Indigo फ्लाइट रद्द मामले में दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को फटकार लगाकर मामले पर संज्ञान लिया है. कोर्ट ने कहा कि आधी अधूरी जानकारी के साथ यह याचिका दायर की गई है, लेकिन मामले में जनहित को देखते हुए हम संज्ञान ले रहे है.
कोर्ट ने केंद्र सरकार, डीजीसीए और इंडिगो से कहा कि वह इंस्योर करें कि को यात्री अलग-अलग एयरपोर्ट पर फंसे हुए है, उन्हें पर्याप्त मुआवजा मिले. कोर्ट ने सरकार से सभी एयरलाइंस में पर्याप्त पायलटों की नियुक्ति करने को कहा है. कोर्ट ने कहा कि इस मामले में गठित कमेटी की जांच पूरी होने पर अगली सुनवाई से पहले सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट पेश करें. कोर्ट 22 जनवरी 2026 को अगली सुनवाई करेगा.
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की पीठ ने इंडिगो की अव्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार और संबंधित अधिकारियों से पूछा ऐसी स्थिति उत्पन्न क्यों हुई? कोर्ट ने यात्रियों की सहायता के लिए क्या कदम उठाए गए? कोर्ट ने सरकार से फंसे हुए यात्रियों के प्रबंधन और हवाई अड्डों पर उत्पीड़न को रोकने के लिए किए गए इंतजामों के बारे में स्पष्टीकरण मांगा है.
मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि हम आपके प्रयासों की सराहना करते हैं, लेकिन इस स्थिति को उत्पन्न करने में सरकार की क्या भूमिका रही? यह केवल हवाई अड्डे पर फंसे व्यक्तिगत यात्रियों का मामला नहीं है. यह अर्थव्यवस्था को हुए नुकसान का भी सवाल है. लोगों की सहायता और मुआवजे के लिए आपने क्या कदम उठाए है?
दायर याचिका में मांग की गई है कि रद्द उड़ानों के सभी यात्रियों को तत्काल सहायता दी जाए और सभी टिकटों का पैसा तुरंत रिफंड किया जाए. याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि कई लोग फंसे हुए हैं. हवाई अड्डों पर जमीनी हालात अमानवीय है. हम उम्मीद कर रहे हैं कि अदालत हवाई अड्डों पर फंसे लोगों के लिए इंडिगो और जमीनी सहायके कर्मचारियों को आदेश देगी. पैसे वापस करने की कोई उचित व्यवस्था नहीं है.
मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस तुषार राव गेडेला ने कहा कि यात्रियों को हुई परेशानी और उत्पीड़न महत्वपूर्ण है. मुख्य न्यायाधीश ने पूछा क्या यात्रियों के लिए कोई कदम उठाए गए? कोई सहायता? सेवा प्रदाताओं के कर्मचारियों के व्यवहार को नियंत्रित करने के लिए क्या किया गया? एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कहा कि हम लंबे समय से FTTL लागू करना चाह रहे थे. जिस सिंगल जज के सामने कंपनियों ने अंडरटेकिंग दी थी, उसमें दो चरण जुलाई और नवंबर के थे. उन्हें मोहलत और समय चाहिए था. पहली बार मंत्रालय ने हस्तक्षेप किया है. हमने किराए को कैंप किया है, जो एक सख्त कदम है.
कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि यात्रियों को मुआवजा देने के लिए क्या कार्रवाई की गई? आप यह कैसे पक्का कर रहे हैं कि एयरलाइन स्टाफ जिम्मेदारी से पेश आए? कोर्ट ने कहा कि यह मुद्दा सिर्फ परेशानी का नहीं है, इसमें आर्थिक नुकसान और सिस्टम की नाकामी भी शामिल है. दिल्ली हाई कोर्ट ने हवाई किराए में तेजी से बढ़ोतरी पर सवाल उठाते हुए कहा कि पहले 5000 में मिलने वाले टिकट अब बढ़कर 30,000-35000 हो गए हैं.
बेंच ने पूछा, अगर कोई संकट होता, तो दूसरी एयरलाइंस को फायदा उठाने की इजाजत कैसे दी जा सकती थी? किराया 35000-39000 तक कैसे पहुच सकता है? दूसरी एयरलाइंस इतनी रकम कैसे चार्ज करना शुरू कर सकती? ऐसा कैसे हो सकता है? एएसजी ने जरूरी दस्तावेज का जिक्र करते हुए कहा कि कानूनी सिस्टम पूरी तरह से लागू हैं. कोर्ट ने कहा कि समय रहते पायलटों की नियुक्ति नहीं की गई.
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-भारत एक्सप्रेस
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