निर्वहन बिंदु पर फ्लो मीटर लगाने के लिए इसके द्वारा विशिष्ट आदेश जारी किए गए थे. इसके अलावा, 22 एसटीपी में लगाए गए फ्लो मीटर लगभग 4-5 साल पहले उनके निर्माण परियोजनाओं के हिस्से के रूप में लगाए गए थे, जो दर्शाता है कि नवंबर 2024 में अदालत के निर्देशों के बाद कोई फ्लो मीटर नहीं लगाया गया है. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा यह स्पष्ट रूप से असंतोषजनक स्थिति को दर्शाता है. एसटीपी के मुद्दे की निगरानी की जा रही है और अप्रैल 2024 से इस अदालत द्वारा इससे निपटा जा रहा है.
किसी भी स्थिति में 12 नवंबर, 2024 के बाद से फ्लो मीटर लगाने के लिए डीजेबी द्वारा कोई कदम नहीं उठाया गया है. कोर्ट ने कहा इससे अदालत को स्पष्ट रूप से यह आभास होता है कि डीजेबी ने इस अदालत के आदेशों को गंभीरता से नहीं लिया है और आज तक केवल अनुमान तैयार किए जा रहे हैं, यह स्थिति अदालत को पूरी तरह से स्वीकार्य नहीं है.
-भारत एक्सप्रेस
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