राऊज एवेन्यु कोर्ट ने दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) के एसटीपी टेंडर घोटाला मामले में गिरफ्तार पूर्व सीईओ उदित प्रकाश राय और नागेंद्र यादव को 2 दिन की एसीबी रिमांड पर भेज दिया है. दोनों के खिलाफ कोर्ट ने एक दिन पहले ही प्रोडक्शन वारंट जारी कर पेश होने का आदेश दिया था.
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने एसीबी से पूछा था कि आखिर 27 महीने बाद वह क्यों पूछताछ करना चाहती है. मामले की सुनवाई के दौरान एसीबी की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि मामले में आरोपी पंकज वर्मा से पूछताछ में कई नए तथ्य सामने आए है. लिहाजा उसकी सत्यापन के लिए पूछताछ जरूरी है.
हालांकि दोनों के वकील ने रिमांड अर्जी का विरोध किया, कहा कि मामला 27 महीने पहले दर्ज हुआ था. अब पूछताछ करना चाहती है. यह ठीक नहीं है. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने उदित प्रकाश राय के स्वास्थ्य संबंधी अनुरोध को स्वीकार करते हुए उन्हें 3 सितंबर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने की अनुमति दे दिया था.
पूर्व सीईओ उदित प्रकाश राय की ओर से पेश वकील ने पिछली सुनवाई में कहा था कि उनके मुवक्किल वर्तमान में मिजोरम सरकार में सचिव के पद पर तैनात हैं. अन्य आरोपियों की ओर से पेश वकीलों ने भी गिरफ्तारी का विरोध किया था. उन्होंने कहा था कि बिना सबूत के हिरासत में भेजना अनुचित है.
एसीबी ने मामले में कुछ 6 लोगो को गिरफ्तार किया है. एसीबी ने जैन के अलावे जिन लोगों को गिरफ्तार किया है. इनमें सत्येंद्र जैन, दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व सीईओ आईएएस अधिकारी उदित प्रकाश राय, तत्कालीन कॉन्ट्रैक्ट कंसल्टेंट अंकित श्रीवास्तव, एएन इंटरप्राइजेज के मालिक नागेंद्र यादव, यूरोटेक एनवायरनमेंट के मालिक राजा कुमार कुर्रा और श्रीजनहार के मालिक पंकज वर्मा शामिल है.
एसीबी ने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के टेंडर में घोटाले को लेकर वर्ष 2024 में एफआईआर दर्ज की थी. जांच का एक अहम हिस्सा कथित पैसों के लेनदेन से भी जुड़ा है. अधिकारियों के अनुसार उदित प्रकाश राय तक करीब 1.52 करोड़ रुपए की कथित रिश्वत पहुंचाए जाने की बात सामने आई है. प्रवर्तन निदेशालय ने भी दिसंबर 2025 में इसी मामले से जुड़े चार एसटीपी टेंडरों को लेकर अभियोजन शिकायत दाखिल की थी.
बता दें कि अक्टूबर 2022 में दिल्ली जल बोर्ड ने 10 एसटीपी को अपग्रेड करने के लिए चार बड़े टेंडर जारी किए थे. इसकी लागत करीब 1943 करोड़ बताई गई. आरोप है कि टेंडर की शर्तों में बदलाव कर ईईपीएल को फायदा पहुचाया गया था.
एसीबी के अनुसार ऐसी शर्ते जोड़ी गई, जिससे प्रतिस्पर्धा खत्म हो गई और सरकारी खजाने को नुकसान हुआ. जांच में बिचौलियों और अधिकारियों की बातचीत के इलेक्ट्रॉनिक सबूत मिले. ईमेल से पता चला कि टेंडर दस्तावेज कंपनियों को पहले ही भेज दिए गए थे.
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-भारत एक्सप्रेस
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