विधानसभाओं में 33 फीसदी महिला आरक्षण कानून को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार द्वारा जवाब दाखिल नही करने पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की है. कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पूछा कि केंद्र सरकार की ओर से कौन पेश हो रहा है. लेकिन सरकार के वकील मौजूद नही थे, जिसपर कोर्ट ने यह नाराजगी जताई है. जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइंया की पीठ दायर याचिका पर 4 मई को करेगी.
पिछली सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट से कहा था कि जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का अतिरिक्त समय चाहिए. जिसके बाद कोर्ट ने दे दिया था. यह याचिका मध्य प्रदेश कांग्रेस नेता डॉक्टर जया ठाकुर और नेशनल फेडरेशन इंडियन वूमेन की ओर से दायर की है.
परिसीमन प्रक्रिया की शर्त पर लागू होगा नया आरक्षण कानून
पिछली सुनवाई में अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि पहले भी संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण का मुद्दा उठाया गया, मगर इसे कभी लागू नही किया जा सका. हालांकि इस बार इसे परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने की शर्त पर लागू किया जा रहा है. संविधान संशोधन विधेयक को लोकसभा ने लगभग आम सहमति से और राज्यसभा ने आम सहमति से पारित किया. इस कानून को लागू करने में थोड़ा समय लगेगा क्योंकि जनगणना कराने सहित परिसीमन का काम अभी पूरा नही हुआ है. नारी शक्ति बंदन अधिनियम विधेयक 2023 में संसद के एक विशेष सत्र में पारित किया गया.
यह लोकसभा और दिल्ली सहित सभी राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण देने की बात कही गई है.
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-भारत एक्सप्रेस
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