दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली के लुटियंस (Lutyens) स्थित देश के सबसे प्रतिष्ठित क्लब ‘दिल्ली जिमखाना क्लब’ के 27.3 एकड़ परिसर से बेदखल करने के केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. जस्टिस अवनीश झिंगन की बेंच ने यह नोटिस जारी किया है. अब कोर्ट आगामी 28 जुलाई को इस बेहद संवेदनशील मामले में अगली सुनवाई करेगा.
यह याचिका जिमखाना क्लब के सदस्य विजय खुराना और क्लब के कर्मचारी वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से संयुक्त रूप से दायर की गई है. खुराना ने कोर्ट में यह भी दावा किया है कि उनकी इस याचिका को क्लब के 500 से अधिक सम्मानित सदस्यों का पूरा समर्थन प्राप्त है. दायर याचिका में 29 जून को भूमि एवं विकास कार्यालय (L&DO) द्वारा जारी किए गए कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) के संचालन पर तुरंत रोक लगाने की मांग की गई है.
मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने कहा, “मुझे कल ही इस अर्जी की कॉपी मिली है. मुझे यह भी पता है कि जिस नोटिस पर ये लोग रोक लगवाने की मांग कर रहे हैं, उसका आधिकारिक जवाब कल ही देना है.”
बता दें कि इससे पहले 26 मई को हाई कोर्ट ने जिमखाना क्लब परिसर को खाली करने के केंद्र सरकार के नोटिस के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए भी सरकार को नोटिस जारी किया था. हालांकि, उस समय कोर्ट ने केंद्र सरकार के नोटिस पर कोई भी अंतरिम रोक (Interim Stay) लगाने से साफ इनकार कर दिया था. कोर्ट ने केंद्र सरकार की इस सूचना पर विशेष गौर किया था कि खाली करने की कोई भी ठोस कार्रवाई कानूनी नोटिस जारी करने के बाद ही की जाएगी.
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पिछली सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को आश्वस्त करते हुए कहा था कि जिमखाना क्लब को खाली करने की किसी भी कार्रवाई के पहले कानून के स्थापित नियमों के मुताबिक नोटिस जारी किया जाएगा. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि यह कहना बिल्कुल सही नहीं है कि जिमखाना क्लब का प्रबंधन सरकार पूरी तरह अपने हाथों में ले रही है. इसके बाद कोर्ट ने कहा था कि ऐसी स्थिति में केंद्र के नोटिस पर फिलहाल रोक लगाने का कोई कानूनी मतलब नहीं बनता है.
अदालत में दायर नई याचिका में याचिकाकर्ताओं ने केंद्र सरकार की मंशा पर गंभीर आरोप लगाए हैं. याचिका में आरोप लगाया गया है कि सरकार द्वारा रक्षा बुनियादी ढांचे (Defense Infrastructure) और राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर परिसर खाली कराने के जो कारण दिए गए हैं, वे पूरी तरह से अस्पष्ट और सामान्य हैं; यह कार्रवाई सिर्फ एक प्रशासनिक दिखावा है.
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