दिल्ली शराब नीति से संबंधित भ्रष्टाचार के मामले में सीबीआई की अपील पर सुनवाई कर रही जज जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को सुनवाई से खुद को हटने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है. लगभग चार घंटे तक चली सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है.
मामले की सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केजरीवाल, सिसोदिया सहित अन्य की ओर से दायर याचिका का विरोध किया है. मामले की सुनवाई के दौरान केजरीवाल ने कहा कि मैं कोर्ट में पहली बार आया हूं, थोड़ा सा नर्वस हूं. जज ने कहा कि मैं चाहूंगी कि आप या कोई कभी भी नहीं आए. केजरीवाल ने कहा कि आरएसएस का एक अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद है. उसको जज साहिबा चार बार अटेंड करके आई है. हम उनकी विचारधारा के सख्त खिलाफ हैं. ये कोई राजनीतिक मैटर नहीं है. केजरीवाल ने कहा कि मैं आज आपके सामने आरोपी की हैसियत से नही खड़ा हूं. मुझे माननीय कोर्ट ने बरी किया है. उन्होंने आदेश की कॉपी को पढ़ते हुए कहा कि हमें तीन महीने में लगातार 40 हजार पन्ने पढ़े और हमें बरी किया.
कोर्ट ने कहा था कि हमें फंसाया गया था. सीबीआई ने निचली अदालत के इस फैसले के खिलाफ अपील दायर की है. उन्होंने कहा कि इस अदालत ने पहली बार इस मामले की सुनवाई की. उस समय सीबीआई के अलावे कोई अन्य पक्ष मौजूद नहीं था और एकतरफ़ा आदेश पारित किया गया, जिसमें कहा गया कि ट्रायल कोर्ट का आदेश गलत है. केजरीवाल ने कहा कि सिर्फ पांच मिनट की सुनवाई में इस अदालत ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दिया, जिसमें 40 हजार से अधिक दस्तावेजों और कई सुनवाई के बाद फैसला दिया गया था.
केजरीवाल ने कहा कि मुझे पक्षपात को लेकर गंभीर आशंकाएं थी. इसलिए मैंने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा. लेकिन मुख्य न्यायाधीश ने उसे खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि सीबीआई को लोकश नही बनता है, इसलिए उन्हें पक्षकार नही बनाया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि इस कोर्ट के सामने पहले ही 5 अन्य लोग आ चुके है. मेरा मामला गिरफ्तारी से जुड़ा था, जबकि संजय सिंह, के कविता और अमन ढल की जमनात याचिकाएं भी आई थी. इस मामलों में इस कोर्ट ने जो टिप्पणी की थी, वे अपने आप में फैसलों के समान है. उन्होंने कहा कि इस मामले की सुनवाई के दौरान मुझे लगभग दोषी ठहरा दिया गया था, मुझे लगभग भ्रष्ट घोषित कर दिया गया था. बस सजा सुनाना ही बाकी रह गया था. केजरीवाल ने कहा कि अदालत को इन कारणों पर अंतिम फैसला देने की आवश्यकता नहीं थी, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि महज दो सुनवाई में ही अदालत ने कई बिंदुओं पर अंतिम निर्णय जैसा रुख अपना लिया.
केजरीवाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने रंजीत ठाकुर बनाम केंद्र सरकार के मामले में भी रिकयूजल को लेकर कहा है कि जज को ये नहीं देखना है कि वो पक्षपाती है या नही लेकिन अगर याचिकाकर्ता के मन में ऐसा संदेह होता है तो करना चाहिए. मेरे दिमाग में जो है वो मेरे और इस कोर्ट के बीच है. उन्होंने कहा कि सत्येंद्र जैन के मामले में जमानत पर 18 दिनों तक चली सुनवाई के बाद ईडी ने जज बदलने की अर्जी लगाई थी. मेरा केस भी ऐसा ही कुछ है.केजरीवाल ने कहा कि कानून साफ है भले ही जज पक्षपाती हो या ना हो, मैं आपके सामने 10 कारण रखता हूं, कि मेरे मन में संदेह क्या है? मैं सुप्रीम कोर्ट के कणक लता केस को जज उक्त मामले में कड़ी टिप्पणी रख चुका है तो अलग हो जाना चाहिए. केजरीवाल ने कहा कि सिर्फ सीबीआई की एक याचिका थी और ट्रायल कोर्ट का ऑर्डर था. ट्रायल कोर्ट का रिकॉर्ड भी नही था. ऑर्डर की जरूरत क्या थी? उसकी वजह से एक शंका पैदा हुई मेरे मन में.
कोर्ट ने कहा कि यह तो आप सवाल नहीं कर सकते कि क्या जरूरत थी. यह आप मुझे मत बताओं मैने ऑर्डर कैसे लिखा यह सुप्रीम कोर्ट को बताओगे. केजरीवाल ने कहा कि रोस्टर के हिसाब से हमारा केस ही सबसे तेज चल रहा है. अरविंद केजरीवाल के वकीलों से बातचीत करने पर कोर्ट ने आपत्ति जताई है. कोर्ट ने कहा बात मत करो प्लीज यह कहने के लिए मजबूर मत करो, मुझे घूरों मत.
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-भारत एक्सप्रेस
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